तिरुवनंतपुरम। केरल में बिजली की तेजी से बढ़ती मांग ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है। एयर कंडीशनर (AC) की बढ़ती बिक्री, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की संख्या में उछाल और घरेलू बिजली खपत में लगातार वृद्धि के कारण राज्य में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। केरल के बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि बिजली की खपत में जितनी तेजी से वृद्धि हुई है, उसके मुकाबले उत्पादन और उपलब्धता में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हो पाई है। सरकार को बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए दूसरे स्रोतों से महंगी दरों पर बिजली खरीदने की संभावनाएं तलाशनी पड़ रही हैं।
बिजली मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले राज्य की बिजली मांग में लगभग 1,000 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि गर्मी के प्रभाव, घरों में एयर कंडीशनर के बढ़ते इस्तेमाल और इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के कारण बिजली की खपत का पुराना स्वरूप बदल गया है। पहले शाम सात बजे से रात दस बजे तक बिजली की अधिकतम मांग दर्ज होती थी, लेकिन अब देर रात तक बिजली की खपत ऊंचे स्तर पर बनी रहती है। इसका प्रमुख कारण बड़ी संख्या में लोगों द्वारा रात के समय इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करना भी है।
सनी जोसेफ के मुताबिक, राज्य में बिजली की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, लेकिन घरेलू उत्पादन उस गति से नहीं बढ़ सका है। सितंबर में दिए गए उनके बयान के अनुसार, पिछले वर्ष लगभग 4,000 मेगावाट रहने वाली बिजली मांग बढ़कर करीब 5,200 मेगावाट तक पहुंच गई थी। इस बढ़ोतरी ने बिजली वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाला है। राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ बिजली कटौती को न्यूनतम रखना है।
बिजली मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ परिवहन के लिहाज से सकारात्मक परिवर्तन है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त बिजली उत्पादन और चार्जिंग संबंधी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता भी है। कई परिवार काम से लौटने के बाद रात में अपने इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करते हैं। ऐसे समय में घरों के एयर कंडीशनर, पंखे और अन्य उपकरण भी चलते रहते हैं। इससे देर रात के समय बिजली वितरण नेटवर्क पर भार बढ़ जाता है।
राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण बिजली की नई जरूरतें सामने आ रही हैं। एनडीटीवी के एक विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2019 से 2026 के दौरान केरल में लगभग 4.28 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया, चारपहिया और ऑटोरिक्शा पंजीकृत हुए। इन वाहनों के इस्तेमाल के साथ चार्जिंग सुविधाओं और ऊर्जा प्रबंधन की जरूरत भी बढ़ी है। विशेषज्ञों के सामने सवाल है कि भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के अनुसार बिजली वितरण प्रणाली का विस्तार कैसे किया जाए।
केरल में बिजली संकट की एक बड़ी वजह राज्य की बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता भी है। बिजली मंत्री के अनुसार, राज्य अपनी कुल बिजली आवश्यकता का लगभग 25 प्रतिशत ही स्वयं पैदा कर पाता है। बाकी मांग पूरी करने के लिए दूसरे राज्यों और बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में जब देश के अन्य हिस्सों में भी बिजली की मांग बढ़ जाती है, तो बाजार से पर्याप्त बिजली हासिल करना मुश्किल हो जाता है।
महंगी बिजली खरीदने के मुद्दे पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाना है। सितंबर में उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर काफी ऊंची दरों पर भी बिजली खरीदने के विकल्प तलाश रही है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अधिक कीमत पर बिजली खरीदने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। बिजली की उपलब्धता सीमित होने के कारण केवल ज्यादा कीमत देने से भी हर समय आवश्यक मात्रा में बिजली मिलना सुनिश्चित नहीं है।
बिजली मंत्री ने पुराने बिजली खरीद समझौतों से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 465 मेगावाट बिजली की आपूर्ति से संबंधित एक दीर्घकालिक समझौता रद्द होने के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण हुई। इस समझौते के तहत लगभग 4.29 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध हो सकती थी। मंत्री ने कहा कि इस मामले में कानूनी समाधान तलाशने की आवश्यकता है, ताकि अपेक्षाकृत कम लागत वाली बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
सरकार बिजली संकट के दीर्घकालिक समाधान के लिए सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को विकसित करने पर भी जोर दे रही है। मंत्री ने कहा कि दिन के समय सौर ऊर्जा से पर्याप्त बिजली उत्पादन की संभावनाएं हैं, लेकिन रात में उसका उपयोग करने के लिए प्रभावी बैटरी स्टोरेज सिस्टम जरूरी है। इससे शाम और रात के दौरान बढ़ने वाली मांग को पूरा करने में सहायता मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त जलविद्युत परियोजनाओं के विस्तार, बिजली वितरण नेटवर्क के आधुनिकीकरण और भविष्य की मांग के अनुरूप ऊर्जा खरीद की रणनीति तैयार करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हो रही है। सरकार के सामने बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के साथ खर्च नियंत्रित रखने की दोहरी चुनौती बनी हुई है।
बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने संकेत दिया कि बिजली संकट का समाधान तत्काल संभव नहीं है। इसके लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ऊर्जा भंडारण व्यवस्था मजबूत करने और उपभोक्ताओं के बदलते बिजली उपयोग के अनुसार योजना बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से बिजली के जिम्मेदार उपयोग में सहयोग की अपील भी की है।
केरल की मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि एयर कंडीशनर और इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता इस्तेमाल बिजली क्षेत्र के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहा है। आने वाले समय में बिजली उत्पादन, भंडारण और वितरण क्षमता में पर्याप्त निवेश नहीं हुआ, तो मांग और आपूर्ति के बीच अंतर और बढ़ सकता है। फिलहाल राज्य सरकार की प्राथमिकता अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करना और उपभोक्ताओं को यथासंभव निर्बाध आपूर्ति उपलब्ध कराना है।
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