हाई कोर्ट का आदेश बताकर टोल देने से इनकार बीच लेन में खड़ी कर दी बाइक 4 घंटे तक लगा जाम
बेंगलुरु: बेंगलुरु में टोल भुगतान को लेकर हुए विवाद के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी पुलिस ने एक बाइकर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि बाइकर ने NICE रोड टोल प्लाजा पर कर्मचारियों से बहस की और दावा किया कि उसके पास हाई कोर्ट का ऐसा आदेश है, जिसके आधार पर उसे टोल शुल्क देने की जरूरत नहीं है। कर्मचारियों द्वारा टोल मांगे जाने के बाद उसने कथित तौर पर अपनी बाइक टोल लेन के बीच खड़ी कर दी, जिससे कई घंटे तक यातायात प्रभावित हुआ।
घटना 15 सितंबर की बताई गई है। टोल अधिकारी वाई.एस. बसवराजु की शिकायत के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी पुलिस ने अक्षय रेड्डी नाम के बाइकर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।
सुबह 11.09 बजे पहुंचा था टोल प्लाजा
शिकायत के अनुसार अक्षय रेड्डी 15 सितंबर की सुबह करीब 11.09 बजे NICE रोड टोल प्लाजा की लेन नंबर 14 पर पहुंचा था। टोल कर्मचारियों ने उससे निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के लिए कहा।
आरोप है कि इस दौरान रेड्डी ने कर्मचारियों को बताया कि उसके पास हाई कोर्ट का आदेश है और उस आदेश के तहत उसे टोल शुल्क का भुगतान करने से छूट मिली हुई है।
कर्मचारियों ने उससे संबंधित आदेश या छूट का आधार दिखाने को कहा। विवाद इसी बात को लेकर बढ़ा और दोनों पक्षों के बीच बहस होने लगी।
लेन के बीच खड़ी कर दी बाइक
टोल अधिकारी की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कर्मचारियों द्वारा शुल्क का भुगतान करने के लिए कहे जाने के बाद रेड्डी ने अपनी बाइक को लेन के बीच में खड़ा कर दिया।
बाइक बीच रास्ते में खड़ी होने से उस लेन से दूसरे वाहनों का निकलना मुश्किल हो गया। इसके बाद पीछे वाहनों की कतार बढ़ने लगी और टोल प्लाजा की सामान्य व्यवस्था प्रभावित हुई।
शिकायत के मुताबिक स्थिति कुछ मिनटों तक सीमित नहीं रही, बल्कि करीब चार घंटे तक टोल प्लाजा पर यातायात में व्यवधान बना रहा।
किसी व्यस्त टोल प्लाजा की एक लेन लंबे समय तक बाधित होने पर दूसरी लेनों पर भी वाहनों का दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण टोल प्रबंधन ने घटना को गंभीर बताते हुए पुलिस से शिकायत की।
दूसरे बाइकर्स को लेकर भी शिकायत में दावा
टोल अधिकारी वाई.एस. बसवराजु ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान दूसरे बाइकर्स से भी टोल नहीं देने को कहा गया।
पुलिस अब शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की जांच करेगी। घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग और अन्य उपलब्ध साक्ष्य से यह पता लगाया जा सकता है कि विवाद कितनी देर चला और उस दौरान टोल प्लाजा पर क्या परिस्थितियां बनीं।
फिलहाल शिकायत में किए गए दावों को आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए। पुलिस जांच के बाद ही घटनाक्रम और जिम्मेदारी की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
हाई कोर्ट के आदेश का किया था दावा
पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु कथित हाई कोर्ट आदेश का दावा है। शिकायत के अनुसार आरोपी बाइकर ने इसी आधार पर टोल शुल्क नहीं देने की बात कही थी।
अब जांच में यह भी देखा जा सकता है कि जिस आदेश का दावा किया गया, वह वास्तव में मौजूद था या नहीं और अगर कोई आदेश था तो उसका दायरा क्या था।
