इडुक्की: केरल के इडुक्की जिले में हुई पेट्टिमुडी भूस्खलन त्रासदी को छह साल पूरे हो गए हैं। 6 अगस्त 2020 की रात हुई इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। कन्ननदेवन हिल्स प्लांटेशन कंपनी के नयामक्कड़ एस्टेट के पेट्टिमुडी डिवीजन में अचानक आए भूस्खलन ने एक पूरे छोटे से गांव को अपनी चपेट में ले लिया था।
यह हादसा 6 अगस्त 2020 की रात करीब 11 बजे हुआ था। लगातार बारिश के बीच पहाड़ी क्षेत्र में मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थरों का सैलाब अचानक नीचे की ओर बह निकला। देखते ही देखते पेट्टिमुडी क्षेत्र में बने कई मकान और वहां रहने वाले लोग इस मलबे की चपेट में आ गए।
भूस्खलन की रफ्तार इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पहाड़ से नीचे आए मलबे ने कई घरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया और वहां रहने वाले परिवारों को भारी नुकसान पहुंचाया।
इस दर्दनाक हादसे में कुल 70 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में एक गर्भवती महिला और 18 बच्चे भी शामिल थे। इस घटना ने पूरे केरल को गहरे शोक में डाल दिया था। हादसे में चार लोग घायल भी हुए थे, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया था।
रेस्क्यू और राहत अभियान के दौरान कई दिनों तक मलबे में दबे लोगों की तलाश की गई। बचाव दल, स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवकों ने कठिन परिस्थितियों में अभियान चलाया। हालांकि, चार लोगों के शव आज तक बरामद नहीं हो सके हैं।
पेट्टिमुडी की यह त्रासदी केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि कई परिवारों के जीवन में ऐसा दर्द छोड़ गई, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। जिन लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को खोया, उनके लिए यह घटना आज भी एक गहरे घाव की तरह बनी हुई है।
हादसे के छह साल बाद भी पेट्टिमुडी के लोग उस रात को याद करते हैं, जब बारिश और भूस्खलन ने पूरे इलाके का स्वरूप बदल दिया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, उस रात की भयावह आवाजें और मलबे का दृश्य आज भी उनके मन में बसा हुआ है।
पेट्टिमुडी क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश लोग चाय बागानों से जुड़े हुए थे। वे वर्षों से इसी इलाके में रहकर अपनी आजीविका चला रहे थे। भूस्खलन ने न केवल लोगों की जान ली, बल्कि कई परिवारों के घर और जीवन का आधार भी छीन लिया।
इस घटना के बाद पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठे। विशेषज्ञों ने भारी बारिश वाले क्षेत्रों में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए बेहतर निगरानी और आपदा प्रबंधन व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया।
केरल में मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश, कमजोर होती जमीन और प्राकृतिक बदलावों के कारण ऐसे हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
पेट्टिमुडी हादसे के बाद प्रशासन ने राहत और पुनर्वास के लिए कई कदम उठाए। प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई गई और भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन योजनाओं पर ध्यान दिया गया।
हर साल 6 अगस्त को पेट्टिमुडी के पीड़ितों को याद किया जाता है। श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में मृतकों को नमन किया जाता है और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जाती है।
छह साल बाद भी पेट्टिमुडी भूस्खलन के पीड़ितों की यादें लोगों के बीच जीवित हैं। यह घटना केरल के इतिहास की सबसे दर्दनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जाती है, जिसने यह याद दिलाया कि प्रकृति के सामने इंसानी जीवन कितना संवेदनशील है।
आज भी पेट्टिमुडी की त्रासदी आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित जीवन व्यवस्था की आवश्यकता का संदेश देती है।