मलप्पुरम: इस साल केरल में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में भारी कमी देखी गई है। 1 जून से 30 सितंबर तक चले चार महीने के मॉनसून सीज़न के दौरान राज्य में सामान्य से 28 प्रतिशत कम बारिश हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों से पता चलता है कि 1901 के बाद से पिछले 125 सालों में यह सातवां ऐसा साल है जब राज्य में सबसे कम बारिश हुई है।
इस दौरान केरल में 2,018.6 मिमी बारिश होने का अनुमान था, लेकिन केवल 1,446.5 मिमी बारिश हुई। बारिश की कमी से वायनाड और इडुक्की सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए। वायनाड में उम्मीद से आधी से भी कम बारिश हुई, जहाँ 53 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इडुक्की में 47 प्रतिशत, कोल्लम में 38 प्रतिशत, अलाप्पुझा में 32 प्रतिशत और पलक्कड़ व त्रिशूर में 30-30 प्रतिशत की कमी रही। वहीं, कन्नूर, कासरगोड, कोट्टायम, कोझिकोड, पथानामथिट्टा और तिरुवनंतपुरम में सामान्य सीमा के भीतर बारिश हुई।
उम्मीदें पूर्वोत्तर मॉनसून पर टिकी हैं। मौसम विभाग को उम्मीद है कि पूर्वोत्तर मॉनसून, जिसे स्थानीय रूप से 'थुलावरशम' कहा जाता है, सामान्य रहेगा। आने वाले महीनों में पानी की संभावित कमी को रोकने के लिए इस सीज़न में अच्छी बारिश होना बहुत ज़रूरी होगा। हालाँकि कल तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, एर्नाकुलम, पलक्कड़, मलप्पुरम और वायनाड के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन दिन के समय बारिश नहीं हुई। 4 अक्टूबर को पथानामथिट्टा, इडुक्की, कोट्टायम और एर्नाकुलम के लिए और 5 अक्टूबर को पथानामथिट्टा, इडुक्की और मलप्पुरम के लिए पीला अलर्ट जारी किया गया है। वर्षा की कमी वाले वर्ष.......वर्षा (मिमी)
1918......1,104.3
1976......1,296.4
1987......1,324.5
2023......1,326.6
2016......1,352.3
2002......1,361.7
2026......1,446.5
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