KOCHI कोच्चि: हाई कोर्ट ने साफ़ किया है कि गलत जगहों पर जाने वाले क्लाइंट्स को प्रॉस्टिट्यूशन से जुड़ी धाराओं के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जस्टिस सी. प्रदीप कुमार ने यह बात कोट्टायम के रहने वाले पी.वी. विष्णु के खिलाफ मामले में आगे की कार्रवाई रद्द करने के आदेश में कही, जिन्हें कडवंथरा प्रॉस्टिट्यूशन केस में चौथा आरोपी बनाया गया था।
कोर्ट ने कहा कि पिटीशनर वह नहीं था जो महिलाओं को प्रॉस्टिट्यूशन सेंटर में लाया था, और इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उसने उन्हें गलत काम करने के लिए उकसाया था। कडवंथरा पुलिस ने इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। सेक्शन 7, जो पब्लिक जगहों के 200 मीटर के अंदर गलत कामों पर रोक लगाता है, वह भी इस मामले में लागू नहीं होता। प्रॉसिक्यूशन ने दलील दी कि घटना की जगह से 50 मीटर दूर कुरिशुपल्ली चर्च है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी जगहें जहां धार्मिक रस्में नहीं होतीं, उन्हें पूजा की पब्लिक जगह नहीं माना जा सकता। पिछले साल एर्नाकुलम के गांधी नगर में एक किराए के घर में पुलिस रेड में प्रॉस्टिट्यूशन रैकेट का भंडाफोड़ हुआ था।
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