किसी न्यायालय के आदेश का हवाला देकर शुल्क से छूट का दावा करने की स्थिति में संबंधित दस्तावेज और उसकी शर्तों की पुष्टि महत्वपूर्ण होती है। केवल मौखिक दावे के आधार पर छूट लागू होने या न होने का फैसला नहीं किया जा सकता।
इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और शिकायत की जांच कर रही है।
चार घंटे तक प्रभावित रहा यातायात
टोल प्लाजा पर हुआ विवाद इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शिकायत में करीब चार घंटे तक रास्ता बाधित होने की बात कही गई है। इतने लंबे समय तक किसी टोल लेन के प्रभावित रहने से बड़ी संख्या में वाहन चालकों को परेशानी हो सकती है।
टोल प्लाजा पर हर वाहन के लिए अलग-अलग लेन निर्धारित होती हैं और एक लेन बंद होने पर वहां आने वाले वाहनों को दूसरी लेन में भेजना पड़ता है। इससे बाकी लेनों पर दबाव बढ़ जाता है।
पुलिस के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि वास्तविक रूप से कितने समय तक लेन बाधित रही और यातायात पर इसका कितना असर पड़ा।
टोल अधिकारी की शिकायत पर FIR
घटना के बाद टोल अधिकारी वाई.एस. बसवराजु ने इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी पुलिस से संपर्क किया। उनकी शिकायत के आधार पर अक्षय रेड्डी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
एफआईआर दर्ज होना जांच प्रक्रिया की शुरुआत है और इससे आरोप अपने आप साबित नहीं हो जाते। पुलिस अब शिकायतकर्ता, टोल कर्मचारियों और घटना के समय मौजूद अन्य लोगों के बयान दर्ज कर सकती है।
इसके अलावा टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल या दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच भी की जा सकती है।
अगर बाइकर की ओर से किसी हाई कोर्ट आदेश की प्रति पेश की जाती है तो पुलिस उसकी प्रामाणिकता और उसमें दी गई व्यवस्था को भी जांच के दायरे में ले सकती है।
टोल प्लाजा पर विवाद से बढ़ी परेशानी
टोल भुगतान को लेकर वाहन चालकों और कर्मचारियों के बीच बहस के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं। ऐसे विवाद जब टोल लेन के बीच होते हैं तो उसका असर दूसरे वाहन चालकों पर भी पड़ता है।
किसी शुल्क या नियम को लेकर आपत्ति होने पर संबंधित प्राधिकरण के समक्ष शिकायत या कानूनी प्रक्रिया का विकल्प मौजूद रहता है। टोल लेन बाधित होने से पीछे मौजूद उन वाहन चालकों को भी परेशानी होती है जिनका विवाद से कोई संबंध नहीं होता।
इस मामले में भी पुलिस की जांच का एक पहलू टोल प्लाजा पर कथित रूप से यातायात बाधित करने से जुड़ा है।
CCTV से सामने आ सकती है पूरी तस्वीर
घटना के समय टोल प्लाजा पर मौजूद सीसीटीवी कैमरे जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इनसे बाइक के पहुंचने का समय, कर्मचारियों और बाइकर के बीच हुई गतिविधियों तथा लेन कितनी देर तक बाधित रही, इसकी पुष्टि करने में मदद मिल सकती है।
15 सितंबर की घटना को लेकर अब इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी पुलिस ने औपचारिक मामला दर्ज कर लिया है। टोल अधिकारी का आरोप है कि अक्षय रेड्डी ने हाई कोर्ट के आदेश का दावा करते हुए शुल्क देने से इनकार किया और बाइक बीच लेन में खड़ी करके यातायात रोक दिया।
अब पुलिस जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि कथित हाई कोर्ट आदेश से जुड़ा दावा कितना सही था और करीब चार घंटे तक टोल प्लाजा बाधित रहने के आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य मिलते हैं।