थिरुवनंतपुरम : केरल के कोझिकोड जिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी और एटीएम कार्ड तस्करी गिरोह से जुड़े एक मामले में मोहम्मद फजल के. को गिरफ्तार किया है। आरोपी को शनिवार को थामारासेरी स्थित उसके घर से पकड़ा गया। यह मामला जुलाई 2024 में त्रिशूर के एक व्यक्ति के साथ हुई करीब 1.04 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा है। इस घटना में ठगों ने खुद को फेडएक्स कूरियर कंपनी का अधिकारी और साइबर क्राइम पुलिस का कर्मचारी बताकर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया था।
फेडएक्स अधिकारी बनकर किया फोन
मामले की शुरुआत 20 जुलाई 2024 को हुई, जब त्रिशूर के शिकायतकर्ता को एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को मुंबई स्थित फेडएक्स कूरियर कंपनी के मुख्य कार्यालय का अधिकारी बताया। उसने शिकायतकर्ता से कहा कि उसके नाम से मुंबई से रूस भेजे जा रहे एक पार्सल को सीमा शुल्क विभाग ने रोक लिया है। कथित तौर पर पार्सल में प्रतिबंधित दवाएं होने की बात कही गई।इसके बाद ठगों ने मामले को गंभीर बताते हुए शिकायतकर्ता को डराना शुरू कर दिया। फोन करने वाले ने दावा किया कि इस मामले की जांच साइबर क्राइम विभाग कर रहा है। कुछ देर बाद कॉल दूसरे व्यक्ति को सौंप दी गई, जिसने खुद को मुंबई के साइबर क्राइम विभाग का निरीक्षक बताया।इस तरह आरोपियों ने पीड़ित को विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वह किसी कानूनी परेशानी में फंस गया है और उसे जांच में सहयोग करना होगा।
बैंक खाते के सत्यापन के नाम पर ऐंठे रुपये
ठगों ने शिकायतकर्ता से कहा कि मामले को स्पष्ट करने के लिए उसके बैंक खाते का सत्यापन आवश्यक है। आरोप है कि बैंक खाते के सत्यापन और कथित जांच पूरी होने का भरोसा देकर पीड़ित को अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजने के लिए मजबूर किया गया।शिकायतकर्ता ने 22 जुलाई से 24 जुलाई 2024 के बीच तीन बैंक खातों में कुल 1,04,40,111 रुपये ट्रांसफर कर दिए। इस तरह उसके साथ 1 करोड़ 4 लाख 40 हजार 111 रुपये की धोखाधड़ी हुई। बाद में जब उसे समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार बन चुका है, तो उसने 25 जुलाई 2024 को त्रिशूर सिटी साइबर क्राइम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया और संबंधित बैंक खातों तथा पैसों के लेनदेन की जांच शुरू हुई। इतनी बड़ी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए जाने के कारण जांच में वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को समझना महत्वपूर्ण हो गया।
अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़ाव की जांच
इस मामले में मोहम्मद फजल के. की गिरफ्तारी को अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी और एटीएम कार्ड तस्करी गिरोह की जांच के सिलसिले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, आरोपी की कथित भूमिका, गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की पूरी रकम के इस्तेमाल को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएंगे।साइबर धोखाधड़ी के ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां पैसों के लेनदेन, बैंक खातों के इस्तेमाल और आरोपियों के बीच संभावित संपर्कों की पड़ताल करती हैं। इस मामले में भी अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई रकम का पता लगाना अहम है।केरल हाईकोर्ट ने मार्च 2025 में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया था। अदालत ने मामले की गंभीरता, बड़ी वित्तीय क्षति और अलग-अलग राज्यों में फैले संभावित लेनदेन को देखते हुए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की जरूरत पर विचार किया था।
लोगों को सतर्क रहने की जरूरत
यह मामला बताता है कि साइबर ठग किस तरह कूरियर कंपनी, पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर लोगों को डराने की कोशिश करते हैं। पार्सल में प्रतिबंधित सामान मिलने, बैंक खाते की जांच या गिरफ्तारी की धमकी देकर लोगों पर तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाया जा सकता है।ऐसी स्थिति में किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते से रकम ट्रांसफर नहीं करनी चाहिए। फोन करने वाले की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करने से बचना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी बनकर पैसे भेजने के लिए कहता है, तो उसकी बात पर बिना सत्यापन भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।साइबर ठगी की आशंका होने पर पीड़ित को जल्द से जल्द अपने बैंक और संबंधित साइबर अपराध अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी दर्ज कराई जा सकती है।मोहम्मद फजल के. की गिरफ्तारी के बाद अब मामले में आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि आरोपी की भूमिका क्या थी, ठगी की रकम किन खातों में पहुंची और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता थी या नहीं। फिलहाल, मामले के सभी पहलुओं को जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।