कोल्लम, केरल : जिले में बढ़ती डूबने की घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों से जलाशयों और जल स्रोतों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि जिले के अधिकांश जलाशय खतरनाक श्रेणी में आते हैं और यहां थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
25 जुलाई को मनाए जाने वाले ‘इंटरनेशनल ड्राउनिंग प्रिवेंशन डे’ (पानी में डूबने से बचाव का अंतर्राष्ट्रीय दिवस) के अवसर पर आपदा प्रबंधन विभाग लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए विशेष अभियान चलाएगा। इस अभियान का संदेश “बदलाव के लिए एकजुट हों” (Let's unite for change) रखा गया है। इसके माध्यम से लोगों को सुरक्षित व्यवहार अपनाने और डूबने की घटनाओं को रोकने के उपायों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
कलेक्टर एनी जुला थॉमस ने बताया कि जिले में कई ऐसे जल स्रोत हैं जहां पहले भी डूबने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नदी, झील, नहर, समुद्र तट और अन्य जलाशयों में जाते समय सावधानी बरतें और सुरक्षा नियमों का पालन करें।
कई जल स्रोत बने हादसों का कारण
कलेक्टर ने बताया कि कल्लाडा सिंचाई परियोजना की नहरों, कल्लाडा यार, पल्लीकलार और इथिक्कारा यार नदियों में डूबने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसके अलावा सस्थमकोट्टा झील, अष्टमुडी-परावूर बैकवाटर्स, टी.एस. नहर और जिले के कई अन्य जल क्षेत्रों में भी हादसे हुए हैं।
उन्होंने बताया कि कोल्लम, थन्नी, अज़िक्कल और पोझिक्कारा जैसे समुद्री तटों पर भी डूबने की घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा बंद पड़ी खदानों में बने गहरे तालाब भी लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
प्रशासन का कहना है कि कई बार लोग इन स्थानों की गहराई और पानी के नीचे मौजूद खतरों को समझ नहीं पाते, जिसके कारण दुर्घटनाएं हो जाती हैं। खासकर बारिश के मौसम में नदियों और जलाशयों में पानी का बहाव तेज हो जाता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
जागरूकता अभियान से लोगों को किया जाएगा सतर्क
इंटरनेशनल ड्राउनिंग प्रिवेंशन डे के मौके पर आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में लोगों को डूबने से बचाव के उपाय, सुरक्षित तैराकी, बच्चों की निगरानी और आपात स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
प्रशासन का उद्देश्य केवल हादसों के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि पहले से लोगों को जागरूक कर दुर्घटनाओं को रोकना है। इसके लिए स्कूलों, स्थानीय संस्थाओं और समुदायों की भागीदारी भी सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है।
अधिकारियों का कहना है कि डूबने की घटनाएं अक्सर थोड़ी सी सावधानी से रोकी जा सकती हैं। लोगों को बिना सुरक्षा व्यवस्था के गहरे पानी में जाने से बचना चाहिए और बच्चों को जल स्रोतों के पास अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
केरल में डूबने की घटनाएं चिंता का विषय
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, केरल में डूबने से होने वाली मौतों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 में राज्य में 1344 लोगों की डूबने से मौत हुई थी, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 1385 हो गई।
इन आंकड़ों को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, सुरक्षा उपायों का पालन और स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाकर इन घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
समुद्र तटों और जलाशयों पर विशेष सतर्कता
कोल्लम जिले में बड़ी संख्या में लोग समुद्र तटों, नदियों और झीलों पर समय बिताने पहुंचते हैं। पर्यटन और स्थानीय गतिविधियों के कारण इन स्थानों पर भीड़ बढ़ जाती है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे प्रतिबंधित या खतरनाक घोषित क्षेत्रों में प्रवेश न करें। समुद्र में तेज लहरों या खराब मौसम के दौरान तैराकी से बचने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई दुर्घटनाएं उस समय होती हैं जब लोग पानी की गहराई, बहाव या मौसम की स्थिति का सही अनुमान नहीं लगा पाते। ऐसे में स्थानीय चेतावनियों और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।
सामूहिक प्रयास से ही संभव है रोकथाम
कलेक्टर एनी जुला थॉमस ने कहा कि डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को जल सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार रवैया अपनाना चाहिए।
आपदा प्रबंधन विभाग का अभियान इसी सोच के साथ शुरू किया जा रहा है कि समाज के सभी वर्ग मिलकर डूबने की घटनाओं को कम करने में योगदान दें।
कोल्लम प्रशासन की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब मानसून के दौरान जल स्रोतों में खतरे बढ़ जाते हैं। जागरूकता, सतर्कता और समय पर सावधानी बरतने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित रहें और दूसरों को भी जल सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।