कोच्चि: केरल हाई कोर्ट ने कहा है कि अलग-अलग अथॉरिटीज़ की ओर से कानूनी वारिस सर्टिफिकेट (legal heirship certificate) की मांग को देखते हुए, अब समय आ गया है कि राज्य सरकार ऐसे सर्टिफिकेट जारी करने के लिए कोई कानून बनाए या नियम तय करे।

हाई कोर्ट ने एक विलेज ऑफिसर के उस आदेश को भी रद्द कर दिया जिसमें कानूनी वारिस सर्टिफिकेट के लिए आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि मृतक लंबे समय से विदेश में रह रहा था और इसलिए, ऐसे व्यक्ति के कानूनी वारिसों की पहचान करने में व्यावहारिक कठिनाई थी।

जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने यह आदेश कोट्टायम के बेबी कुरियन की याचिका पर दिया, जो अब कैलिफोर्निया में रहते हैं और उन्होंने कोट्टायम तालुक तहसीलदार के आदेश को चुनौती दी थी।

बेबी और उनका परिवार 'ओवरसीज सिटिजन्स ऑफ इंडिया' (OCI) हैं। 2018 में अमेरिका में अपनी पत्नी की मौत के बाद, याचिकाकर्ता ने कानूनी वारिस सर्टिफिकेट जारी करने के लिए तहसीलदार के पास आवेदन किया। हालांकि, आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि मृतक के कानूनी वारिसों के बारे में जांच करने में व्यावहारिक कठिनाई थी, क्योंकि वह कई वर्षों से विदेश में रह रही थीं और उन्हें विदेश में ही दफनाया गया था।

कोर्ट ने गौर किया कि कानूनी वारिस सर्टिफिकेट जारी करने के आवेदनों से निपटने के लिए कोई लिखित कानून नहीं है।

कानूनी वारिस सर्टिफिकेट जारी करने के संबंध में कोई कानूनी प्रावधान न होने के कारण, ऐसे सर्टिफिकेट के लिए एकमात्र प्रक्रिया जो पहचानी जा सकती है, वह केरल विलेज मैनुअल के तहत बताई गई प्रक्रिया है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि विलेज मैनुअल न तो कोई कानून है और न ही कोई ऐसा नियम जिसे कानूनी मान्यता या बल प्राप्त हो।

 

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