केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत से बिना शर्त माफी मांगी है। यह माफी कांग्रेस की केरल इकाई के आधिकारिक X (ट्विटर) अकाउंट पर प्रकाशित एक विवादित पोस्ट को लेकर मांगी गई है। पार्टी ने कहा है कि यह पोस्ट बिना अनुमति के डाली गई थी और यह पार्टी नेतृत्व के विचारों को नहीं दर्शाती है।
21 अक्टूबर को मिले एक कानूनी नोटिस के जवाब में, KPCC अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा कि यह पोस्ट विजय थोट्टाथिल ने पार्टी नेतृत्व की जानकारी, मंजूरी या सलाह के बिना प्रकाशित की थी। उन्होंने बताया कि थोट्टाथिल को उनके पद से हटा दिया गया है और उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का निर्देश दिया गया है।
जवाब में इस बात को दोहराया गया कि KPCC संविधान, न्यायिक स्वतंत्रता और CJI के संवैधानिक पद का पूरा सम्मान करती है। इसमें कहा गया है कि पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्द न तो KPCC की नीति हैं, न ही पार्टी की कोई राय या आधिकारिक रुख।
जवाब में कहा गया, "मुख्य न्यायाधीश से इस्तीफा मांगने और उनकी जगह किसी और को लाने का सुझाव देना अनुचित था। ऐसी बातें पार्टी के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर नहीं आनी चाहिए थीं।"
KPCC ने पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा पर भी कड़ी आपत्ति जताई और कानूनी नोटिस में बताए गए बयानों को वापस ले लिया। जोसेफ ने पार्टी की ओर से CJI से बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह माफी, थोट्टाथिल से मांगी गई सार्वजनिक माफी से अलग है।
जवाब में कहा गया, "बिना अनुमति के पोस्ट किए जाने की बात केवल एक तथ्य के रूप में बताई गई है, न कि पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्दों को सही ठहराने के लिए।"
यह विवादित पोस्ट 12 अक्टूबर को कांग्रेस की केरल इकाई के आधिकारिक X अकाउंट पर प्रकाशित की गई थी। इसमें लिखा था, "प्रिय सूर्य कांत, अगर कानून-व्यवस्था आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ लेंगे जो इसे संभाल सके।"
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत।
सनी जोसेफ ने कांग्रेस नेताओं को सार्वजनिक बयान देने को लेकर आगाह किया।
अपने जवाब में, KPCC ने यह भी माना कि पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुंच और पार्टी के संचार (कम्युनिकेशन) के लिए मंजूरी की प्रक्रियाओं की समीक्षा करने की आवश्यकता है।
जवाब में कहा गया कि भले ही पार्टी के डिजिटल संचार में कोई बाहरी पेशेवर एजेंसी शामिल हो, फिर भी प्रभावी निगरानी (oversight) की जरूरत बनी रहती है। पार्टी ने कहा कि वह इस पोस्ट के ड्राफ्ट तैयार करने, उसकी समीक्षा करने और उसे प्रकाशित करने की प्रक्रिया की जांच करेगी। साथ ही, हर चरण में शामिल लोगों, अकाउंट की परमिशन, इस्तेमाल किए गए डिवाइस और इससे जुड़े आंतरिक पत्राचार की भी जांच की जाएगी।
KPCC ने आगे कहा कि इससे जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, एक्सेस लॉग, अप्रूवल रिकॉर्ड और आंतरिक बातचीत को सुरक्षित रखा जाएगा। पार्टी ने यह भी कहा कि पोस्ट को सार्वजनिक रूप से हटा देने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि कानूनी जांच के लिए जरूरी सामग्री को नष्ट कर दिया जाए।
पार्टी का यह भी कहना है कि बिना किसी ठोस सबूत के, किसी व्यक्ति या राजनीतिक नेता पर पोस्ट को मंजूरी देने या उसमें मिलीभगत होने का आरोप नहीं लगाया जाना चाहिए।
पत्र में लिखा है, "KPCC ने आपके नोटिस में बताए गए बयानों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और उन्हें वापस ले लिया है। पार्टी की ओर से, मैं भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) से इस पोस्ट के प्रकाशन और इसमें इस्तेमाल की गई भाषा से हुए अनादर के लिए बिना शर्त माफी मांगता हूं। यह माफी उस सार्वजनिक माफी से अलग है, जो श्री विजय थोट्टाथिल से मांगी गई है, जो असल में इस पोस्ट के लिए जिम्मेदार हैं। पोस्ट के लिए पहले से कोई मंजूरी नहीं ली गई थी - यह बात केवल एक तथ्य के रूप में बताई गई है, न कि इस्तेमाल की गई भाषा को सही ठहराने के लिए।"
न्यायिक फैसलों की आलोचना करने और सार्वजनिक बातचीत में गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा के बीच फर्क करते हुए, KPCC ने कहा कि राजनीतिक असहमति का मतलब यह नहीं है कि पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा को सही ठहराया जा सके।
जवाब में कहा गया है कि पार्टी अपना स्पष्टीकरण और माफीनामा अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म के जरिए भी जारी करेगी, ताकि यह उन लोगों तक पहुंच सके जिन्होंने पहले वे बयान देखे थे।