केरल में NEP पर CPI का विरोध, सरकार से नई दिशा तय करने का आह्वान

Update: 2025-10-24 17:01 GMT
Keral केरल: शिक्षा मंत्री V. Sivankutty के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए CPI के राज्य सचिव Binoy Viswam ने कहा कि केरल सरकार को NEP (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) का अंधानुकरण नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि केवल केरल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए एक नई शिक्षा दिशा तय की जानी चाहिए। Binoy Viswam ने कहा, "लोकतांत्रिक और वामपंथी ताकतें, साथ ही छात्रों और शिक्षकों के आंदोलनों की नजर केरल पर है। वे इसे वैकल्पिक विकास का एक उदाहरण मानते हैं। इस दृष्टि से केरल में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार पर बड़ी जिम्मेदारी है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि शिक्षा नीति को लागू करने में केवल केंद्रीय निर्देशों का पालन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थानीय जरूरतों और विकास के अनुरूप कदम उठाने होंगे। 

CPI नेता ने कहा कि NEP में कई पहलें शिक्षा के निजीकरण और बाज़ार आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देती हैं, जिससे समान शिक्षा तक पहुंच पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह नीति को लागू करते समय समाज के सभी वर्गों, विशेषकर गरीब और ग्रामीण छात्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखे। Binoy Viswam ने यह भी कहा कि छात्र और शिक्षक संगठनों ने NEP के कई पहलुओं पर पहले ही विरोध जताया है। उन्होंने कहा, "केरल को देश के लिए एक मॉडल स्टेट के रूप में देखा जाता है। अगर केरल सही दिशा में कदम बढ़ाता है, तो यह पूरे भारत में समान शिक्षा और लोकतांत्रिक विकास के लिए मार्गदर्शन करेगा। 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि NEP के संदर्भ में केरल सरकार की भूमिका और CPI का सक्रिय विरोध दोनों ही राज्य और राष्ट्रीय शिक्षा परिदृश्य में महत्वपूर्ण संकेत हैं। यह बहस दर्शाती है कि शिक्षा नीतियों में केवल केंद्र के निर्देश ही नहीं, बल्कि राज्य की स्थानीय आवश्यकताओं और सामाजिक दृष्टिकोणों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। कुल मिलाकर, Binoy Viswam का बयान केरल सरकार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को उजागर करता है। CPI की यह प्रतिक्रिया छात्रों, शिक्षकों और वामपंथी संगठनों के दृष्टिकोण को मजबूत करती है और केरल को देश के लिए शिक्षा और लोकतांत्रिक विकास में मार्गदर्शक बनाने की मांग को रेखांकित करती है।
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