Karnataka कर्नाटक: कर्नाटका हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि एक ही समुदाय को शिक्षा और रोजगार के लिए दो अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों में नहीं रखा जा सकता। यह फैसला एक महिला की  याचिका पर आया, जिन्होंने राज्य सरकार द्वारा बलाजीगा/बणाजीगा समुदाय की वर्गीकरण को चुनौती दी थी।

जज  ने यह फैसला सुनाते हुए कर्नाटका सरकार को बलाजीगा/बणाजीगा समुदाय को शिक्षा और रोजगार दोनों के लिए एक ही ग्रुप 'B' के तहत वर्गीकृत करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य द्वारा किया गया विभाजन, जिसमें शिक्षा के लिए इसे ग्रुप 'B' और रोजगार के लिए ग्रुप 'D' में रखा गया था, असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण था।

याचिकर्ता ने 1993 में ओबीसी कोटे में प्राथमिक विद्यालय शिक्षिका के रूप में नियुक्ति प्राप्त की थी, लेकिन 1996 में उसे यह सूचित किया गया कि उसकी जाति को रोजगार के लिए ग्रुप 'D' में वर्गीकृत किया गया है, जिससे उसकी जाति प्रमाणपत्र अमान्य हो गया।

कोर्ट ने याचिकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया, यह कहते हुए कि समान समुदाय को शिक्षा और रोजगार में अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है

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