तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा में आयोजित अखिल भारतीय लोक लेखा समिति (PAC) सम्मेलन को लेकर कांग्रेस की राज्यसभा सांसद जेबी माथेर हिशाम ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि केरल में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने, अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं का सम्मान करने और विपक्ष की चिंताओं को गंभीरता से सुनने की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह राष्ट्रीय सम्मेलन देश की संसदीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के अवसर पर जेबी माथेर ने कहा कि केरल में इस प्रतिष्ठित आयोजन का होना प्रसन्नता की बात है। उन्होंने राज्य की राजनीतिक संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती केवल बहुमत से नहीं, बल्कि असहमति और विरोधी विचारों को सम्मान देने से भी सुनिश्चित होती है।कांग्रेस सांसद ने सम्मेलन से सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद जताई। उन्होंने संसद की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल के संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सम्मेलन में सामने आने वाले महत्वपूर्ण सुझावों और निष्कर्षों को संसद में भी चर्चा के लिए उठाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।केरल विधानसभा में 3 और 4 नवंबर को अखिल भारतीय लोक लेखा समिति अध्यक्षों और सदस्यों का दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह पहला अवसर है जब केरल इस राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
सम्मेलन में संसद, विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं और केंद्रशासित प्रदेशों की विधायी संस्थाओं की लोक लेखा समितियों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। आयोजन का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक धन के उपयोग की निगरानी, वित्तीय जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श करना है।केरल सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, सम्मेलन में 26 राज्यों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों सहित लगभग 262 प्रतिभागियों के शामिल होने की व्यवस्था की गई है। दो दिवसीय आयोजन में वित्तीय लेखा परीक्षण, जवाबदेही और सुशासन में लोक लेखा समितियों की बदलती भूमिका पर चर्चा की जा रही है।सम्मेलन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा निर्धारित किया गया था। कार्यक्रम में केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, संसद की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल और केरल विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन सहित कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों की भागीदारी रखी गई है।आयोजन का विषय 'ऑडिट, जवाबदेही और सुशासन : लोक लेखा समिति की बदलती भूमिका' निर्धारित किया गया है। इस विषय के माध्यम से सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सरकारी विभागों की वित्तीय जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
लोक लेखा समिति भारत की संसदीय व्यवस्था की महत्वपूर्ण समितियों में शामिल है। इसका प्रमुख कार्य सरकारी खर्च की जांच करना और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्टों का परीक्षण करना है।जब सरकार किसी योजना या विभाग के लिए बजट निर्धारित करती है, तब यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक होता है कि आवंटित धन का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के अनुरूप किया गया है या नहीं। लोक लेखा समिति इसी जवाबदेही को मजबूत बनाने में भूमिका निभाती है।समिति सरकारी विभागों के वित्तीय कामकाज की समीक्षा करती है और विभिन्न अनियमितताओं या कमियों के संबंध में अपनी टिप्पणियां तथा सिफारिशें प्रस्तुत करती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी खर्च में पारदर्शिता बढ़ाना और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करना है।केरल का लोक लेखा समितियों से ऐतिहासिक संबंध रहा है। वर्ष 1933 में तत्कालीन त्रावणकोर विधानसभा में लोक लेखा समिति का गठन किया गया था। इसके बाद वर्ष 1957 में केरल विधानसभा ने विपक्ष के सदस्य को लोक लेखा समिति का अध्यक्ष बनाने की परंपरा अपनाई।इस व्यवस्था को संसदीय लोकतंत्र में महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे सरकारी खर्च की समीक्षा में विपक्ष को संस्थागत भूमिका मिलती है। जेबी माथेर के बयान का संबंध भी इसी राजनीतिक और संसदीय परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है।आधिकारिक जानकारी के अनुसार, केरल की लोक लेखा समिति ने पिछले लगभग 70 वर्षों में 1,257 रिपोर्टें प्रस्तुत की हैं। विधानसभा की समितियों में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिल रहा है। अलग-अलग विधानसभाओं में सरकारी खर्च की समीक्षा और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित रिपोर्टों पर कार्रवाई की प्रक्रियाओं की तुलना भी उपयोगी हो सकती है।इस प्रकार का संवाद राज्यों के बीच बेहतर कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान में सहायक होता है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल वित्तीय रिकॉर्ड और लेखा परीक्षण की नई चुनौतियों को देखते हुए लोक लेखा समितियों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। लेकिन वित्तीय जवाबदेही जैसे विषयों पर व्यापक सहमति और संस्थागत सहयोग से सार्वजनिक हित को मजबूती मिल सकती है।जेबी माथेर ने इसी पहलू की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि केरल की लोकतांत्रिक परंपरा में विरोधी विचारों और चिंताओं को सुनने का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि सम्मेलन के दौरान होने वाली चर्चाएं केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इनके निष्कर्ष संसदीय कामकाज और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में सुधार का आधार बन सकेंगे।दो दिवसीय सम्मेलन का समापन 4 नवंबर को प्रस्तावित है। इसमें संसदीय समितियों के कामकाज को मजबूत बनाने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के उपायों पर चर्चा के बाद कार्यक्रम संपन्न होगा।राजनीतिक दृष्टि से भी यह सम्मेलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अलग-अलग दलों और राज्यों से आने वाले जनप्रतिनिधियों की भागीदारी संसदीय संवाद की उपयोगिता को सामने लाती है।जेबी माथेर का संदेश स्पष्ट है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए राजनीतिक असहमति का सम्मान, सार्वजनिक धन के प्रति जवाबदेही और संवैधानिक संस्थाओं की प्रभावशीलता आवश्यक है। अब देखना होगा कि सम्मेलन में सामने आने वाले सुझावों को भविष्य में किस प्रकार संसदीय समितियों के कामकाज में शामिल किया जाता है।
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