R Ashok ने कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना, कर्नाटक में आर्थिक स्थिति को लेकर उठाए सवाल

Update: 2026-06-02 05:57 GMT

Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सोमवार को राज्य की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार बदलने की संभावनाओं और राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर गंभीर आरोप लगाए।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आर. अशोक ने कहा कि सिद्धारमैया चुपचाप सत्ता से हटे और अपने बाद आने वाले डी.के. शिवकुमार के लिए एक “टूटी-फूटी लॉरी” छोड़ गए हैं। उन्होंने कहा, “कांग्रेस सरकार एक पुरानी लॉरी की तरह है — सिर्फ ड्राइवर बदला है, गाड़ी नहीं। इस टूटी हुई गाड़ी को ठीक नहीं किया जा सकता।”

अशोक ने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया ने पिछले तीन वर्षों तक उधार के पैसों पर सरकार चलाई। उन्होंने कहा कि राज्य पर बढ़ता कर्ज और लंबित वित्तीय दायित्व अब नई नेतृत्व व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। उनके अनुसार, मौजूदा आर्थिक स्थिति के कारण सरकार को जनता पर अतिरिक्त टैक्स लगाने पड़ सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कर्नाटक का बजट लगभग 4 लाख करोड़ रुपये है, जबकि राज्य पर कुल कर्ज 7.64 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसके अलावा, इस वर्ष का वित्तीय घाटा 94,428 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जिससे विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं है।

आर. अशोक ने दावा किया कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य में विकास परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं और वित्तीय असंतुलन बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास नए विकास कार्यों के लिए संसाधन नहीं बचे हैं, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

विपक्ष के नेता ने कहा कि कांग्रेस सरकार की नीतियों ने राज्य को वित्तीय संकट की ओर धकेल दिया है। उन्होंने मांग की कि सरकार को अपने खर्चों और कर्ज प्रबंधन की समीक्षा करनी चाहिए तथा वित्तीय अनुशासन लागू करना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान राज्य की मौजूदा राजनीति में बढ़ते तनाव को दर्शाता है। कांग्रेस और भाजपा के बीच आर्थिक प्रबंधन और विकास कार्यों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

कांग्रेस की ओर से इस बयान पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि सरकार आने वाले दिनों में विपक्ष के इन आरोपों का जवाब दे सकती है।

कर्नाटक की राजनीति में बढ़ते इस विवाद के बीच राज्य की आर्थिक स्थिति और विकास योजनाओं को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।

Tags:    

Similar News