त्रिशूर ; खेल मैदान पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले युवा एथलीट जे. बिजॉय अब रेलवे में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। स्कूल के दिनों से ही सिंथेटिक ट्रैक पर अपनी शानदार प्रदर्शन से पहचान बनाने वाले बिजॉय को भारतीय रेलवे में नौकरी मिली है। सेंट थॉमस कॉलेज, त्रिशूर में बीए अंग्रेजी और इतिहास के तृतीय वर्ष के छात्र बिजॉय सोमवार को पलक्कड़ डिवीजन के अंतर्गत ओलावकोट कार्यालय में अपनी नई नौकरी ज्वाइन करेंगे।
बिजॉय को रेलवे के विद्युत विभाग में जूनियर क्लर्क टाइपिस्ट के पद पर नियुक्त किया गया है। खेल उपलब्धियों और लगातार मेहनत के दम पर हासिल हुई इस सफलता से उनके परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
बिजॉय कन्नीमारी, कम्पालाथारा, वेलूर के रहने वाले जयशंकर और रीना के बेटे हैं। बचपन से ही खेलों में रुचि रखने वाले बिजॉय ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर एथलेटिक्स की दुनिया में अलग पहचान बनाई।
उन्होंने चित्तूर जीएचएसएस में पढ़ाई के दौरान राज्य स्कूल खेल समारोह में हिस्सा लेकर अपने खेल करियर की शुरुआत की। इसी दौरान उन्होंने एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता और खेल जगत में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
बिजॉय ने प्रसिद्ध प्रशिक्षक एम. अरविंदाक्षन के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया। उनके प्रशिक्षण और अपनी मेहनत के बल पर बिजॉय ने लगातार सफलता हासिल की। राज्य स्कूल खेल समारोह में उन्होंने 800 मीटर दौड़ में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मीट रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
यह उपलब्धि उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। नेशनल स्कूल फेस्टिवल और नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप में बिजॉय ने कई पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की।
कॉलेज स्तर पर भी बिजॉय का शानदार प्रदर्शन जारी रहा। उन्होंने वर्ष 2024 में ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके अलावा वर्ष 2025 में यूनिवर्सिटी स्तर की प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ा।
बिजॉय ने जूनियर नेशनल प्रतियोगिताओं और खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया और पदक जीतकर अपने खेल कौशल का प्रदर्शन किया। उनकी इन उपलब्धियों ने उन्हें न केवल पहचान दिलाई, बल्कि सरकारी नौकरी हासिल करने में भी मदद की।
रेलवे में चयन को लेकर बिजॉय ने खुशी जताई है। उनका कहना है कि खेल ने उन्हें अनुशासन, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण सिखाया है। उनका मानना है कि खेल के साथ पढ़ाई और करियर पर ध्यान देना भी जरूरी है।
परिवार के लिए भी यह उपलब्धि गर्व का क्षण है। माता-पिता का कहना है कि बिजॉय ने कठिन मेहनत और निरंतर अभ्यास से यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बेटा भविष्य में भी इसी तरह सफलता हासिल करता रहेगा।
स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों ने भी बिजॉय की सफलता पर खुशी जताई है। उनका कहना है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से निकलकर युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। बिजॉय की कहानी ऐसे युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेल और करियर दोनों में सफलता हासिल करना चाहते हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि बिजॉय जैसे खिलाड़ी यह साबित करते हैं कि एथलेटिक्स जैसे खेलों में भी बेहतर प्रदर्शन के जरिए शानदार करियर बनाया जा सकता है। सरकारी संस्थानों में खेल प्रतिभाओं को मिलने वाले अवसर युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
बिजॉय ने अभी तक अपने खेल सफर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन उनका कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। वह रेलवे की नौकरी के साथ-साथ अपने खेल से भी जुड़े रहना चाहते हैं और भविष्य में भी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की इच्छा रखते हैं।
एक समय सिंथेटिक ट्रैक पर अपनी तेज रफ्तार से पहचान बनाने वाले बिजॉय अब रेलवे की जिम्मेदारियों के साथ नया सफर शुरू करेंगे। उनकी मेहनत, अनुशासन और खेल उपलब्धियों ने उन्हें यह अवसर दिलाया है। उनकी सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है