तिरुवनंतपुरम। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में यूथ कांग्रेस और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने गुरुवार को आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी हॉस्टल के पास हुई हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि SFI कार्यकर्ताओं को जानबूझकर निशाना बनाया गया। उन्होंने इसे एक सुनियोजित कार्रवाई बताते हुए यूथ कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए।
विजयन ने फेसबुक पर जारी बयान में दावा किया कि यूथ कांग्रेस की मशाल रैली का वास्तविक निशाना यूनिवर्सिटी हॉस्टल और वहां मौजूद SFI कार्यकर्ता थे। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसा के जरिए राजनीतिक माहौल बदलने और राज्य सरकार की कथित नाकामियों से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश की गई। उन्होंने इसे RSS को खुश करने की कोशिश भी बताया। ये आरोप पिनाराई विजयन की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक बुधवार शाम यूथ कांग्रेस का मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर निकाला गया था। मार्च तिरुवनंतपुरम के पालयम इलाके में यूनिवर्सिटी मेन्स हॉस्टल के पास पहुंचा तो हालात बिगड़ गए और यूथ कांग्रेस-KSU तथा SFI कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। इसके बाद दोनों तरफ से पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंके जाने की खबरें सामने आईं।
प्रत्यक्ष घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि हॉस्टल की ओर से पहले उन पर पत्थर और बोतलें फेंकी गईं। दूसरी ओर SFI ने आरोप लगाया कि यूथ कांग्रेस और KSU कार्यकर्ताओं ने हॉस्टल परिसर की ओर पत्थर, डंडे और जलती मशालें फेंकीं। पुलिस के अनुसार दोनों समूहों के बीच टकराव बढ़ने के बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी।
झड़प के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने यूनिवर्सिटी परिसर के आसपास लगे फ्लेक्स बोर्ड और अन्य सामग्री को भी नुकसान पहुंचाया। हालात बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज किया। बाद में पुलिस यूनिवर्सिटी हॉस्टल परिसर में भी दाखिल हुई। इस कार्रवाई में कुछ छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए।
घटना के बाद पिनाराई विजयन और CPI(M) के कई वरिष्ठ नेता यूनिवर्सिटी हॉस्टल पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद छात्रों से मुलाकात की और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। CPI(M) तथा SFI नेताओं ने आरोप लगाया कि हॉस्टल के भीतर छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। SFI ने इसके विरोध में गुरुवार को कक्षाओं के बहिष्कार की घोषणा भी की।
विजयन ने अपने बयान में कहा कि SFI कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई को सामान्य राजनीतिक टकराव के रूप में नहीं देखा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि यूथ कांग्रेस की ओर से जानबूझकर ऐसी स्थिति बनाई गई, जिससे हिंसा भड़के और बाद में उसका राजनीतिक लाभ लिया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य में राजनीतिक मतभेदों के बावजूद छात्र संगठनों और हॉस्टल को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
दूसरी तरफ यूथ कांग्रेस नेतृत्व ने विजयन और CPI(M) के आरोपों को खारिज किया है। यूथ कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका प्रदर्शन चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ था तथा SFI से उसका कोई संबंध नहीं था। उन्होंने सवाल किया कि जब विरोध प्रदर्शन SFI या CPI(M) के खिलाफ नहीं था, तो छात्र संगठन के कार्यकर्ता इसमें क्यों शामिल हुए। यूथ कांग्रेस ने दावा किया कि हमला पहले हॉस्टल की तरफ से हुआ और उसके बाद ही स्थिति बिगड़ी।
यह राजनीतिक टकराव उस समय हुआ है जब कांग्रेस देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध अभियान चला रही है। कांग्रेस नेतृत्व ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। चुनाव आयोग ने विपक्ष की ओर से लगाए गए कई आरोपों को खारिज करते हुए अपनी प्रक्रियाओं को कानून के अनुरूप बताया है।
तिरुवनंतपुरम की घटना के बाद कांग्रेस, CPI(M) और BJP के बीच भी तीखी राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमे एक-दूसरे पर हिंसा को बढ़ावा देने और RSS-BJP को लाभ पहुंचाने के आरोप लगा रहे हैं। इस बीच पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया है और घटना से जुड़े वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
पिनाराई विजयन का बयान इस पूरे विवाद को और राजनीतिक बना देता है। उन्होंने यूथ कांग्रेस पर सुनियोजित हिंसा का आरोप लगाया है, जबकि यूथ कांग्रेस इसे पूरी तरह खारिज करते हुए SFI पर पहले हमला करने का आरोप लगा रही है। ऐसे में घटना की वास्तविक शुरुआत और जिम्मेदारी को लेकर अंतिम तस्वीर पुलिस जांच और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल तिरुवनंतपुरम की झड़प के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। SFI और यूथ कांग्रेस दोनों अपने-अपने दावों पर कायम हैं, जबकि पुलिस की भूमिका भी बहस के केंद्र में है। पिनाराई विजयन ने इस घटना को राजनीतिक साजिश बताते हुए सरकार और यूथ कांग्रेस दोनों पर निशाना साधा है, वहीं कांग्रेस पक्ष का कहना है कि उसका मार्च चुनाव आयोग के खिलाफ था और हिंसा के लिए SFI जिम्मेदार है।