Malappuram : 2,000 साल पुराने पैरों के निशान और प्राचीन संरचनाओं के अवशेष मिले
Kerala केरल: केरल के मलप्पुरम जिले में चालियार नदी के किनारे स्थित पुराने गांव कीझुपरम्बा में एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज सामने आई है। यहां लगभग 2,000 साल पुराने पैरों के निशान और प्राचीन संरचनाओं के संकेत मिलने से इतिहासकारों और शोधकर्ताओं में उत्सुकता बढ़ गई है। यह खोज क्षेत्र के प्राचीन इतिहास और मानव बसावट के नए पहलुओं को उजागर कर सकती है।
इस खोज की जांच कोझिकोड यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के प्रोफेसर Shivadasan P और उनकी शोध टीम द्वारा की गई है। टीम ने स्थल पर मौजूद विभिन्न अवशेषों का अध्ययन किया और उनके ऐतिहासिक महत्व का आकलन किया। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि यह क्षेत्र प्राचीन मानव गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा हो सकता है।
कीझुपरम्बा अमशाम देशम के अंतर्गत आने वाले थ्रिक्कलायुर मंदिर देवस्वोम के मैदान में कई पोस्ट होल (स्तंभों के निशान) भी पाए गए हैं। इन संरचनात्मक अवशेषों से संकेत मिलता है कि यहां कभी किसी प्रकार की स्थायी या अर्ध-स्थायी बस्ती या निर्माण मौजूद रहा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ये अवशेष किसी प्राचीन सभ्यता या धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों के बीच इस खोज को लेकर अलग-अलग मान्यताएं भी सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लाल चट्टानों पर मौजूद ये गड्ढे संभवतः मानव निर्मित हैं, जिन्हें लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। एक स्थानीय मान्यता के अनुसार, ये छेद टीपू सुल्तान के अभियान के दौरान ब्रिटिश सेना के घोड़ों को फंसाने या रोकने के लिए बनाए गए थे। हालांकि समय के साथ ये संरचनाएं मिट्टी और प्राकृतिक बदलावों से भर गईं और अब केवल उनके अवशेष ही दिखाई देते हैं।
पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लोककथाओं को ऐतिहासिक प्रमाणों के साथ जोड़कर देखना आवश्यक है, क्योंकि कई बार स्थानीय परंपराएं और वास्तविक ऐतिहासिक तथ्य एक-दूसरे से भिन्न हो सकते हैं। इसलिए इस स्थल पर और विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता बताई जा रही है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि इन पैरों के निशानों और पोस्ट होल की सही उम्र और उत्पत्ति की पुष्टि हो जाती है, तो यह खोज केरल के प्राचीन इतिहास को समझने में एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। इससे यह भी स्पष्ट हो सकता है कि इस क्षेत्र में हजारों साल पहले किस प्रकार की मानव बस्तियां और गतिविधियां मौजूद थीं।
फिलहाल, इस पूरे क्षेत्र को और गहन अध्ययन के लिए चिन्हित किया गया है और विशेषज्ञों की टीम आगे की जांच में जुटी हुई है। पुरातात्विक दृष्टि से यह खोज न केवल केरल बल्कि पूरे दक्षिण भारत के प्राचीन इतिहास को समझने में एक अहम कड़ी साबित हो सकती है।