कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने यौन उत्पीड़न से बची 16 वर्षीय लड़की की 27 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दे दी है। यह आदेश लड़की की मां द्वारा दायर एक याचिका पर पारित किया गया था, जिसने अपनी बेटी को हुए मनोवैज्ञानिक आघात का हवाला दिया था और गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति मांगी थी।
न्यायमूर्ति हरिशंकर ने आदेश जारी कर राज्य सरकार को प्रक्रिया के लिए आवश्यक व्यवस्था करने का निर्देश दिया। अदालत के निर्देशों के अनुसार गठित एक मेडिकल बोर्ड ने 14 अक्टूबर को प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में गर्भपात की सिफारिश की थी। अदालत ने लड़की और उसकी मां के इस रुख को भी स्वीकार कर लिया कि वे गर्भावस्था को जारी नहीं रखना चाहते हैं। इसने अधिकारियों को आगे बढ़ने से पहले दोनों से लिखित सहमति प्राप्त करने का निर्देश दिया। अदालत ने सरकार को बिना किसी देरी के आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने का निर्देश दिया। इसने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि गर्भपात प्रक्रिया के दौरान बच्चा जीवित पैदा होता है, तो अधिकारियों को आवश्यक नवजात देखभाल और चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करना होगा।