बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति और इतिहास से जुड़े एक पुराने प्रसंग का जिक्र विधान परिषद में हुआ, जिसमें राज्य के प्रसिद्ध नेता और विधान सौधा के निर्माता केंगल हनुमंथैया से जुड़ी घटना सामने आई। चर्चा के दौरान बताया गया कि विधान सौधा के निर्माण के समय कैदियों ने भी इसमें श्रम किया था और एक बार निरीक्षण के दौरान उन्होंने हनुमंथैया पर चप्पलें तक फेंक दी थीं।

विधान परिषद में बोलते हुए नेता ने कहा कि हर व्यक्ति को जीवन में हर अवसर नहीं मिलता, लेकिन जब अवसर मिले तो उसका सही उपयोग करना चाहिए। उन्होंने केंगल हनुमंथैया और विधान सौधा के निर्माण से जुड़े इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए इतिहास की घटनाओं को याद किया।

कैदियों ने किया था विधान सौधा का निर्माण कार्य

विधान सौधा कर्नाटक की पहचान और स्थापत्य कला का प्रमुख प्रतीक है। इसका निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री केंगल हनुमंथैया के नेतृत्व में कराया गया था।

चर्चा के दौरान बताया गया कि उस समय निर्माण कार्य में कैदियों को भी लगाया गया था। वे मजदूरी और अन्य कार्यों में सहयोग कर रहे थे।

कहा गया कि एक दिन जब केंगल हनुमंथैया निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे, तो कुछ कैदी नाराज हो गए और उन्होंने विरोध स्वरूप उन पर चप्पलें फेंक दीं।

हनुमंथैया को नहीं मिला विधान सौधा में बैठने का मौका

विधान परिषद में इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इतनी बड़ी इमारत का निर्माण कराने वाले केंगल हनुमंथैया को बाद में उसी विधान सौधा में बैठने का अवसर नहीं मिल सका।

वक्ताओं ने कहा कि इतिहास में कई बार ऐसा होता है कि किसी महान कार्य को करने वाला व्यक्ति उसके परिणामों का लाभ नहीं उठा पाता।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को जीवन में मिलने वाले अवसरों की पहचान करनी चाहिए और उनका सदुपयोग करना चाहिए।

केम्पेगौड़ा और हनुमंथैया का किया उल्लेख

चर्चा के दौरान बेंगलुरु के संस्थापक केम्पेगौड़ा और केंगल हनुमंथैया का भी उल्लेख किया गया। कहा गया कि केम्पेगौड़ा ने बेंगलुरु शहर की नींव रखी, जबकि हनुमंथैया ने विधान सौधा जैसी ऐतिहासिक इमारत का निर्माण कराया।

विधान सौधा आज कर्नाटक की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र है और राज्य की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

विकास सौधा के निर्माण का भी जिक्र

विधान परिषद में विकास सौधा के निर्माण से जुड़ा प्रसंग भी साझा किया गया। बताया गया कि विकास सौधा के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री के लिए एक कुर्सी आरक्षित रखी गई थी।

उस समय लोक निर्माण मंत्री रहे धर्म सिंह उस कुर्सी पर बैठे थे। वक्ता ने कहा कि बाद में इतिहास ने करवट ली और धर्म सिंह आगे चलकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने।

इस घटना को उन्होंने समय और अवसर के महत्व से जोड़ते हुए बताया।

इतिहास से सीख लेने की बात

विधान परिषद में हुई इस चर्चा में नेताओं ने कहा कि इतिहास केवल पुरानी घटनाओं का संग्रह नहीं होता, बल्कि उससे वर्तमान और भविष्य के लिए सीख भी ली जा सकती है।

केंगल हनुमंथैया जैसे नेताओं के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उन्होंने कर्नाटक की पहचान मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विधान सौधा कर्नाटक की गौरवशाली धरोहर

बेंगलुरु स्थित विधान सौधा देश की प्रमुख सरकारी इमारतों में शामिल है। इसकी वास्तुकला भारतीय परंपरा और आधुनिक निर्माण शैली का मिश्रण मानी जाती है।

इस भवन का निर्माण कर्नाटक की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान को दर्शाने के उद्देश्य से किया गया था। आज यहां राज्य विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही संचालित होती है।

राजनीतिक चर्चा में इतिहास का संदर्भ

विधान परिषद में केंगल हनुमंथैया से जुड़ा यह प्रसंग केवल एक ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं बल्कि अवसर, नेतृत्व और योगदान के संदर्भ में सामने आया।

वक्ताओं ने कहा कि समाज और राज्य के निर्माण में योगदान देने वाले लोगों को हमेशा याद रखा जाना चाहिए। विधान सौधा का निर्माण कर्नाटक के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसे केंगल हनुमंथैया के नाम से जोड़ा जाता है।

इस चर्चा ने एक बार फिर कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास और उन नेताओं के योगदान को याद करने का अवसर दिया, जिन्होंने राज्य की नींव मजबूत करने में भूमिका निभाई।

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