केपेक्स और काजू विकास निगम के 854 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, वितरण शुरू
कोल्लम। केरल में केपेक्स (CAPEX) और केरल राज्य काजू विकास निगम की फैक्ट्रियों से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। दोनों संस्थानों के 854 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। केपेक्स की पेरमपुझा फैक्ट्री में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री शिबू बेबी जॉन ने ग्रेच्युटी वितरण अभियान का उद्घाटन किया।
सरकार की इस पहल से लंबे समय से सेवानिवृत्ति लाभ का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। ग्रेच्युटी उन कर्मचारियों को दी जा रही है, जो निर्धारित वर्षों के दौरान केपेक्स और केरल राज्य काजू विकास निगम की फैक्ट्रियों से सेवानिवृत्त हुए थे।
854 कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
जानकारी के अनुसार, ग्रेच्युटी का लाभ केपेक्स की फैक्ट्रियों से 2021 और 2022 में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को दिया जा रहा है। वहीं, केरल राज्य काजू विकास निगम की फैक्ट्रियों से 2023 और 2024 में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को भी इस योजना के तहत भुगतान किया जा रहा है।
काजू उद्योग से जुड़े इन कर्मचारियों ने लंबे समय तक संस्थानों में सेवाएं दी हैं। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का साधन होती है। ऐसे में वितरण प्रक्रिया शुरू होने से कर्मचारियों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
मंत्री ने किया वितरण कार्यक्रम का उद्घाटन
केपेक्स पेरमपुझा फैक्ट्री में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री शिबू बेबी जॉन ने ग्रेच्युटी वितरण की शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने काजू उद्योग से जुड़े कर्मचारियों की सेवाओं और क्षेत्र के महत्व पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि काजू क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। लंबे समय तक उद्योग को अपनी सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ समय पर उपलब्ध कराना आवश्यक है। ग्रेच्युटी वितरण की प्रक्रिया शुरू होने से बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
काजू से बने उत्पादों की मार्केटिंग भी शुरू
कार्यक्रम के दौरान मंत्री शिबू बेबी जॉन ने काजू उद्योग से जुड़े वैल्यू-एडेड उत्पादों की मार्केटिंग की भी शुरुआत की। इनमें काजू के फल यानी काजू सेब से तैयार सोडा और काजू से बने पांच अलग-अलग फ्लेवर वाले उत्पाद शामिल हैं।
काजू की खेती और प्रसंस्करण से जुड़े क्षेत्र में केवल काजू की गिरी को बाजार में बेचने के बजाय उससे अलग-अलग मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे काजू के फल के उपयोग को बढ़ाने के साथ-साथ उद्योग के लिए आय के नए स्रोत विकसित करने की संभावना है।
काजू सेब आमतौर पर काजू की गिरी निकालने के बाद बचने वाला हिस्सा माना जाता है। इससे पेय पदार्थ सहित विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। ऐसे उत्पादों की मार्केटिंग शुरू होने से काजू उद्योग में उप-उत्पादों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है।
काजू उद्योग को नई दिशा देने पर जोर
केरल का काजू उद्योग बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाले प्रमुख पारंपरिक क्षेत्रों में शामिल रहा है। विशेष रूप से फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारियों की बड़ी संख्या इस उद्योग पर निर्भर रही है।
समय के साथ उत्पादन लागत, बाजार की प्रतिस्पर्धा और कच्चे माल की उपलब्धता जैसी चुनौतियों के कारण काजू उद्योग के सामने कई समस्याएं भी आई हैं। ऐसे में मूल्यवर्धित उत्पादों की ओर बढ़ना उद्योग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
काजू से बने अलग-अलग फ्लेवर वाले उत्पादों और काजू सेब से तैयार सोडा की मार्केटिंग शुरू होने से उपभोक्ताओं के सामने नए विकल्प उपलब्ध होंगे। साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन और प्रसंस्करण गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कई जनप्रतिनिधि और श्रमिक संगठनों के नेता रहे मौजूद
कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने की। इस अवसर पर मंत्री पी.सी. विष्णुनाथ, सांसद कोडिकुन्निल सुरेश, जिला पंचायत सदस्य विनीताकुमारी, पंचायत अध्यक्ष सिंधु गोपन, ब्लॉक पंचायत सदस्य राजेश्वरी अम्मा और वार्ड सदस्य मिनी मौजूद रहीं।
इसके अलावा विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यूटीयूसी (UTUC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए.ए. अजीज, इंटक (INTUC) के राज्य सचिव एडवोकेट सुरनाद श्रीकुमार, सीटू (CITU) के जिला अध्यक्ष तुलसीधरा कुरुप और एआईटीयूसी (AITUC) के जिला सचिव जी. बाबू ने भी सभा को संबोधित किया।
केपेक्स के प्रबंध निदेशक ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और संस्थान से संबंधित विषयों पर अपनी बात रखी।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर्थिक संबल
ग्रेच्युटी वितरण की शुरुआत को सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वर्षों तक काजू फैक्ट्रियों में सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के लिए यह राशि उनके पारिवारिक खर्च, स्वास्थ्य जरूरतों और अन्य आर्थिक आवश्यकताओं में सहायक हो सकती है।
सरकार की ओर से ग्रेच्युटी भुगतान के साथ-साथ काजू उद्योग के उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने की कोशिश भी की जा रही है। इससे एक ओर कर्मचारियों के लंबित लाभों का निपटारा होगा, वहीं दूसरी ओर काजू उद्योग को नए उत्पादों के जरिए बाजार में विस्तार देने की दिशा में काम किया जाएगा।
इस तरह पेरमपुझा में आयोजित कार्यक्रम को सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हित और काजू उद्योग के विकास—दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। आगामी दिनों में मूल्यवर्धित काजू उत्पादों की मार्केटिंग और ग्रेच्युटी वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ इसका लाभ और अधिक लोगों तक पहुंचने की उम्मीद है।