ड्रोन-लिडार से खदानों पर नजर, अवैध खनन पर कड़ा शिकंजा

Update: 2026-07-31 11:40 GMT

केरल : खदानों में होने वाली गतिविधियों की सही निगरानी और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए इस्तेमाल की जा रही ड्रोन-लिडार तकनीक अब प्रशासन के लिए एक प्रभावी हथियार साबित हो रही है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से खदानों की डिजिटल मैपिंग की जा रही है, जिससे खनन क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन किया जा सकता है।

हालांकि, ड्रोन-लिडार प्रणाली को लागू किए जाने के बाद शुरुआती दौर में कई चुनौतियां भी सामने आईं। पर्याप्त संख्या में ड्रोन और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण कई बार सर्वे रिपोर्ट मिलने में देरी होती थी। इसके चलते खदानों की निगरानी और जांच प्रक्रिया अपेक्षित गति से नहीं चल पाती थी।

पुराने तरीके में थी गड़बड़ी की संभावना

ड्रोन तकनीक से पहले खदानों में निकाली गई चट्टानों की मात्रा का आकलन करने के लिए अधिकारियों को खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करना पड़ता था। अधिकारी खदान क्षेत्र में पहुंचकर निकाले गए पत्थरों और चट्टानों की मात्रा का अनुमान लगाते थे।

इस प्रक्रिया में समय अधिक लगता था और मानवीय हस्तक्षेप के कारण गलतियों की संभावना भी बनी रहती थी। कई बार खदानों से वास्तविक मात्रा से अधिक खनन किए जाने की जानकारी समय पर सामने नहीं आ पाती थी।

प्रशासन के अनुसार, पारंपरिक सर्वेक्षण प्रक्रिया में खदानों के पूरे क्षेत्र का सटीक आकलन करना मुश्किल होता था। इसी वजह से निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ड्रोन-लिडार तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया।

3D इमेज से मिलती है सटीक जानकारी

ड्रोन-लिडार सर्वे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे खदान क्षेत्र की त्रि-आयामी (3D) तस्वीर तैयार की जाती है। इस डिजिटल मॉडल के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि खनन नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।

तकनीक की मदद से यह जांचना आसान हो जाता है कि खदानों में तय सीमा से अधिक गहराई तक खुदाई तो नहीं की गई है या किनारों से अतिरिक्त खनन तो नहीं किया गया।

इसके अलावा डिजिटल मैपिंग से यह भी पता लगाया जा सकता है कि कोई खदान अपने निर्धारित क्षेत्र से बाहर तो नहीं फैल गई है। यदि खनन क्षेत्र आसपास की निजी जमीन या वन भूमि तक पहुंच गया है, तो उसकी पहचान भी आसानी से की जा सकती है।

कई खदानों पर हुई कार्रवाई

माइनिंग और जियोलॉजी विभाग ने ड्रोन सर्वे के जरिए कई ऐसी खदानों की पहचान की है, जहां नियमों का उल्लंघन पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, कुछ खदान संचालकों ने निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में चट्टानों का खनन किया था।

ड्रोन सर्वे से मिले प्रमाणों के आधार पर ऐसी खदानों के खिलाफ कार्रवाई की गई और लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया। विभाग का कहना है कि यह तकनीक अवैध खनन रोकने और सरकारी राजस्व की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

डिजिटल निगरानी से बढ़ी जवाबदेही

ड्रोन-लिडार तकनीक के इस्तेमाल से खदान संचालन में पारदर्शिता बढ़ी है। अब खनन गतिविधियों का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा सकता है, जिससे भविष्य में तुलना और जांच करना आसान हो जाता है।

अधिकारियों का कहना है कि पहले जहां खदानों की जांच के लिए काफी समय और संसाधन खर्च होते थे, वहीं अब तकनीक की मदद से कम समय में अधिक सटीक जानकारी प्राप्त की जा रही है।

यह प्रणाली न केवल अवैध खनन पर रोक लगाने में मदद कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

वन और पर्यावरण सुरक्षा में मददगार

खनन गतिविधियों का प्रभाव आसपास के पर्यावरण पर पड़ सकता है। कई बार निर्धारित क्षेत्र से बाहर खनन होने से वन क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

डिजिटल मैपिंग के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित कर सकता है कि खदानें केवल आवंटित क्षेत्र में ही संचालित हों। इससे पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को समय रहते रोका जा सकता है।

तकनीकी संसाधन बढ़ाने की जरूरत

हालांकि ड्रोन-लिडार प्रणाली के बेहतर परिणाम सामने आए हैं, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि इसके प्रभावी इस्तेमाल के लिए अधिक संख्या में ड्रोन और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत है।

पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने पर नियमित सर्वे तेजी से किए जा सकते हैं और खदानों की निगरानी और अधिक प्रभावी हो सकती है।

भविष्य में और मजबूत होगी निगरानी व्यवस्था

खनन क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से आने वाले समय में निगरानी व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है। ड्रोन-लिडार जैसे आधुनिक उपकरण प्रशासन को सटीक डेटा उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करना आसान हो रहा है।

माइनिंग और जियोलॉजी विभाग का मानना है कि डिजिटल सर्वे और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

Tags:    

Similar News