कोच्चि: केरल हाई कोर्ट ने वायलिन वादक बालाभास्कर की मौत के मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से और जांच करने का आदेश दिया है। जस्टिस जी. गिरीश ने तिरुवनंतपुरम की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें और जांच की याचिका को खारिज कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (ASP) के पद से नीचे के अधिकारी द्वारा न की जाए। यह आदेश बालाभास्कर के माता-पिता, के. सी. उन्नी और बी. शांताकुमारी द्वारा मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दायर याचिका पर आया।
बालाभास्कर और उनकी बेटी, तेजस्विनी बाला, की मौत 25 सितंबर 2018 की सुबह पल्लीपुरम के पास एक सड़क दुर्घटना में हो गई थी। CBI ने निष्कर्ष निकाला था कि बालाभास्कर की मौत एक दुर्घटना का नतीजा थी। हालांकि, उनके माता-पिता की शिकायत के बाद, जिसमें सोने की तस्करी करने वाले गिरोह की मिलीभगत का आरोप लगाया गया था, हाई कोर्ट ने पहले और जांच का आदेश दिया था। बाद में जांच करने वाले CBI इंस्पेक्टर ने पहले के निष्कर्षों को ही दोहराया। हाई कोर्ट ने उस इंस्पेक्टर को जांच सौंपने के फैसले की कड़ी आलोचना की, जिसका पद उस अधिकारी से कम था जिसने पहले मामले को संभाला था। कोर्ट ने यह भी कहा कि CBI कोर्ट द्वारा बताई गई 20 संदिग्ध परिस्थितियों की ठीक से जांच करने में विफल रही।
कोर्ट ने कहा कि माता-पिता का यह शक कि बालाभास्कर के दोस्त, प्रकाश थम्पी ने सबूत मिटाने के लिए वायलिन वादक का मोबाइल फोन कई महीनों तक अपने पास रखा था, इसे खारिज नहीं किया जा सकता। इसने कलाभवन सोबी जॉर्ज द्वारा किए गए खुलासों की जांच के लिए वैज्ञानिक तरीकों, जिसमें लाई डिटेक्टर टेस्ट भी शामिल है, का इस्तेमाल न करने के लिए CBI की आलोचना भी की। इन कमियों को देखते हुए, हाई कोर्ट ने एक सक्षम और निष्पक्ष वरिष्ठ अधिकारी द्वारा नई जांच का आदेश दिया। इसने CBI को दो सप्ताह के भीतर एक नया जांच अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया।
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