नीलेश्वरम में रेलवे की 25.42 एकड़ जमीन बेकार, सभी विकास परियोजनाएं अटकीं
कासरगोड। कन्नूर और मंगलुरु के बीच रेलवे के लिहाज से महत्वपूर्ण स्टेशन नीलेश्वरम में उपलब्ध बड़ी जमीन का अब तक उपयोग नहीं हो पाने से क्षेत्र के विकास की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं। रेलवे के पास नीलेश्वरम स्टेशन के आसपास करीब 25.42 एकड़ जमीन उपलब्ध है, लेकिन इस जमीन पर प्रस्तावित विकास परियोजनाएं अब तक आगे नहीं बढ़ सकी हैं। स्थानीय स्तर पर इस जमीन का इस्तेमाल ट्रेनों की देखरेख के लिए पिट लाइन, सिक लाइन और ट्रेनों को खड़ा करने के लिए स्टेबलिंग लाइन बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है।
नीलेश्वरम में रेलवे की इतनी बड़ी जमीन होने के बावजूद उसका उपयोग यात्रियों और रेल परिचालन की सुविधाओं के विस्तार के लिए नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में यह जमीन रेलवे स्लीपर, निर्माण सामग्री और अन्य अनुपयोगी सामान के भंडारण के साथ-साथ झाड़ियों और पेड़-पौधों से घिरे क्षेत्र में तब्दील होती जा रही है।
सभी विकास परियोजनाएं अटकीं
नीलेश्वरम रेलवे स्टेशन के विकास को लेकर समय-समय पर कई प्रस्ताव सामने आए हैं। इनमें स्टेशन की परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ ट्रेनों की देखरेख और रखरखाव के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार करने की मांग प्रमुख है।
रेलवे की 25.42 एकड़ जमीन को इस उद्देश्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यहां पिट लाइन और सिक लाइन जैसी सुविधाएं विकसित की जाती हैं तो ट्रेनों की नियमित जांच और मरम्मत का काम अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
इसके अलावा स्टेबलिंग लाइन बनने से ट्रेनों को कुछ समय के लिए खड़ा रखने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इससे स्टेशन की परिचालन क्षमता बढ़ सकती है और लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन में भी मदद मिल सकती है।
24 कोच वाली ट्रेनों की देखरेख में कमी
पलक्कड़ डिवीजन में फिलहाल 24 कोच वाली ट्रेनों की देखरेख और रखरखाव के लिए पर्याप्त सुविधाओं की कमी बताई जा रही है। लंबी ट्रेनों के संचालन के साथ उनके रखरखाव के लिए भी पर्याप्त बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है।
यदि नीलेश्वरम में उपलब्ध जमीन का इस्तेमाल आधुनिक रेलवे सुविधाओं के विकास के लिए किया जाता है तो इस कमी को दूर करने में मदद मिल सकती है। पिट लाइन जैसी सुविधा विशेष रूप से लंबी दूरी की ट्रेनों की जांच और तकनीकी निरीक्षण के लिए उपयोगी हो सकती है।
रेलवे के बढ़ते यात्री दबाव और लंबी दूरी की ट्रेनों की बढ़ती जरूरत को देखते हुए ऐसी सुविधाओं का विस्तार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कान्हांगड-कनियार लाइन से बढ़ेगी अहमियत
प्रस्तावित कान्हांगड-कनियार रेलवे लाइन के निर्माण के बाद नीलेश्वरम की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। नई रेल लाइन बनने पर नीलेश्वरम को एक बड़े ऑपरेटिंग स्टेशन के रूप में विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
ऐसी स्थिति में स्टेशन के पास पहले से उपलब्ध 25.42 एकड़ जमीन रेलवे के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। यहां परिचालन से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जा सकता है और ट्रेनों की आवाजाही तथा रखरखाव को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकता है।
रेलवे विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अभी से जमीन के उपयोग की योजना तैयार की जानी चाहिए।
जमीन का वर्तमान इस्तेमाल सवालों के घेरे में
रेलवे की इतनी बड़ी जमीन वर्तमान में यात्रियों या रेल परिचालन के लिए उपयोगी बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल नहीं हो रही है। बताया जा रहा है कि इसका बड़ा हिस्सा रेलवे स्लीपर और अन्य कचरे के भंडारण केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
जमीन के कई हिस्सों में झाड़ियां और पेड़-पौधे उग आए हैं, जिससे यह क्षेत्र जंगल जैसा नजर आने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे की जमीन का इस तरह इस्तेमाल लंबे समय तक जारी रखना उचित नहीं है, जबकि क्षेत्र में रेलवे सुविधाओं की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
उनका तर्क है कि यदि जमीन का इस्तेमाल पिट लाइन, सिक लाइन और स्टेबलिंग लाइन के निर्माण के लिए किया जाए तो न केवल रेलवे को लाभ होगा बल्कि यात्रियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
स्थानीय विकास को मिलेगा फायदा
नीलेश्वरम में रेलवे की सुविधाओं का विस्तार होने से आसपास के क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की संभावना है। ट्रेन संचालन और रखरखाव से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
इसके अलावा स्टेशन का महत्व बढ़ने से क्षेत्र में यात्री सुविधाओं, परिवहन व्यवस्था और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विकास को भी गति मिल सकती है। नई रेल लाइन के साथ यदि नीलेश्वरम को प्रमुख परिचालन केंद्र के रूप में विकसित किया जाता है तो यह पूरे क्षेत्र के रेल नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है।
रेलवे से जल्द निर्णय की उम्मीद
स्थानीय लोगों और रेल यात्रियों की नजर अब इस बात पर है कि रेलवे नीलेश्वरम में उपलब्ध जमीन के इस्तेमाल को लेकर कब ठोस फैसला करता है। क्षेत्र में जमीन उपलब्ध होने के बावजूद परियोजनाओं के आगे नहीं बढ़ने से लोगों में निराशा है।
लोगों की मांग है कि रेलवे 25.42 एकड़ जमीन का तकनीकी और व्यावहारिक आकलन कराकर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप योजना तैयार करे। खासकर 24 कोच वाली ट्रेनों की देखरेख के लिए आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता देने की मांग की जा रही है।
कान्हांगड-कनियार रेलवे लाइन के प्रस्तावित निर्माण के बाद नीलेश्वरम की भूमिका और बढ़ने की संभावना को देखते हुए जमीन का समयबद्ध उपयोग और भी जरूरी हो जाता है।
फिलहाल रेलवे की जमीन पर विकास की संभावनाओं के बजाय स्लीपर और अन्य सामग्री का भंडारण तथा झाड़ियों का फैलाव नजर आ रहा है। यदि प्रस्तावित परियोजनाओं को मंजूरी देकर काम शुरू किया जाता है तो नीलेश्वरम स्टेशन भविष्य में एक बड़े ऑपरेटिंग केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। इसके लिए रेलवे को उपलब्ध जमीन का रणनीतिक इस्तेमाल करने की दिशा में जल्द कदम उठाने की जरूरत है।