वानियमकुलम। क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक एक बार फिर सामने आया है। मंगलवार तड़के वानियमकुलम के कोथायूर इलाके में आवारा कुत्तों के झुंड ने भेड़ों पर हमला कर दिया। इस हमले में सात भेड़ों की मौत हो गई, जबकि छह अन्य भेड़ें गंभीर रूप से घायल हो गईं। कुत्तों ने एक मेमने को भी अपना शिकार बनाया और उसे काटकर अपने साथ ले गए। घटना के बाद पशुपालक परिवार सदमे में है और इलाके में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है।

यह हमला मंगलवार सुबह करीब 4:30 बजे कोथायूर चूरक्कोट इलाके में पशुपालक अय्यप्पन की भेड़ों के झुंड पर हुआ। अय्यप्पन के अनुसार उनके झुंड में कुल 18 भेड़ें थीं। सुबह जब उन्होंने झुंड की स्थिति देखी तो कई भेड़ें मृत पड़ी थीं, जबकि कुछ घायल अवस्था में मिलीं। घटना की जानकारी मिलने के बाद आसपास के लोग भी मौके पर पहुंचे और घायल पशुओं की मदद की।

सात भेड़ों की मौत

हमले में मारी गई भेड़ों में तीन बड़ी गर्भवती भेड़ें और तीन छोटी भेड़ें शामिल थीं। इसके अलावा एक अन्य भेड़ की भी मौत हुई है। इस तरह कुल सात भेड़ों की जान चली गई। गर्भवती भेड़ों के मारे जाने से पशुपालक को दोहरा नुकसान हुआ है, क्योंकि इससे भविष्य में मिलने वाले मेमनों की संभावित आय भी प्रभावित हुई है।

अय्यप्पन ने बताया कि हमले के बाद झुंड की छह भेड़ें गंभीर रूप से घायल मिलीं। उनके शरीर पर कुत्तों के काटने के निशान थे। एक मेमने को कुत्तों के झुंड द्वारा काटकर ले जाने की भी जानकारी सामने आई है। काफी तलाश के बावजूद मेमने का पता नहीं चल सका।

तड़के हुआ हमला

स्थानीय लोगों के मुताबिक हमला मंगलवार सुबह करीब साढ़े चार बजे हुआ। उस समय अंधेरा होने के कारण कुत्तों की गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल था। माना जा रहा है कि कुत्तों ने उस समय भेड़ों पर हमला किया, जब झुंड किसी कारण से तितर-बितर हो गया था।

हमले के बाद भेड़ों में अफरातफरी मच गई। कुत्तों ने कमजोर और अलग-थलग पड़ गई भेड़ों को निशाना बनाया। सुबह होने पर जब अय्यप्पन ने झुंड को देखा तो घटना का पता चला।

पशु चिकित्सक को सूचना दी गई, जिसके बाद घायल भेड़ों का मौके पर प्राथमिक उपचार किया गया। गंभीर रूप से घायल पशुओं की स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है। पशुपालक के लिए अब घायल भेड़ों को बचाना भी बड़ी चुनौती है।

एक महीने में दूसरी बड़ी घटना

अय्यप्पन के लिए यह पहली ऐसी घटना नहीं है। करीब एक महीने पहले भी आवारा कुत्तों ने उनकी छह भेड़ों पर हमला किया था। उस घटना में भी कई भेड़ें घायल हुई थीं। लगातार दो घटनाओं के बाद अय्यप्पन की चिंता और बढ़ गई है।

पशुपालक का कहना है कि भेड़ पालन ही उनकी आय का प्रमुख और लगभग एकमात्र स्रोत है। पशुओं की मौत से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। खासकर गर्भवती भेड़ों के मारे जाने से भविष्य की आय पर भी असर पड़ा है।

अय्यप्पन का परिवार अब इस बात को लेकर चिंतित है कि यदि आवारा कुत्तों के हमले नहीं रुके तो बची हुई भेड़ों की सुरक्षा कैसे की जाएगी। एक ओर मृत पशुओं से आर्थिक नुकसान हुआ है, वहीं दूसरी ओर घायल भेड़ों के इलाज और देखभाल पर अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ रहा है।

आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों से चिंता

वानियमकुलम और आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों द्वारा मवेशियों और अन्य पालतू पशुओं पर हमले की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। इससे पशुपालकों के साथ-साथ आम लोगों में भी डर बना हुआ है।

पशुपालकों का कहना है कि वे अपने पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में घूमने वाले आवारा कुत्तों के झुंड के सामने उनकी कोशिशें कई बार नाकाम साबित होती हैं। रात और तड़के के समय खतरा और बढ़ जाता है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित स्थानीय निकाय से आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि केवल शिकायत दर्ज करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने, पशुपालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संवेदनशील इलाकों की पहचान कर आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है।

पशुपालक को मुआवजे की उम्मीद

सात भेड़ों की मौत और छह के घायल होने से अय्यप्पन को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। पशुपालक का कहना है कि पशुओं की खरीद और पालन में उनकी मेहनत और पूंजी लगी थी। भेड़ पालन से होने वाली आय से परिवार का खर्च चलता था।

लगातार हुए हमलों के कारण अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय स्तर पर पशुपालक को उचित सहायता या मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग भी उठ रही है, ताकि परिवार को कुछ राहत मिल सके।

घटना ने एक बार फिर आवारा कुत्तों की समस्या और पशुपालकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार तड़के हुए हमले में सात भेड़ों की मौत और छह के घायल होने से अय्यप्पन का परिवार गहरे सदमे में है। पशु चिकित्सक ने घायल भेड़ों का उपचार शुरू कर दिया है, लेकिन पशुपालक के सामने सबसे बड़ी चिंता अब बची हुई भेड़ों को सुरक्षित रखने और अपनी आजीविका बचाने की है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस घटना को गंभीरता से लेते हुए आवारा कुत्तों के हमलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएगा।

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