बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से बड़े स्तर पर पथ संचलन आयोजित किए गए। शहर के अलग-अलग इलाकों में लगभग 100 स्थानों पर स्वयंसेवकों ने रूट मार्च में हिस्सा लिया। विजयादशमी के उपलक्ष्य में आयोजित इन कार्यक्रमों में संघ के स्वयंसेवक निर्धारित मार्गों पर मार्च करते नजर आए। हालांकि विजयादशमी का त्योहार कुछ दिन पहले मनाया जा चुका था, लेकिन संघ की ओर से इसके बाद भी पथ संचलन कार्यक्रम आयोजित किए गए। विजयनगर, मल्लेश्वरम, मैजेस्टिक, राजाजीनगर और इलेक्ट्रॉनिक सिटी सहित कई इलाकों में कार्यक्रम हुए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना भी विजयादशमी के दिन हुई थी, इसलिए संगठन के लिए इस पर्व का विशेष महत्व है।

बेंगलुरु के करीब 100 स्थानों पर पथ संचलन

रविवार को बेंगलुरु के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से पथ संचलन आयोजित किए गए।

जानकारी के अनुसार, शहर में लगभग 100 रूट मार्च निकाले गए।

इन कार्यक्रमों का आयोजन अलग-अलग क्षेत्रों में किया गया, ताकि स्थानीय स्तर पर स्वयंसेवक इनमें भाग ले सकें।

पथ संचलन संघ की नियमित सार्वजनिक गतिविधियों में शामिल है। इसके तहत स्वयंसेवक समूह में निर्धारित मार्गों से गुजरते हैं।

बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रमों की संख्या को देखते हुए यह संघ का व्यापक आयोजन रहा।

हालांकि सभी पथ संचलनों में कुल कितने स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया, इसका आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

विजयनगर से इलेक्ट्रॉनिक सिटी तक आयोजन

शहर के कई प्रमुख क्षेत्रों में रविवार को संघ के पथ संचलन हुए।

इनमें विजयनगर, मल्लेश्वरम, मैजेस्टिक, राजाजीनगर और इलेक्ट्रॉनिक सिटी जैसे इलाके शामिल थे।

इसके अलावा बेंगलुरु के अन्य क्षेत्रों में भी रूट मार्च आयोजित किए गए।

शहर के अलग-अलग हिस्सों में आयोजन होने के कारण स्वयंसेवकों को अपने स्थानीय क्षेत्रों में कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिला।

हालांकि प्रत्येक मार्च का निर्धारित मार्ग, शुरुआत और समापन का समय तथा प्रतिभागियों की संख्या अलग-अलग हो सकती है।

इनका विस्तृत कार्यक्रम उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

विजयादशमी के उपलक्ष्य में निकाला गया मार्च

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इन पथ संचलनों का संबंध विजयादशमी पर्व से था।

हालांकि आयोजन त्योहार के कुछ दिन बाद किया गया, लेकिन इसका उद्देश्य विजयादशमी से जुड़ी संघ की परंपरा का पालन करना था।

संघ के लिए विजयादशमी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि संगठन के स्थापना दिवस से जुड़ा अवसर भी है।

इसी वजह से हर वर्ष विजयादशमी के आसपास संघ की ओर से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

इनमें पथ संचलन और संगठनात्मक गतिविधियां शामिल रहती हैं।

हजारों स्वयंसेवकों ने लिया हिस्सा

रविवार को आयोजित पथ संचलनों में हजारों स्वयंसेवकों ने भाग लिया।

कार्यक्रमों में बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ स्वयंसेवकों की भागीदारी भी देखी गई।

चामराजपेट इलाके में निकाला गया पथ संचलन विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए सिद्धरूढ़ आश्रम के सामने समाप्त हुआ।

स्वयंसेवकों ने ढोल की थाप पर कदमताल की। कार्यक्रमों के दौरान पुलिस ने प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी।

भाजपा के कई नेता भी हुए शामिल

बेंगलुरु के जयनगर में आयोजित पथ संचलन में कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक शामिल हुए।

