तिरुवनंतपुरम: राज्य की राजनीति में विवाद पैदा करने वाले विधानसभा में हंगामे के चर्चित मामले की सुनवाई 11 साल बाद शुरू होने जा रही है। इस मामले की सुनवाई 3 नवंबर को तिरुवनंतपुरम की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में शुरू होगी। सुनवाई के पहले दिन अदालत मामले के पहले गवाह और तत्कालीन विधानसभा सचिव शरंगधरण से पूछताछ करेगी।
यह घटना 13 मार्च 2015 को हुई थी। रिश्वत के आरोपों के बाद तत्कालीन वित्त मंत्री के.एम. मणि के इस्तीफे की मांग को लेकर की गई हड़ताल हंगामे में बदल गई थी। जब मणि राज्य का बजट पेश करने आए तो LDF विधायकों ने उन्हें रोका, स्पीकर के मंच पर चढ़ गए, कुर्सियां ​​पलट दीं और विधानसभा में हिंसक माहौल बना दिया। मामले के अनुसार, फर्नीचर, कंप्यूटर, माइक्रोफोन और बिजली के पैनल को नुकसान पहुंचा, जिससे 2,20,093 रुपये का नुकसान हुआ।
म्यूजियम पुलिस ने मामला दर्ज किया और पूर्व विधायकों वी. शिवनकुट्टी, ई.पी. जयराजन, के.टी. जलील, के. अजित, के. कुंजाहमद और सी.के. सदाशिवन को मुख्य आरोपी बनाया। तत्कालीन LDF सरकार ने मामला वापस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन याचिका खारिज कर दी गई, जिससे आरोपियों को मुकदमे का सामना करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि विधायकों को विधानसभा के अंदर छूट (इम्युनिटी) प्राप्त है और आदेश दिया कि उन्हें सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में मुकदमे का सामना करना होगा।
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