तिरुवनंतपुरम: परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन ने विधानसभा को बताया कि राज्य सरकार यह नहीं चाहती कि 'प्रियदर्शनी योजना' की सफलता का नुकसान निजी बस मालिकों को उठाना पड़े। उन्होंने कहा कि KSRTC निजी बसों को 'वेट-लीज' (wet-lease) आधार पर लेने के लिए तैयार है।
उन्होंने इस आरोप को खारिज कर दिया कि निजी बसों की संख्या में भारी कमी केवल 'प्रियदर्शनी योजना' के कारण आई है। उन्होंने बताया कि अध्ययनों से पता चलता है कि 'प्रियदर्शनी योजना' शुरू होने से पहले, यानी 2001 से 2026 के बीच ही निजी बसों की संख्या में 28 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी थी। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य कारण टैक्स की दरों में बढ़ोतरी थी, और वी.डी. सतीसन सरकार ने इन दरों को आधा करने का एक ऐतिहासिक फैसला लिया है।
उन्होंने कहा, "प्रियदर्शनी योजना के बाद, लोग सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इस योजना के तहत अब तक 14 करोड़ यात्राएं पूरी हो चुकी हैं, और महिलाओं की कुल यात्राओं में 101 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरकार नहीं चाहती कि इस सफलता का खामियाजा निजी बस मालिकों को भुगतना पड़े। इसीलिए 'पद्मकुमार आयोग' का गठन किया गया है। पद्मकुमार आयोग द्वारा पहचानी गई 'ओवरलैपिंग' (मार्गों के एक-दूसरे पर ओवरलैप होने) की समस्या का अध्ययन करने के लिए हमने 'सुरेश बाबू समिति' बनाई है।