Kerala केरल: भरतपुझा नदी पर चेरुथुरुथी को शोरानूर से जोड़ने वाले डैम क्षेत्र में रेत खनन की गतिविधियां तेजी से बढ़ने की खबर सामने आई है। नदी में पानी भरा होने के बावजूद, कथित तौर पर किनारों और डैम क्षेत्र से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गतिविधि पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, सेंट्रल माइनिंग डिपार्टमेंट की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि भरतपुझा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अर्थमूविंग मशीन या भारी वाहन का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसके बावजूद, नियमों की अनदेखी कर रेत खनन जारी रहने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि बड़ी मशीनों के जरिए डैम क्षेत्र में जमा रेत को लगातार निकाला जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि डैम के अंदर और आसपास की रेत को निकालकर पास के खेतों में बड़े पैमाने पर डंप किया जा रहा है। वहां हज़ारों लोड रेत पहाड़ जैसी ऊंचाई में जमा हो चुकी है। इसके बाद इन रेत के ढेरों को लोड कर लॉरियों के माध्यम से अन्य स्थानों पर भेजा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, यह रेत तमिलनाडु और अन्य राज्यों तक भी पहुंचाई जा रही है।
नदी के किनारे दो अर्थमूविंग मशीनों के जरिए लगातार रेत निकालने का काम चल रहा है। इन मशीनों की मदद से रेत को लॉरियों में लोड कर पास के खेतों में एकत्र किया जा रहा है, जहां से बड़े स्तर पर इसका परिवहन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया पर निगरानी बेहद कमजोर है और अधिकारी मौके पर जांच करने नहीं पहुंच रहे हैं।
पर्यावरण से जुड़े संगठन ‘फ्रेंड्स ऑफ भरतपुझा’ के जनरल सेक्रेटरी विनोद नांबियार ने इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि रेत खनन का तरीका नियमों के खिलाफ है और केंद्र सरकार की ओर से ऐसी किसी गतिविधि को अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि लगातार और अनियंत्रित रेत निकासी से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
स्थानीय स्तर पर अब मांग उठ रही है कि इस पूरे मामले की जांच की जाए और अवैध रेत खनन पर तुरंत रोक लगाई जाए, ताकि भरतपुझा नदी को और अधिक नुकसान से बचाया जा सके।