कोच्चि: UDF सरकार द्वारा विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) के दो अहम विभागों को सूचना का अधिकार (RTI) कानून के दायरे से बाहर रखने के फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस छूट से पारदर्शिता कानून बेअसर हो सकता है और भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारियों को छिपाने के लिए एक आसान आड़ मिल सकती है।

गुरुवार, 22 अक्टूबर को एक असाधारण गजट अधिसूचना के जरिए, सरकार ने VACB की 'T' (टॉप सीक्रेट) शाखा के पहले और दूसरे विभागों को RTI कानून के दायरे से बाहर कर दिया। इस कदम ने सरकार के इरादों, अधिसूचना जारी करने के समय और किसी संगठन के कुछ हिस्सों को ही छूट देने की कानूनी वैधता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI कानून की धारा 24(4) के तहत, आमतौर पर किसी पूरी खुफिया या सुरक्षा एजेंसी को ही छूट दी जा सकती है, न कि उसके किसी खास हिस्से को।

पूर्व राज्य सूचना आयुक्त डॉ. ए. ए. हकीम, जिन्होंने 'जस्टिस हेमा कमेटी' की रिपोर्ट को सार्वजनिक कराने में अहम भूमिका निभाई थी, ने कहा कि इस छूट का इस्तेमाल कानून में दिए गए सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, "सूचना का अधिकार कानून, 2005 का मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है। यह कानून भ्रष्टाचार या मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ी जानकारी को केवल इस आधार पर छिपाने की अनुमति नहीं देता कि किसी संगठन को धारा 24 के तहत छूट मिली हुई है। 

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