तटीय सुरक्षा कानून के कारण घर निर्माण पर रोक

Update: 2026-07-25 10:20 GMT

केरल : एझुपन्ना पंचायत के वार्ड 15 के नींदाकारा और नारियांडी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने तटीय सुरक्षा कानून (Coastal Protection Act) के कारण घर बनाने में आ रही परेशानियों को लेकर शिकायत की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों के चलते वे नए घर नहीं बना पा रहे हैं और कई परिवार ऐसे मकानों में रहने को मजबूर हैं, जो लंबे समय से खराब हालत में हैं और कभी भी गिर सकते हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत की ओर से तटीय सुरक्षा नियमों के तहत नए मकान बनाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इसके कारण वे अपने पुराने और क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत या पुनर्निर्माण भी नहीं करा पा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई वर्षों से इस समस्या का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर, अधिकारियों का कहना है कि तटीय क्षेत्र प्रबंधन नियमों (Coastal Zone Management Act) के प्रावधानों के कारण इन इलाकों में निर्माण कार्यों की अनुमति देना संभव नहीं है।

जर्जर मकानों में रहने को मजबूर परिवार

नींदाकारा और नारियांडी इलाके के कई परिवारों का कहना है कि उनके घर अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं। कई मकानों की दीवारों और नींव में दरारें आ चुकी हैं। इसके बावजूद लोग मजबूरी में इन्हीं घरों में रह रहे हैं।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, वे नए घर बनाने या पुराने मकानों को पूरी तरह से दोबारा बनाने के लिए पंचायत से अनुमति लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन तटीय सुरक्षा नियमों का हवाला देकर आवेदन स्वीकार नहीं किए जाते।

लोगों का कहना है कि घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी संपत्ति है। जब पुराने मकान खराब हो जाते हैं और नए निर्माण की अनुमति नहीं मिलती, तो उनके सामने गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है।

सरकारी आवास योजनाओं का भी नहीं मिल रहा लाभ

स्थानीय लोगों ने यह भी शिकायत की है कि निर्माण संबंधी प्रतिबंधों के कारण उन्हें सरकार की आवास योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अपने स्तर पर नया घर बनाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में सरकारी योजनाओं के जरिए मिलने वाली सहायता उनके लिए महत्वपूर्ण होती है। लेकिन तटीय क्षेत्र के नियमों के कारण वे इस सुविधा से भी वंचित हो रहे हैं।

लोगों ने मांग की है कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में विशेष राहत व्यवस्था तैयार करें, ताकि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आवास मिल सके।

नारियांडी में खारे पानी से बढ़ी समस्या

नारियांडी इलाके में खारे पानी के प्रवेश की समस्या ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 70 घर लंबे समय से खारे पानी के संपर्क में रहने के कारण खराब हो रहे हैं।

खारे पानी के कारण मकानों की नींव कमजोर हो रही है और निर्माण सामग्री को नुकसान पहुंच रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कई घर आने वाले वर्षों में रहने लायक नहीं रह जाएंगे।

स्थानीय निवासियों का दावा है कि खारे पानी के प्रभाव के कारण इन मकानों की मजबूती लगातार कम हो रही है और कई घरों की उम्र सीमित रह गई है।

अधिकारियों ने नियमों का दिया हवाला

अधिकारियों का कहना है कि तटीय क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नियमों का पालन करना जरूरी है। Coastal Zone Management Act के तहत समुद्र और तटीय क्षेत्रों के पास निर्माण कार्यों पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, पंचायत अपनी ओर से इन नियमों को नजरअंदाज कर अनुमति नहीं दे सकती। किसी भी निर्माण कार्य के लिए संबंधित नियमों और विभागीय मंजूरी का पालन करना आवश्यक है।

हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों के कारण उन्हें सुरक्षा से समझौता करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि ऐसे मामलों में मानवीय आधार पर समाधान निकाला जाए।

स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि तटीय सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि पुराने और खतरनाक मकानों की स्थिति को देखते हुए विशेष अनुमति या राहत योजना बनाई जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पर्यावरण संरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षित घर में रहने का अधिकार मिलना चाहिए।

प्रशासन के सामने चुनौती

एझुपन्ना पंचायत के इस मामले ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यावरण संरक्षण नियमों के बीच संतुलन की चुनौती को सामने ला दिया है। एक ओर तटीय इलाकों को प्राकृतिक आपदाओं और अनियंत्रित निर्माण से बचाना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर वहां रहने वाले लोगों की आवास संबंधी जरूरतों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अब लोगों की नजर सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर है। स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि उनकी समस्या को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान निकाला जाएगा, जिससे तटीय नियमों का पालन भी हो और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आवास भी मिल सके।

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