कोझिकोड ; इस्लामिक विद्वान कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार अपने हालिया बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। मुस्लिम महिलाओं के सार्वजनिक रूप से सामने आने को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर कई लोगों ने आपत्ति जताई थी। अब उन्होंने कहा है कि विरोध के बावजूद शरिया के प्रचार का काम जारी रहेगा।

कांथापुरम ने कहा कि वह अपने विचारों और धार्मिक शिक्षाओं को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि शरिया से जुड़े मुद्दों को लोगों तक पहुंचाने का कार्य आगे भी जारी रहेगा।

महिलाओं को लेकर बयान पर हुआ विवाद

कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने इससे पहले मुस्लिम महिलाओं के सार्वजनिक मंचों पर आने को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से "भारी विनाश" हो सकता है।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रिया सामने आई थी। कई लोगों ने उनके विचारों को पुरानी सोच बताया और महिलाओं की स्वतंत्र भागीदारी का समर्थन किया।

मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने भी जताई आपत्ति

कांथापुरम के बयान पर प्रतिक्रिया देने वालों में केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन भी शामिल रहे। उन्होंने इस तरह की सोच को 19वीं सदी की विचारधारा बताया था।

सतीसन ने कहा था कि समाज में महिलाओं की भूमिका और अधिकारों को लेकर सोच में बदलाव आया है और पुराने विचारों को आगे बढ़ाना उचित नहीं है।

कांथापुरम ने अपने रुख पर कायम रहने की बात कही

विवाद के बाद कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने कहा कि वह अपने धार्मिक विचारों को लेकर स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा कि विरोध होने के बावजूद शरिया का प्रचार और धार्मिक शिक्षा का काम जारी रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक मामलों को लेकर उनकी सोच लंबे समय से चली आ रही मान्यताओं पर आधारित है।

बयान पर जारी है बहस

कांथापुरम के बयान के बाद केरल में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। एक तरफ उनके समर्थकों का कहना है कि धार्मिक नेताओं को अपने विचार रखने का अधिकार है, वहीं आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान महिलाओं की भूमिका और अधिकारों को सीमित करने वाले हैं।

सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने भी इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।

महिलाओं की भागीदारी पर चर्चा

देश में पिछले कुछ वर्षों से महिलाओं की सार्वजनिक, राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।

शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व के क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को कई लोग समाज के विकास से जोड़ते हैं। ऐसे में महिलाओं की सार्वजनिक भूमिका को लेकर दिए गए बयान अक्सर बहस का कारण बनते हैं।

धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बहस

कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार का बयान धार्मिक परंपराओं और आधुनिक सामाजिक सोच के बीच चल रही बहस को फिर सामने ले आया है।

जहां कुछ लोग धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को महत्व देते हैं, वहीं कुछ लोग समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दृष्टिकोण से ऐसे मुद्दों को देखते हैं।

आगे भी जारी रह सकती है राजनीतिक प्रतिक्रिया

कांथापुरम के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है। विपक्षी और सामाजिक संगठनों की ओर से इस मुद्दे पर और बयान सामने आ सकते हैं।

फिलहाल कांथापुरम ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने धार्मिक विचारों और शरिया के प्रचार को लेकर अपने रुख पर कायम हैं।

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