बेंगलुरु। कर्नाटक में ट्रेकिंग के दौरान पानी से भरी एक पुरानी पत्थर की खदान में डूबने से लापता हुए 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर विनय का शव आखिरकार बरामद कर लिया गया। जिगानी के पास यल्लामानादोड्डी इलाके में हुई इस घटना के बाद लगातार दो दिनों तक बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया गया। रविवार सुबह नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) और अन्य बचाव दलों ने खदान से विनय का शव बाहर निकाला।

घटना 2 अक्टूबर की बताई गई है। मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले विनय बेंगलुरु के हालसुरु इलाके में रह रहे थे। शुक्रवार को वह एक ट्रेकिंग टीम के साथ जिगानी के पास यल्लामानादोड्डी क्षेत्र में ट्रेकिंग करने गए थे। दिन में ट्रेकिंग के बाद शाम के समय टीम के कुछ सदस्य इलाके में मौजूद पानी से भरी पुरानी पत्थर की खदान के पास पहुंचे।

जानकारी के अनुसार ट्रेकिंग टीम के करीब पांच सदस्य खदान के पानी में उतरे थे। यह खदान करीब 100 फीट गहरी बताई जा रही है। यहां लगभग 15 साल पहले पत्थर की खुदाई का काम बंद हो चुका था। लंबे समय से इस्तेमाल नहीं होने के कारण खदान में बड़ी मात्रा में पानी भर गया था।

पानी में उतरने के बाद अचानक विनय लापता हो गए। साथियों ने उन्हें तलाशने की कोशिश की, लेकिन गहराई अधिक होने के कारण उनका कोई पता नहीं चला। इसके बाद घटना की जानकारी संबंधित अधिकारियों और बचाव टीमों को दी गई। सूचना मिलते ही विनय की तलाश के लिए अभियान शुरू किया गया।

खदान की गहराई और पानी के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। पानी के भीतर दृश्यता कम होने और खदान की संरचना के कारण बचाव दलों को तलाश में काफी मशक्कत करनी पड़ी। पहले दिन कई घंटों तक अभियान चलाने के बावजूद विनय का पता नहीं चल सका।

इसके बाद अगले दिन भी तलाश जारी रखी गई। बचाव अभियान में स्थानीय टीमों के साथ NDRF को भी लगाया गया। पानी के भीतर विनय की तलाश के लिए प्रशिक्षित बचावकर्मियों ने खदान के अलग-अलग हिस्सों की जांच की। लगातार प्रयासों के बावजूद शनिवार को भी सफलता नहीं मिली।

दो दिनों तक चले अभियान के बाद रविवार सुबह बचाव दल को सफलता मिली। NDRF और अन्य टीमों ने पानी के भीतर से विनय का शव खोज निकाला और उसे खदान से बाहर लाया। शव बरामद होने के साथ ही करीब दो दिन से जारी तलाशी अभियान समाप्त हुआ।

30 वर्षीय विनय पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। वह आंध्र प्रदेश के मूल निवासी थे और काम के सिलसिले में बेंगलुरु के हालसुरु में रह रहे थे। शुक्रवार को वह अन्य लोगों के साथ ट्रेकिंग के लिए निकले थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह ट्रेकिंग यात्रा एक दुखद हादसे में बदल जाएगी।

घटना के बाद यह सवाल भी सामने आया है कि लंबे समय से बंद पड़ी पत्थर की खदान के आसपास सुरक्षा की क्या व्यवस्था थी। करीब 15 साल पहले यहां पत्थर की खुदाई बंद कर दी गई थी। इसके बाद खदान में पानी जमा हो गया और यह करीब 100 फीट गहरी जल संरचना में बदल गई।

ऐसी पुरानी खदानों में पानी की वास्तविक गहराई, नीचे की सतह और किनारों की स्थिति का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है। पानी के नीचे चट्टानें और अचानक गहराई जैसी परिस्थितियां खतरा बढ़ा सकती हैं। विनय के साथ वास्तव में क्या परिस्थितियां बनीं और वह किस तरह पानी में लापता हुए, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

बताया गया है कि ट्रेकिंग टीम में शामिल लगभग पांच लोग खदान के पानी में उतरे थे। बाकी सदस्य बाहर निकल आए, लेकिन विनय वापस नहीं लौट सके। उनके लापता होने के बाद साथियों और स्थानीय लोगों ने मदद की कोशिश की और बाद में बचाव एजेंसियों को सूचना दी गई।

घटना की जानकारी मिलने के बाद बचाव दलों ने खदान की गहराई को देखते हुए विशेष सावधानी के साथ अभियान चलाया। गहरे पानी में किसी व्यक्ति को तलाशना सामान्य बचाव अभियान की तुलना में अधिक कठिन होता है। यही कारण रहा कि विनय का पता लगाने में करीब दो दिन का समय लगा।

रविवार सुबह शव बरामद होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारी परिस्थितियों की जांच करेंगे। विनय के साथ ट्रेकिंग पर गए लोगों से भी घटनाक्रम की जानकारी ली जा सकती है।

यह हादसा ट्रेकिंग और एडवेंचर गतिविधियों के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करने की आवश्यकता की ओर भी ध्यान दिलाता है। खासकर बंद खदानों, गहरे जलाशयों और अनजान जल क्षेत्रों में उतरना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे स्थानों की वास्तविक गहराई और पानी के भीतर मौजूद खतरों का अनुमान बाहर से लगाना मुश्किल होता है।

विनय के लापता होने के बाद उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद में बचाव अभियान लगातार जारी रखा गया था। NDRF और अन्य बचाव टीमों ने दो दिनों तक तलाश नहीं रोकी। रविवार सुबह जब उनका शव मिला तो परिवार और साथियों की उम्मीदें टूट गईं।

फिलहाल शव को खदान से बाहर निकाल लिया गया है और मामले में आवश्यक प्रक्रिया की जा रही है। इस हादसे में किसी तरह की लापरवाही या सुरक्षा संबंधी चूक हुई थी या नहीं, यह जांच का विषय है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विनय की मौत पानी से भरी पुरानी पत्थर की खदान में डूबने के बाद हुई और करीब दो दिन की तलाश के बाद उनका शव बरामद किया गया।

Tags: