छह साल बाद भी बंद पड़ा करिम्बा का रेस्ट हाउस, यात्रियों को नहीं मिल रही बुनियादी सुविधाएं

Update: 2026-07-25 12:31 GMT

करिम्बा: करिम्बा ग्राम पंचायत में सड़क किनारे बनाया गया रेस्ट हाउस छह साल बाद भी लोगों के उपयोग के लिए शुरू नहीं हो पाया है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों और आम लोगों को राहत देने के उद्देश्य से बनाया गया यह केंद्र अब तक बंद पड़ा है। इसके चलते यात्रियों को रास्ते में ठहरने, शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

यह स्थिति उस रेस्ट हाउस की है, जिसका उद्घाटन छह साल पहले कल्लाडिकोड टीबी सेंटर में किया गया था। ब्लॉक पंचायत फंड से करीब 10 लाख रुपये की लागत से तैयार की गई इस ‘टेक ए ब्रेक’ बिल्डिंग का उद्देश्य सड़क यात्रियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन निर्माण के वर्षों बाद भी इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है।

सुविधाओं के बावजूद नहीं हो पाया संचालन

रेस्ट हाउस में यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यहां पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग बाथरूम, टॉयलेट और क्लॉकरूम बनाए गए हैं। सड़क से गुजरने वाले यात्रियों के लिए यह केंद्र काफी उपयोगी साबित हो सकता था।

हालांकि, शुरुआत से ही यह भवन पूरी तरह तैयार होकर उपयोग में नहीं आ सका। निर्माण के बाद बिजली कनेक्शन और पानी की सुविधा उपलब्ध कराने में काफी समय लग गया। कई वर्षों तक आवश्यक सुविधाओं के इंतजार के कारण भवन बंद ही पड़ा रहा।

अब जब पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, तब भी रेस्ट सेंटर का संचालन शुरू नहीं हो पाया है।

संचालन के लिए नहीं मिल रहा संचालक

रेस्ट हाउस के संचालन में सबसे बड़ी समस्या इसे चलाने के लिए उचित व्यक्ति या संस्था का नहीं मिल पाना बताया जा रहा है। पंचायत और संबंधित अधिकारियों की ओर से इसे संचालित करने वाले व्यक्ति की तलाश की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं बन पाई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते संचालन की जिम्मेदारी किसी व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह या संस्था को दी जाती तो यह सुविधा वर्षों पहले शुरू हो सकती थी।

यात्रियों को हो रही परेशानी

करिम्बा क्षेत्र से होकर गुजरने वाले लंबी दूरी के यात्रियों को इस बंद पड़े रेस्ट हाउस का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। खासकर परिवार के साथ यात्रा करने वाले लोगों और महिलाओं को रास्ते में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ती है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क किनारे इस तरह की सुविधा केंद्रों की काफी जरूरत होती है। यदि यह रेस्ट हाउस शुरू हो जाए तो यात्रियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।

लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी उपयोग नहीं

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब इस भवन के निर्माण पर 10 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, तो इतने वर्षों तक इसका इस्तेमाल क्यों नहीं हो पाया। लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब तैयार सुविधाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचे।

उन्होंने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द रेस्ट हाउस के संचालन की व्यवस्था करे, ताकि भवन का सही उपयोग हो सके और यात्रियों को राहत मिल सके।

पंचायत के सामने बड़ी चुनौती

रेस्ट हाउस को शुरू करना अब करिम्बा ग्राम पंचायत के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है। भवन तैयार है, आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन संचालन व्यवस्था के अभाव में पूरी परियोजना अधूरी बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक सुविधा के निर्माण के साथ उसके रखरखाव और संचालन की योजना भी पहले से तैयार होनी चाहिए। केवल भवन बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसका नियमित उपयोग और देखरेख भी जरूरी होती है।

जल्द समाधान की उम्मीद

स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि पंचायत और प्रशासन इस मामले में जल्द कदम उठाएंगे। यदि संचालन के लिए उचित व्यवस्था की जाती है तो यह रेस्ट हाउस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा केंद्र बन सकता है।

छह साल से बंद पड़े इस ‘टेक ए ब्रेक’ भवन को अब लोगों के लिए खोलने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि जिस उद्देश्य से इसे बनाया गया था, वह पूरा हो सके। यात्रियों को राहत देने वाली यह सुविधा लंबे इंतजार के बाद अब शुरू होने की उम्मीद जगा रही है।

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