मलप्पुरम: IUML अपनी हालिया रीस्ट्रक्चरिंग के ज़रिए अपनी संगठनात्मक और राजनीतिक छवि को नए सिरे से गढ़ रही है। इसका मकसद समुदाय-आधारित राजनीति से हटकर एक व्यापक पहचान बनाना है, जिससे यह पार्टी पारंपरिक रूप से जुड़ी रही है। गैर-मुस्लिम नेता और DYFI के पूर्व राज्य कोषाध्यक्ष सी. श्याम सुंदर को पार्टी का राज्य उपाध्यक्ष बनाना, लीग की राजनीतिक पहुंच बढ़ाने और CPM के उस अभियान का मुकाबला करने की कोशिश का एक स्पष्ट संकेत है, जिसमें उसे सांप्रदायिक संगठन के तौर पर पेश किया जाता रहा है।

हालांकि, यह बदलाव सिर्फ़ श्याम सुंदर को पद देने तक ही सीमित नहीं है। लीग का राजनीतिक विकास महिलाओं और 'हरिता' (Haritha) की पूर्व नेताओं के लिए जगह बनाने, विधानसभा चुनाव में महिलाओं को उम्मीदवार बनाने और टिकट न पाने वाले नेताओं को समायोजित करने की कोशिशों में भी दिखता है।

 श्याम सुंदर का पदोन्नति काफी राजनीतिक महत्व रखती है। पल्लासना के रहने वाले और DYFI के पूर्व राज्य कोषाध्यक्ष रहे श्याम सुंदर ने 2010 में पार्टी के भीतर गुटीय खींचतान के कारण CPM छोड़ दी थी और बाद में IUML में शामिल हो गए थे। बाद में वे पार्टी के किसान विंग, 'स्वतंत्र कृषक संघम' (Swathanthra Karshaka Sangham) में अहम पदों पर पहुंचे।

लीग में उनके शीर्ष स्तर पर पहुंचने का यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब CPM ने IUML की सांप्रदायिक छवि को लेकर हमले तेज़ कर दिए हैं। मुस्लिम समुदाय से बाहर के एक पूर्व वामपंथी युवा नेता को राज्य नेतृत्व के अहम पद पर बिठाकर, लीग ने उस अभियान का एक मज़बूत राजनीतिक जवाब तैयार कर लिया है।

 

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