बेंगलुरु। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित स्टिंग ऑपरेशन वीडियो को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को उन्होंने अपने नाम को वीडियो से जोड़े जाने के आरोपों का खंडन करते हुए इसे राजनीतिक छवि खराब करने की कोशिश बताया। सिद्धारमैया ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक कथित स्टिंग ऑपरेशन से उनका नाम जोड़कर भ्रामक सामग्री प्रसारित की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इसके पीछे दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक मंशा है। इस विवाद के बीच सिद्धारमैया ने बेंगलुरु की अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है।सिद्धारमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने वायरल वीडियो और उससे जुड़े दावों का संज्ञान लिया है। उनके अनुसार, यह मामला उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास प्रतीत होता है।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की छवि खराब करने के लिए अपुष्ट वीडियो और आरोपों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने वीडियो से जुड़े तथ्यों की जांच और इसके पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की आवश्यकता जताई।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद
कर्नाटक में कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इन वीडियो में सिद्धारमैया का नाम कथित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग से जुड़े आरोपों के साथ जोड़ा जा रहा है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पहला वीडियो 27 सितंबर 2026 को एक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया था। दूसरा वीडियो 2 अक्टूबर को एक कन्नड़ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुआ।सिद्धारमैया ने इन वीडियो में लगाए गए आरोपों को गलत और मानहानिकारक बताया है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और उनमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अदालत पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया
विवाद बढ़ने के बाद सिद्धारमैया ने बेंगलुरु की सिविल अदालत में याचिका दाखिल की है। उन्होंने कथित रूप से मानहानिकारक वीडियो के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की है।मामले में 42 मीडिया संस्थानों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य प्रतिवादियों को शामिल किया गया है।सिद्धारमैया ने अदालत से मांग की है कि उनके नाम से जुड़े विवादित वीडियो, उनके अंश, स्क्रीनशॉट और संबंधित आरोपों को प्रकाशित या प्रसारित करने से रोका जाए।रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त सिटी सिविल एवं सत्र न्यायाधीश बी. पुष्पांजलि ने अंतरिम राहत से जुड़े आवेदन पर आदेश सुरक्षित रखा था। मामले में 13 अक्टूबर को आदेश सुनाया जाना निर्धारित था।
स्टिंग ऑपरेशन की जांच की मांग
सिद्धारमैया ने पूरे मामले की जांच की आवश्यकता भी जताई है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार का स्टिंग ऑपरेशन किया गया है, तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि इसके पीछे कौन लोग हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ी सच्चाई सामने लाने के लिए जांच क्यों नहीं होनी चाहिए।कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की ओर से भी कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर चिंता जताई गई थी। उन्होंने मंत्रियों और अधिकारियों को निशाना बनाए जाने की आशंका का उल्लेख किया था।इस बयान के बाद मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया।
कुमारस्वामी ने भी उठाए सवाल
केंद्रीय मंत्री और जनता दल सेक्युलर के वरिष्ठ नेता एचडी कुमारस्वामी ने भी कथित स्टिंग ऑपरेशन के मामले में जांच की मांग की है।कुमारस्वामी ने सवाल उठाया कि जब सरकार को ऐसे किसी ऑपरेशन की जानकारी है, तो इसकी आधिकारिक जांच क्यों नहीं कराई जा रही है।उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से संबंधित दावों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।कुमारस्वामी ने यह आशंका भी व्यक्त की कि कथित स्टिंग ऑपरेशन का इस्तेमाल राजनीतिक व्यक्तियों की छवि प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कर्नाटक की राजनीति में तेज हुई बयानबाजी
कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर कर्नाटक में कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बयान के बाद विपक्षी दलों ने मामले की जांच की मांग उठाई है। वहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे राजनीतिक उद्देश्य हो सकता है।सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया है कि वह अपने नाम को विवादित वीडियो से जोड़ने का विरोध कर रहे हैं और मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए।फिलहाल इस मामले में आरोपों की सत्यता स्थापित नहीं हुई है। सिद्धारमैया की याचिका पर अदालत का फैसला और कथित वीडियो से जुड़े तथ्यों की जांच आगे की स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगी।
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