तिरुवनंतपुरम: अधिकारियों ने इडुक्की जिले में इलायची की खेती के लिए सरकारी ज़मीन पट्टे (लीज) पर देने में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। कई मामलों में, अधिकारियों ने कथित तौर पर ज़मीन के सर्वे नंबर बदल दिए ताकि उसे 'एलामाला वन' (Elamala forest) श्रेणी से बाहर निकाला जा सके, जिससे उसे फिर से बेचने का रास्ता साफ हो गया। ऐसे 600 से ज़्यादा मामले सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि इस ज़मीन को 40 लाख से 70 लाख रुपये प्रति एकड़ की कीमत पर फिर से बेचा जा रहा है।
एलामाला वन क्षेत्र में ज़मीन पर राजस्व विभाग का अधिकार है, जबकि पेड़ों पर वन विभाग का अधिकार है। पट्टे पर दी गई ज़मीन पर केवल इलायची की खेती और बागान में काम करने वाले मज़दूरों के रहने की अनुमति है। हालाँकि, कुमिली स्थित 'सहायक इलायची निपटान कार्यालय' (Assistant Cardamom Settlement Office) - जो इलायची बागानों से जुड़ी पट्टे की प्रक्रियाओं को संभालता है - ने कथित तौर पर लाखों रुपये की रिश्वत लेकर इन अनियमितताओं की अनदेखी की है। पट्टे के नवीनीकरण (renewal) के आवेदनों पर समय रहते कार्रवाई न होने के कारण सरकार को भी भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है। ये बातें ज़मीन राजस्व आयुक्त (Land Revenue Commissioner) द्वारा नियुक्त अधिकारियों की छह सदस्यीय टीम की एक रिपोर्ट में सामने आई हैं, जो निरीक्षण के बाद तैयार की गई थी। 2021 के बाद से ज़मीन पट्टे के लिए मिले 380 आवेदनों को तो रजिस्टर में दर्ज ही नहीं किया गया है।
इसके बजाय, उन्हें 50-50 के बंडलों में बांधकर रख दिया गया है। 2022 के बाद से पट्टे के नवीनीकरण के लिए मिले 1,606 आवेदनों में से केवल 648 को ही फाइलों में बदला गया है। अधिकारियों की मिलीभगत: पीरमाडे, उडुंबनचोला, देविकुलम और इडुक्की तालुकों के 31 गांवों में इलायची की खेती के लिए उपयुक्त कुल 1,07,197 हेक्टेयर ज़मीन की पहचान की गई है। इसमें से केवल 10,770 हेक्टेयर ज़मीन ही पट्टे पर दी गई है। पट्टे की अवधि खत्म होने पर उसे नवीनीकृत करने की ज़िम्मेदारी 'निपटान कार्यालय' (settlement office) की है।
रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों के अनुसार, पट्टे के नवीनीकरण के लिए ज़मीन के हर 'सेंट' (cent) पर 50,000 से 1 लाख रुपये तक की रिश्वत ली जाती है और इसे इसमें शामिल लोगों के बीच बांट लिया जाता है। इस कार्यालय में 20 कर्मचारी काम करते हैं। फील्डवर्क के लिए जिम्मेदार दो डिप्टी तहसीलदार, तीन विशेष ग्राम अधिकारी और दो ग्राम सहायक, कथित तौर पर कई सालों से अपनी एडवांस टूर डायरी तैयार करने या उसे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपने में विफल रहे हैं। पट्टेदारों (लीज लेने वालों) के मुनाफा कमाने के कारण सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। 20 साल के पट्टे के तहत, सरकार को प्रति हेक्टेयर 5,000 रुपये का प्रीमियम और 250 रुपये का वार्षिक पट्टा किराया मिलता है। इलायची के एक एकड़ बागान से लगभग 500 किलोग्राम इलायची का उत्पादन होता है। 2,500 रुपये प्रति किलोग्राम की मौजूदा बाजार कीमत के हिसाब से, एक पट्टेदार प्रति एकड़ 12.5 लाख रुपये कमाता है। उत्पादन लागत को घटाने के बाद, मुनाफा लगभग 6.25 लाख रुपये बैठता है।
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