कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने चेरानल्लूर में हुई एक घटना के मामले में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इस घटना में, सड़क किनारे खाने-पीने की दुकान चलाने वाले जयबालकृष्णन की मौत हो गई थी, जब उन्हें न्यायाधीश के 17 वर्षीय बेटे द्वारा चलाई जा रही एक बेंज कार ने टक्कर मार दी थी। न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि न्यायाधीश जांच में सहयोग कर रहे हैं, तो उन्हें गिरफ्तार करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
अदालत ने कहा कि वह जनभावनाओं के दबाव में नहीं आ सकती। साथ ही, अदालत ने जांच टीम को निर्देश दिया कि जब तक इस मामले में कोई अगला आदेश नहीं आता, तब तक न्यायाधीश को गिरफ्तार न किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता एक न्यायिक अधिकारी हैं, इसलिए उनके जांच से भागने की संभावना नहीं है। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल वाहन को पहले ही अपने कब्जे में ले लिया है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199 के तहत, यदि कोई नाबालिग वाहन चलाता है, तो इसकी जिम्मेदारी वाहन के मालिक या अभिभावक की होगी। यह एक ऐसा अपराध है जिसके लिए तीन साल तक की जेल हो सकती है। अदालत ने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में गिरफ्तारी क्यों की जा रही है।
न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागाथ ने स्पष्ट किया कि अदालत इस मामले में जनभावनाओं के दबाव में नहीं आ सकती और उसे केवल कानून के अनुसार ही आगे बढ़ना होगा। अदालत ने अभियोजन पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि न्यायाधीश दुर्घटना के 30 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गए थे और उन्होंने सबूत मिटाने की कोशिश की थी। अदालत ने न्यायाधीश को जांच टीम के सामने पेश होने का निर्देश दिया।
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