मैसूर। ग्रामीण इलाकों में किसानों की शादी नहीं होने की समस्या को लेकर एक किसान ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के सामने अनोखी मांग रख दी। मैसूर के पेरियपट्टना में आयोजित जन-सेवा कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे किसान ने कहा कि सरकार को ऐसी कोई योजना बनानी चाहिए, जिससे कुंवारे पुरुषों, खासकर किसानों को जीवनसाथी मिल सके। किसान ने दावा किया कि गांवों में 35 से 40 साल की उम्र तक पहुंच चुके कई पुरुषों की शादी नहीं हो पा रही है और वे इससे मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं।
किसान ने मुख्यमंत्री के सामने ग्रामीण युवाओं की समस्या रखते हुए कहा कि कई पुरुष लंबे समय से शादी का इंतजार कर रहे हैं। उम्र बढ़ती जा रही है, लेकिन उन्हें शादी के लिए कोई महिला नहीं मिल रही है। इस दौरान कई युवकों के माता-पिता भी उनकी शादी देखने की इच्छा लिए दुनिया से चले गए। किसान ने इसे गांवों में बढ़ती सामाजिक समस्या बताते हुए सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की मांग की।
जन-सेवा कार्यक्रम के दौरान किसान ने जब मुख्यमंत्री के सामने यह मांग रखी तो डी.के. शिवकुमार भी कुछ पल के लिए हैरान रह गए। उन्होंने किसान से पूछा, “क्या? क्या हुआ है?” इसके बाद उन्होंने उसकी बात ध्यान से सुनी। किसान ने विस्तार से बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवा किसान शादी नहीं होने के कारण परेशान हैं।
किसान ने मुख्यमंत्री से कहा कि 35 से 40 साल की उम्र के कई पुरुष अब भी अविवाहित हैं। उनका कहना था कि इन युवकों में बड़ी संख्या किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले लोगों की है। लंबे समय तक विवाह नहीं होने के कारण वे जिंदगी से निराश होते जा रहे हैं।
अपनी बात रखते हुए किसान ने आत्महत्या का मुद्दा भी उठाया। उसने कहा कि गरीब और किसान निराशा में आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। हालांकि किसान द्वारा शादी नहीं होने और आत्महत्या के बीच बताए गए संबंध की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। फिर भी उसने मुख्यमंत्री से इस समस्या को गंभीरता से लेने और अविवाहित किसानों के लिए कोई व्यवस्था तैयार करने का अनुरोध किया।
किसान की मांग सामान्य सरकारी शिकायतों से बिल्कुल अलग थी। आम तौर पर जनसुनवाई या जन-सेवा कार्यक्रमों में जमीन, बिजली, पानी, पेंशन, सरकारी योजनाओं, सड़क, रोजगार और आर्थिक सहायता से जुड़ी शिकायतें सामने आती हैं। लेकिन इस किसान ने ग्रामीण युवाओं के विवाह को सामाजिक समस्या बताते हुए सीधे सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर दी।
किसान ने मुख्यमंत्री से ऐसी योजना बनाने का अनुरोध किया, जिससे शादी की उम्र पार कर रहे किसानों और गरीब युवकों को जीवनसाथी तलाशने में सहायता मिल सके। उसकी मांग के पीछे ग्रामीण समाज में बदलते विवाह संबंधों और किसानों के सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियों की चिंता दिखाई दी।
ग्रामीण इलाकों में युवाओं के सामने रोजगार और आय के साथ विवाह भी कई परिवारों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। खेती से जुड़े परिवारों में आर्थिक अनिश्चितता, सीमित आमदनी और गांवों से शहरों की ओर पलायन जैसे कई कारण सामाजिक संरचना को प्रभावित करते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति की शादी होना पूरी तरह व्यक्तिगत पसंद और आपसी सहमति का विषय है, इसलिए इस तरह की किसी भी सरकारी पहल में महिलाओं और पुरुषों दोनों की स्वतंत्र पसंद सर्वोपरि होगी।
मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्या बताते हुए किसान ने विशेष रूप से 35 से 40 साल के अविवाहित पुरुषों का उल्लेख किया। उसने कहा कि उम्र बढ़ने के बाद भी शादी नहीं होने से कई लोग हताश हो रहे हैं। माता-पिता भी अपने बेटों की शादी को लेकर परेशान रहते हैं और कई मामलों में उनकी इच्छा पूरी हुए बिना ही उनकी मृत्यु हो जाती है।
किसान की बात सुनने के दौरान मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उसकी समस्या को समझने की कोशिश की। जब उसने पहली बार योजना बनाने की मांग रखी तो मुख्यमंत्री ने उससे दोबारा पूछा कि आखिर समस्या क्या है। इसके बाद किसान ने विस्तार से कुंवारे किसानों की स्थिति बताई।
यह मांग अब इसलिए भी चर्चा का विषय बन सकती है क्योंकि इसमें किसानों की आर्थिक समस्याओं से अलग उनके सामाजिक जीवन का मुद्दा उठाया गया है। किसान समुदाय को लेकर आमतौर पर फसल, कर्ज, सिंचाई, समर्थन मूल्य, बीज, खाद और आर्थिक सहायता जैसे विषय चर्चा में रहते हैं। इस बार मुख्यमंत्री के सामने किसान ने विवाह से जुड़ी परेशानी रखकर ग्रामीण जीवन के एक अलग पहलू की ओर ध्यान खींचा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बदलते सामाजिक और आर्थिक हालात के कारण विवाह को लेकर प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं। बेहतर शिक्षा और रोजगार के लिए युवाओं का शहरों की ओर जाना, खेती से होने वाली आय में उतार-चढ़ाव और जीवनशैली में बदलाव जैसी परिस्थितियां विवाह संबंधी फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में किसान द्वारा उठाया गया मुद्दा ग्रामीण समाज में मौजूद व्यापक बदलाव की ओर भी संकेत करता है।
हालांकि सरकार किसी व्यक्ति के लिए सीधे जीवनसाथी तय नहीं कर सकती। विवाह दो वयस्क व्यक्तियों की स्वतंत्र सहमति पर आधारित संबंध है। लेकिन यदि सरकार इस तरह की समस्या पर कोई कदम उठाती है तो वह सामाजिक परिचय कार्यक्रम, समुदाय आधारित मंच या जागरूकता जैसे स्वैच्छिक विकल्पों के रूप में हो सकता है। फिलहाल सरकार की ओर से ऐसी किसी योजना की घोषणा की जानकारी नहीं दी गई है।
जन-सेवा कार्यक्रम में पहुंचे किसान की मुख्य मांग यही थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से अविवाहित रह रहे पुरुषों की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जाए। उसने सरकार से इस विषय पर विचार करने और ऐसा कोई रास्ता तलाशने की अपील की जिससे किसानों को भी जीवनसाथी तलाशने में मदद मिल सके।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने किसान की बात ध्यान से सुनी, लेकिन इस मांग को लेकर तत्काल किसी नई योजना की घोषणा नहीं की गई। ऐसे में यह देखना होगा कि किसान की इस असामान्य मांग पर सरकार आगे किसी तरह की प्रतिक्रिया देती है या नहीं।
फिलहाल मैसूर के पेरियपट्टना में जन-सेवा कार्यक्रम के दौरान सामने आया यह मामला चर्चा में है। एक किसान द्वारा 35 से 40 साल तक अविवाहित रह रहे किसानों की परेशानी सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखने से ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह से जुड़ी सामाजिक चुनौती का मुद्दा सामने आया है। किसान की मांग साफ थी कि सरकार इस समस्या को समझे और ऐसा कोई स्वैच्छिक उपाय तलाशे जिससे विवाह की इच्छा रखने वाले किसानों और अन्य ग्रामीण युवाओं को उपयुक्त जीवनसाथी खोजने में मदद मिल सके।