उनके साथ विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवादी नारायणस्वामी और जयनगर के विधायक सी.के. राममूर्ति भी मौजूद रहे।

पूर्व उपमुख्यमंत्री सी.एन. अश्वथ नारायण ने मल्लेश्वरम के कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त और भाजपा नेता भास्कर राव भी पथ संचलन में शामिल हुए।

अनुमति को लेकर सरकार और भाजपा में विवाद

पथ संचलन से पहले कर्नाटक में कार्यक्रमों की अनुमति को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया था।

राज्य के मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा था कि सार्वजनिक मार्गों पर ऐसे आयोजन करने के लिए पुलिस से औपचारिक अनुमति लेना जरूरी है।

उनका कहना था कि केवल पुलिस को सूचना देना पर्याप्त नहीं है। कार्यक्रम के मार्ग, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन से जुड़े विवरणों के साथ निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर कार्यक्रमों की अनुमति देने में अनावश्यक बाधाएं पैदा करने का आरोप लगाया।

आर. अशोक ने सरकार पर लगाए आरोप

नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने इस बार संघ के पथ संचलनों के आयोजन में कई तरह की पाबंदियां लगाईं।

उन्होंने दावा किया कि अनुमति मिलने में अंतिम समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

हालांकि आरएसएस के एक स्थानीय समन्वयक ने बताया कि बेंगलुरु में सभी पथ संचलनों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनुमति प्राप्त कर ली गई थी और यहां कोई बड़ी बाधा नहीं आई।

इस तरह कार्यक्रमों की अनुमति को लेकर भाजपा नेता और संघ के स्थानीय प्रतिनिधि के बयानों में अंतर सामने आया।

कर्नाटक के दूसरे जिलों में भी कार्यक्रम

बेंगलुरु के अलावा कर्नाटक के अन्य जिलों में भी पथ संचलन आयोजित किए गए।

हुबली और कलबुर्गी सहित कई क्षेत्रों में स्वयंसेवकों ने कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

हालांकि कुछ स्थानों पर अनुमति और चुनाव आचार संहिता से संबंधित कारणों के चलते कार्यक्रम स्थगित या पुनर्निर्धारित किए गए।

तुमकुरु में चुनावी आचार संहिता के कारण प्रतिबंधों का मुद्दा सामने आया, जबकि कोलार जिले के मुलबागल में कार्यक्रम को 31 अक्टूबर के लिए पुनर्निर्धारित किया गया।

रामनगर और कलबुर्गी में कुछ कार्यक्रमों के लिए सशर्त अनुमति दी गई।

सुरक्षा और यातायात के लिए पुलिस तैनात

बेंगलुरु में आयोजित पथ संचलनों के दौरान प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया।

पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात बाधित होने से रोकने के लिए व्यवस्थाएं की गई थीं।

बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सड़क पर वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण होता है।

इसलिए आयोजनों के लिए मार्ग और समय तय करने के साथ सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान दिया गया।

संघ की स्थापना से जुड़ा है विजयादशमी का महत्व

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी।

संगठन हर वर्ष विजयादशमी के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता है।

पथ संचलन संघ की प्रमुख पारंपरिक गतिविधियों में शामिल है।

इस वर्ष बेंगलुरु में हुए आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष से संबंधित कार्यक्रमों का भी हिस्सा थे।

राजनीतिक विवाद के बीच संपन्न हुए आयोजन

रविवार को बेंगलुरु में लगभग 100 स्थानों पर आयोजित पथ संचलन राजनीतिक विवाद के बीच संपन्न हुए।

एक ओर संघ के स्वयंसेवकों ने विजयादशमी के उपलक्ष्य में कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार और भाजपा के बीच अनुमति तथा प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर मतभेद बने रहे।

बेंगलुरु में पथ संचलन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि कर्नाटक में सार्वजनिक आयोजनों की अनुमति और नियमों के पालन को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

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