आठ साल बाद भी सड़क पर पत्थर, मारियापुरम में हादसे का खतरा

Update: 2026-08-01 10:10 GMT

इडुक्की/केरल: 2018 के विनाशकारी मानसून और बाढ़ की याद आज भी केरल के मारियापुरम पंचायत क्षेत्र में एक विशाल पत्थर के रूप में मौजूद है। बाढ़ के दौरान भूस्खलन के साथ पहाड़ से बहकर आया यह बड़ा पत्थर आठ साल बाद भी कार्थियानी कवाला-मदावनक्कानम रोड के किनारे खड़ा है और स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि 2018 के मानसून के समय से ही वे इस पत्थर को हटाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। सड़क पर मौजूद यह विशाल चट्टान न केवल यातायात में बाधा बन रही है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा रही है।

संकरी सड़क पर बना बड़ा खतरा

कार्थियानी कवाला-मदावनक्कानम रोड क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस सड़क से रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। लेकिन सड़क के किनारे मौजूद विशाल पत्थर ने रास्ते को और संकरा कर दिया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, स्थिति इतनी खराब है कि इस संकरी सड़क पर दो ऑटो-रिक्शा भी एक-दूसरे के बगल से आसानी से नहीं निकल सकते। बड़े वाहनों के आने-जाने के दौरान अक्सर परेशानी होती है और चालकों को बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है।

रात के समय यह समस्या और गंभीर हो जाती है। कम रोशनी में वाहन चालकों को पत्थर का सही अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा प्रभावित

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पत्थर की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को होती है। कई बार मोटरसाइकिल और स्कूटर सवार संतुलन खो देते हैं और पत्थर से टकरा जाते हैं।

रात के समय ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ जाती है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस पत्थर को नहीं हटाया गया तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि लोगों की सुरक्षा को देखते हुए इस मामले में तुरंत कार्रवाई की जाए।

आपदा प्रबंधन टीम ने हटाए थे कुछ हिस्से

जानकारी के अनुसार, आपदा प्रबंधन टीम ने भूस्खलन के बाद टूटे हुए पत्थर के कुछ हिस्सों को सड़क से हटाया था। इससे उस समय यातायात को कुछ राहत मिली थी, लेकिन पत्थर का मुख्य और बड़ा हिस्सा अब भी वहीं मौजूद है।

लोगों का कहना है कि केवल छोटे हिस्सों को हटाने से समस्या का समाधान नहीं हुआ। मुख्य चट्टान को हटाना जरूरी है, क्योंकि वही सड़क की चौड़ाई और सुरक्षा को प्रभावित कर रही है।

आठ साल से जारी इंतजार

2018 में आई बाढ़ और भूस्खलन ने केरल के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई थी। मारियापुरम पंचायत में यह पत्थर उस आपदा की एक निशानी बन गया है। हालांकि, स्थानीय लोग इसे स्मारक के रूप में नहीं बल्कि एक खतरे के रूप में देखते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि आपदा की यादें अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक सड़क पर मौजूद ऐसी बाधाओं को लंबे समय तक नहीं छोड़ा जा सकता।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस पत्थर को हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू करनी चाहिए।

प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय लोगों ने पंचायत और संबंधित विभागों से मांग की है कि तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से पत्थर को सुरक्षित तरीके से हटाया जाए। उनका कहना है कि जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से समाधान निकाला जाना चाहिए, ताकि सड़क और आसपास के क्षेत्र को नुकसान न पहुंचे।

लोगों ने यह भी मांग की है कि भविष्य में भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान कर सुरक्षा उपाय किए जाएं।

विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी

पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाएं बड़ी चुनौती होती हैं। ऐसे क्षेत्रों में सड़कों की सुरक्षा और रखरखाव बेहद महत्वपूर्ण होता है।

मारियापुरम का यह मामला बताता है कि आपदा के बाद पुनर्निर्माण और सुरक्षा कार्यों को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक ओर जहां सड़क संपर्क बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर यात्रियों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

फिलहाल कार्थियानी कवाला-मदावनक्कानम रोड पर मौजूद यह विशाल पत्थर स्थानीय लोगों के लिए परेशानी बना हुआ है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई करेगा और वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान निकलेगा।

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