तिरुवनंतपुरम: राज्य सरकार अनधिकृत स्पा में होने वाले यौन शोषण और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए एक सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है। आरोप है कि ये स्पा अब अनैतिक गतिविधियों के हाई-टेक केंद्रों में बदल गए हैं। प्रस्तावित कानून में स्पा को लाइसेंस देने, महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और यौन शोषण को रोकने के लिए नियम तय किए जाएंगे। बताया जाता है कि ऐसी कई जगहें स्थानीय निकायों से 'वेलनेस सेंटर' के नाम पर लाइसेंस लेती हैं, लेकिन बाद में वहां मसाज पार्लर और स्पा चलाए जाते हैं।
इनका काम करने का तरीका कुछ ऐसा है कि ये दूसरे राज्यों से महिलाओं को लाते हैं और उनका शोषण करते हैं। कुछ जगहों पर ग्राहकों को 'हनी-ट्रैप' (जाल में फंसाना) करके उनसे पैसे ऐंठने का भी आरोप है। 11 अक्टूबर को 'केरल कौमुदी' ने रिपोर्ट दी थी कि राज्य में लगभग 3,000 अनधिकृत स्पा चल रहे हैं। इस रिपोर्ट के बाद, स्पा में शोषण के और भी मामले सामने आए। गृह विभाग ने ऐसी जगहों पर कार्रवाई करने के लिए 'ऑपरेशन स्पा' नाम से एक पुलिस अभियान शुरू करने की घोषणा की है। यह अभियान ADGP (कानून-व्यवस्था) पी. विजयन के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। अनधिकृत स्पा और शोषण में शामिल जगहों को बंद कर दिया जाएगा, और उनके मालिकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे।
पी. विजयन ने 'केरल कौमुदी' को बताया कि सरकार उन स्पा मालिकों के खिलाफ 'गुंडा एक्ट' लगाने पर भी विचार कर रही है जो बार-बार आपराधिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। स्पा और मसाज सेंटरों में केवल वही थेरेपिस्ट काम कर सकेंगे, जिन्होंने आयुष विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त कोर्स पूरा किया हो। मसाज सेंटरों में अपनाए जाने वाले उपचार के तरीके आयुर्वेद पर आधारित होने चाहिए। कर्मचारियों को अपना हेल्थ सर्टिफिकेट भी देना होगा, जिससे यह पुष्टि हो सके कि उन्हें कोई संक्रामक बीमारी नहीं है। सभी कर्मचारियों के लिए पहचान पत्र और उपस्थिति रजिस्टर रखना अनिवार्य होगा। 'क्रॉस-मसाजिंग' (यानी पुरुष थेरेपिस्ट द्वारा महिलाओं की, और महिला थेरेपिस्ट द्वारा पुरुषों की मसाज करना) की अनुमति नहीं होगी।
नियमों की अक्सर अनदेखी: अभी ये स्पा स्थानीय निकायों से 'शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट' (दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम) के तहत पंजीकरण कराकर चलते हैं। इसके अलावा, इन्हें स्थानीय निकाय का लाइसेंस, पुलिस क्लीयरेंस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी और फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज विभाग से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) लेना जरूरी होता है। जो जगहें खाना या सॉफ्ट ड्रिंक परोसती हैं, उन्हें 'फूड सेफ्टी लाइसेंस' भी लेना पड़ता है। लाइसेंस के आवेदनों में थेरेपिस्ट के योग्यता प्रमाण-पत्र और पुलिस वेरिफिकेशन रिकॉर्ड शामिल होने चाहिए। अन्य शर्तों में थेरेपी रूम के लिए पारदर्शी कांच के दरवाजे, रिसेप्शन और कॉरिडोर में सीसीटीवी कैमरे, ग्राहकों का रजिस्टर और डॉक्टरों के प्रमाण-पत्र शामिल हैं। हालांकि, बताया जाता है कि ज्यादातर संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करते हैं। शोषण रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदम: प्रस्तावित नियमों में यौन शोषण को रोकने और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई सुरक्षा उपाय शामिल होंगे: 1. स्पा मालिकों को अपने कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए महिलाओं की तस्वीरों वाले विज्ञापनों पर रोक होगी। 2. नजदीकी पुलिस स्टेशन और महिला हेल्पलाइन की जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित की जानी चाहिए। पुलिस समय-समय पर अचानक निरीक्षण (सरप्राइज इंस्पेक्शन) भी करेगी। 3. सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्थानों पर 'क्रॉस-मसाजिंग' (विपरीत लिंग के व्यक्ति द्वारा मालिश) को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों पर रोक होगी। थेरेपी रूम के अंदर छिपे हुए कैमरे (हिडन कैमरे) लगाने की अनुमति नहीं होगी। 4. आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को काम पर नहीं रखा जा सकता। यदि संस्थान नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा, "स्पा में यौन शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम ऐसे कानून पर विचार कर रहे हैं जो कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।" एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) पी. विजयन ने कहा, "इन स्पा में होने वाली गतिविधियां केरल और आयुर्वेद की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रही हैं। अपने संस्थानों में होने वाली सभी अवैध गतिविधियों के लिए मालिक पूरी तरह जिम्मेदार होंगे।"