कोच्चि: केरल हाई कोर्ट ने प्लानिंग बोर्ड में सीनियर पदों के लिए हुई परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) पर लगे आरोपों को गंभीर बताया है। कोर्ट ने PSC से पूछा कि क्या 58 नंबर के जवाबों को बिना जांचे छोड़ देना पहली नज़र में भ्रष्टाचार नहीं है। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि क्या देश में PSC द्वारा किए गए कथित अपराध की जांच के लिए कोई कानूनी तरीका नहीं होना चाहिए और पूछा कि जांच रोकने की कमीशन की अपील को कैसे माना जा सकता है।
कोर्ट ने जांच में सहयोग न करने के लिए PSC की आलोचना की। कोर्ट ने पूछा, "PSC जांच में सहयोग क्यों नहीं कर रहा है?" कोर्ट ने PSC को जांच टीम को तथ्यों के बारे में बताने का निर्देश भी दिया। सरकार से कहा गया कि वह एक हफ़्ते के अंदर PSC की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करे। क्राइम ब्रांच को प्लानिंग बोर्ड परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में PSC के दो अधिकारियों की तरफ़ से गंभीर चूक का पता चला था। डिप्टी सेक्रेटरी पी. सतीश और एडिशनल सेक्रेटरी आर. हरि से ये चूक हुई थी।
सतीश डेढ़ साल पहले रिटायर हो चुके हैं। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें मूल्यांकन (evaluation) के लिए ज़िम्मेदार इन दो अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है। जांच टीम को यह भी पता चला कि PSC चेयरमैन को मूल्यांकन प्रक्रिया में गलतियों के बारे में पता होने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की और मामले में आरोपी अधिकारियों का बचाव किया। टीम इस बात की जांच कर रही है कि अधिकारियों की चूक महज़ गलतियां थीं या उन्होंने जानबूझकर गड़बड़ी में मदद की। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों की लापरवाही के कारण प्लानिंग बोर्ड के पदों के लिए आयोजित परीक्षा में 58 नंबर के जवाब बिना जांचे छोड़ दिए गए थे।
Tags: