Kerala केरल: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने केरल सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार आम जनता और पेंशनर्स की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से पेंशन और सैलरी भत्तों के भुगतान में लंबित राशि के मुद्दे को उठाया और कहा कि इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स के जीवन में गंभीर परेशानियाँ उत्पन्न हो रही हैं।
वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने कई महीनों से पेंशन और वेतन भत्तों का भुगतान नहीं किया है, जिससे राज्य के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को अपने दैनिक खर्चों और जीवन यापन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह केवल देरी नहीं है, बल्कि कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक कठिनाइयों को बढ़ाने वाली अनदेखी है।
उन्होंने कहा, "सरकार केवल दिखावे के लिए दावा करती है कि वे कर्मचारियों और पेंशनर्स के हित में काम कर रही है, लेकिन वास्तविकता में बहुत बड़ी बकाया राशि के कारण लोग वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। यह न केवल कर्मचारियों की व्यक्तिगत मुश्किलें बढ़ा रहा है, बल्कि उनके परिवारों पर भी गहरा असर डाल रहा है।"
वेणुगोपाल ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को तुरंत पेंशन और सैलरी भत्तों के भुगतान में लंबित राशि को चुकता करना चाहिए और कर्मचारियों तथा पेंशनर्स की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय को नजरअंदाज करना सरकारी जवाबदेही के सिद्धांतों के खिलाफ है और इसका नकारात्मक प्रभाव राज्य प्रशासन की साख पर पड़ेगा।
AICC महासचिव ने राज्य सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द बकाया राशि का निपटान करे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाने और कर्मचारियों के अधिकारों के लिए आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेगी।
इससे पहले केरल में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स ने भी विरोध प्रदर्शन कर पेंशन और वेतन भत्तों के भुगतान में देरी के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई थी। कई कर्मचारियों ने बताया कि भुगतान में देरी से उनके दैनिक खर्च और बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
वेणुगोपाल ने अंत में कहा कि सरकार का यह रवैया कर्मचारियों और पेंशनर्स के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है और इसे तुरंत सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से कहा कि वित्तीय देरी से उत्पन्न समस्याओं को हल करना प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि राज्य में सामाजिक और आर्थिक स्थिरता बनी रहे।
कांग्रेस के इस बयान के बाद राज्य में कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है और राजनीतिक हलकों में भी इसके संभावित प्रभावों पर ध्यान दिया जा रहा है।