Kerala : पेरियार नदी की सफाई में जुटे सामाजिक कार्यकर्ता की डूबने से मौत

Update: 2026-07-15 10:07 GMT

अलुवा : केरल के पेरियार नदी किनारे स्थित चोवरा घाट को साफ-सुथरा रखने और उसकी देखभाल में जुटे एक स्थानीय व्यक्ति की नदी में डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान कुट्टमस्सेरी निवासी निषाद कोट्टाकुडी के रूप में हुई है। निषाद लंबे समय से नदी घाट की सफाई और संरक्षण के काम में स्थानीय लोगों के साथ जुड़े हुए थे।

जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम निषाद रोज की तरह चोवरा घाट की सफाई और आसपास के क्षेत्र की देखभाल के काम में लगे थे। सफाई का काम पूरा करने के बाद वह हाथ-पैर धोने के लिए नदी के किनारे गए थे। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वह पेरियार नदी में गिर गए।

घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन काफी प्रयासों के बाद भी उन्हें तुरंत बाहर नहीं निकाला जा सका। हादसे की सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोगों और संबंधित टीमों ने तलाश अभियान चलाया। हालांकि, निषाद को बचाया नहीं जा सका।

निषाद के दोस्तों के अनुसार, वह चोवरा घाट और आसपास के इलाके को साफ और सुरक्षित रखने के लिए लगातार काम करते थे। वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर चोवरा फेरी पार्क और उसके आसपास के क्षेत्र में सफाई अभियान चलाते थे। इसके अलावा वह वहां घास काटने, पौधे लगाने और घाट की सुरक्षा से जुड़े कार्यों में भी योगदान देते थे।

निषाद के मित्र ब्रिनर ने बताया कि निषाद का नदी घाट से गहरा जुड़ाव था। वह कुट्टमस्सेरी CITU यूनियन के कार्यकर्ता थे और पोर्टर का काम खत्म करने के बाद नियमित रूप से चोवरा घाट पहुंचते थे। वहां वह अपने साथियों के साथ मिलकर घाट की देखभाल और सफाई में जुट जाते थे।

स्थानीय लोगों के अनुसार, चोवरा घाट पर बड़ी संख्या में लोग नहाने और शाम का समय बिताने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में घाट को साफ और सुरक्षित बनाए रखने में निषाद की भूमिका महत्वपूर्ण थी। उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के लंबे समय तक इस जगह की देखभाल की।

निषाद के निधन की खबर फैलते ही इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। उनके साथ काम करने वाले दोस्तों और स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्होंने हमेशा सार्वजनिक स्थानों को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किया। उनके जाने से घाट की देखभाल करने वाले समूह को बड़ा नुकसान हुआ है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि निषाद न केवल सफाई अभियान में हिस्सा लेते थे, बल्कि लोगों को नदी और पर्यावरण के प्रति जागरूक भी करते थे। उनका प्रयास था कि पेरियार नदी का किनारा स्वच्छ और सुंदर बना रहे, ताकि यहां आने वाले लोगों को बेहतर माहौल मिल सके।

घटना के बाद सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी घाटों पर सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए, खासकर उन स्थानों पर जहां बड़ी संख्या में लोग स्नान और घूमने के लिए आते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है और तेज बहाव के कारण नदी किनारे फिसलने जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे स्थानों पर लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

पुलिस ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। वहीं, निषाद के परिवार और दोस्तों के लिए यह घटना गहरा सदमा है।

निषाद कोट्टाकुडी भले ही अब लोगों के बीच नहीं हैं, लेकिन पेरियार नदी और चोवरा घाट की सफाई व संरक्षण के लिए उनका योगदान स्थानीय लोगों के बीच हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने अपने छोटे-छोटे प्रयासों से सार्वजनिक स्थानों की जिम्मेदारी निभाने की मिसाल पेश की थी।

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