कोझिकोड। महिलाओं के खिलाफ कथित बयानों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे वरिष्ठ इस्लामिक विद्वान कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने शुक्रवार को अपने समर्थकों से संयम बरतने और किसी भी तरह के उकसावे में नहीं आने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक चर्चाओं को विवाद, टकराव या समाज में बंटवारे का कारण नहीं बनना चाहिए। उन्होंने लोगों से विचारों पर स्वस्थ और निष्पक्ष चर्चा का माहौल बनाए रखने की भी अपील की।
अबूबकर मुसलियार ने शुक्रवार को एक फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि चर्चाओं का उद्देश्य विचारों का निष्पक्ष आकलन करना और नई चीजों को सीखने का अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए। उनके इस बयान को मौजूदा विवाद के बीच समर्थकों को शांत रहने और प्रतिक्रिया देने से बचने की अपील के तौर पर देखा जा रहा है।
कथित बयानों को लेकर विवाद
वरिष्ठ सुन्नी विद्वान के कुछ कथित बयानों को लेकर हाल के दिनों में विवाद खड़ा हुआ है। विशेष रूप से महिलाओं से संबंधित टिप्पणियों को लेकर विभिन्न वर्गों की ओर से आलोचना की गई है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हुई है।
विवाद के बीच अबूबकर मुसलियार ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी चर्चा या विचार-विमर्श को व्यक्तिगत विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय मुद्दों को समझने और स्वस्थ तरीके से चर्चा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
हालांकि, उनके फेसबुक पोस्ट में किसी विशेष व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लिया गया। उन्होंने व्यापक रूप से आध्यात्मिक चर्चाओं और विचारों के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बात की।
'उकसावे में न आएं'
अपने संदेश में अबूबकर मुसलियार ने समर्थकों से स्पष्ट रूप से अपील की कि वे किसी के उकसावे में न आएं। उन्होंने कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर होने वाली चर्चाओं को विवाद और विभाजन में बदलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उनकी इस अपील को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कथित टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया सहित सार्वजनिक मंचों पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ऐसे में समर्थकों को संयम बरतने की सलाह देकर उन्होंने विवाद को और बढ़ने से रोकने का संदेश दिया है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी विचार या बयान को लेकर असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन असहमति को टकराव में बदलना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, चर्चा ऐसी होनी चाहिए जिसमें अलग-अलग विचारों को समझने और उनका निष्पक्ष मूल्यांकन करने की गुंजाइश बनी रहे।
चर्चाओं को सीखने का माध्यम बनाने की बात
अबूबकर मुसलियार ने अपने फेसबुक संदेश में आध्यात्मिक चर्चाओं के सकारात्मक पक्ष पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि चर्चाओं से विचारों का निष्पक्ष आकलन करने का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही, ऐसी बातचीत लोगों को नई चीजें सीखने और अपने ज्ञान को बढ़ाने में मदद कर सकती है।
उनके संदेश का केंद्र यही रहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर बातचीत को स्वस्थ माहौल में आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि किसी चर्चा का उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय को नीचा दिखाना या समाज में दूरी पैदा करना नहीं होना चाहिए।
वरिष्ठ विद्वान की यह अपील ऐसे समय आई है जब उनके कथित बयानों को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है। सोशल मीडिया पर समर्थकों और आलोचकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ऐसे माहौल में उनके शांति और संयम के संदेश को अहम माना जा रहा है।
विवाद को बढ़ाने के बजाय संवाद पर जोर
धार्मिक मामलों से जुड़े विवादों में सोशल मीडिया की भूमिका लगातार बढ़ी है। किसी बयान का छोटा हिस्सा तेजी से प्रसारित होने के कारण कई बार उसके व्यापक संदर्भ को लेकर भी बहस खड़ी हो जाती है। ऐसे में अबूबकर मुसलियार ने सीधे तौर पर अपने समर्थकों से प्रतिक्रिया देने के बजाय विचार-विमर्श को प्राथमिकता देने की बात कही है।
उनका कहना है कि आध्यात्मिक चर्चाओं को विवाद और विभाजन का रूप नहीं लेना चाहिए। इस संदेश के जरिए उन्होंने अपने समर्थकों से धैर्य रखने और किसी भी प्रकार की उकसावे वाली प्रतिक्रिया से बचने का आग्रह किया।
समर्थकों से संयम बरतने की अपील
अबूबकर मुसलियार लंबे समय से धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। उनके समर्थकों का एक बड़ा वर्ग धार्मिक शिक्षाओं और उनके विचारों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में उनके द्वारा सार्वजनिक रूप से संयम बरतने की अपील को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उन्होंने अपने संदेश में किसी तरह के टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय स्वस्थ संवाद को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। उनका जोर इस बात पर रहा कि विचारों का आकलन निष्पक्ष तरीके से किया जाए और चर्चा के जरिए नई बातें सीखने का अवसर मिले।
फिलहाल महिलाओं के खिलाफ कथित बयानों को लेकर उठे विवाद के बीच अबूबकर मुसलियार की यह अपील सामने आई है। उन्होंने समर्थकों को उकसावे से दूर रहने और आध्यात्मिक चर्चाओं को विवाद या सामाजिक विभाजन का कारण नहीं बनने देने का संदेश दिया है। अब इस मुद्दे पर आगे होने वाली सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।