बेंगलुरु। कर्नाटक में वर्ष 2027 की एसएसएलसी यानी दसवीं और दूसरी पीयूसी यानी बारहवीं की वार्षिक बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों में बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है। इसका प्रमुख कारण केंद्र सरकार की आगामी जनगणना का दूसरा चरण है। जानकारी के अनुसार, जनगणना निदेशालय ने स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर परीक्षा कार्यक्रम में आवश्यक बदलाव पर विचार करने का अनुरोध किया है। जनगणना का दूसरा चरण 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक प्रस्तावित बताया गया है। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगने की संभावना है। ऐसे में परीक्षा संचालन और जनगणना के बीच तालमेल बनाने के लिए बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों में बदलाव पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, कर्नाटक स्कूल परीक्षा एवं मूल्यांकन बोर्ड ने अभी परीक्षाएं स्थगित करने या नई तारीखें घोषित करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

जनगणना के कारण परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव की संभावना

कर्नाटक में स्कूल शिक्षा विभाग के सामने आगामी जनगणना और बोर्ड परीक्षाओं को लेकर प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो सकती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जनगणना संचालन निदेशालय ने स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर दोनों कार्यक्रमों की तारीखों में संभावित टकराव की ओर ध्यान दिलाया है।

जनगणना के दौरान शिक्षकों को घर-घर जाकर जनसंख्या से जुड़ी जानकारी एकत्र करने सहित विभिन्न जिम्मेदारियां दी जाती हैं।

वहीं बोर्ड परीक्षाओं में भी बड़ी संख्या में शिक्षकों की आवश्यकता होती है। उन्हें परीक्षा केंद्रों पर निरीक्षण, निगरानी और अन्य प्रशासनिक कार्य सौंपे जाते हैं।

ऐसे में दोनों महत्वपूर्ण कार्यक्रम एक ही समय पर होने से कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

25 जनवरी से 28 फरवरी तक प्रस्तावित जनगणना कार्य

उपलब्ध विवरण के अनुसार, जनगणना का दूसरा चरण 25 जनवरी 2027 से शुरू होकर 28 फरवरी तक चलने की योजना है।

इस अवधि में जनसंख्या से संबंधित विस्तृत जानकारियां एकत्र करने का काम किया जाएगा।

कर्नाटक में जनगणना के लिए बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी जा रही है। इनमें स्कूल शिक्षक और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हो सकते हैं।

मई 2026 में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में जनगणना के दूसरे चरण के लिए करीब डेढ़ लाख सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी अपेक्षित थी।

सरकार ने जनगणना कार्य में तैनात कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर भी आवश्यक तैयारी शुरू की थी।

दूसरी PUC की परीक्षा 27 फरवरी से प्रस्तावित

कर्नाटक स्कूल परीक्षा एवं मूल्यांकन बोर्ड ने अक्टूबर में वर्ष 2027 के लिए दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं का अस्थायी कार्यक्रम जारी किया था।

इस कार्यक्रम के अनुसार दूसरी पीयूसी की पहली वार्षिक परीक्षा 27 फरवरी से 17 मार्च 2027 तक आयोजित करने का प्रस्ताव है।

वहीं एसएसएलसी की पहली परीक्षा 22 मार्च से पांच अप्रैल 2027 तक निर्धारित की गई है।

यदि जनगणना का दूसरा चरण 28 फरवरी तक चलता है, तो दूसरी पीयूसी की परीक्षा के शुरुआती दिनों में शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर चुनौती पैदा हो सकती है।

हालांकि, एसएसएलसी की परीक्षा जनगणना की बताई गई अवधि समाप्त होने के बाद प्रस्तावित है। इसलिए दोनों परीक्षाओं पर प्रभाव एक जैसा होना आवश्यक नहीं है।

बोर्ड ने जारी किया था अस्थायी परीक्षा कार्यक्रम

कर्नाटक स्कूल परीक्षा एवं मूल्यांकन बोर्ड ने आठ अक्टूबर को परीक्षा कार्यक्रम जारी कर विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों से सुझाव आमंत्रित किए थे।

इन सुझावों और आपत्तियों को जमा करने के लिए 22 अक्टूबर तक का समय दिया गया था।

बोर्ड ने पहली और दूसरी वार्षिक परीक्षाओं का प्रस्तावित कार्यक्रम जारी किया है।

दूसरी पीयूसी की दूसरी परीक्षा तीन से 15 मई 2027 के बीच होनी है। वहीं एसएसएलसी की दूसरी परीक्षा 24 से 31 मई के बीच आयोजित करने का प्रस्ताव है।

बोर्ड अब प्राप्त सुझावों और प्रशासनिक परिस्थितियों की समीक्षा के आधार पर अंतिम समय-सारणी तय कर सकता है।

शिक्षकों की दोहरी जिम्मेदारी बनी चुनौती

जनगणना और बोर्ड परीक्षाओं में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

जनगणना में कर्मचारियों को निर्धारित क्षेत्रों में जाकर आवश्यक जानकारियां दर्ज करनी होती हैं। इसके लिए प्रशिक्षण और प्रशासनिक समन्वय की भी आवश्यकता होती है।

दूसरी ओर बोर्ड परीक्षाओं के सफल संचालन के लिए परीक्षा केंद्रों पर निरीक्षक, केंद्र अधीक्षक और अन्य कर्मचारियों की तैनाती आवश्यक है।

यदि पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होती, तो परीक्षा प्रबंधन प्रभावित हो सकता है।

इसी संभावना को देखते हुए दोनों कार्यक्रमों के बीच समन्वय आवश्यक माना जा रहा है।

कर्नाटक में शिक्षकों के संगठनों ने पहले भी जनगणना ड्यूटी और शैक्षणिक जिम्मेदारियों के बढ़ते बोझ को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

लाखों विद्यार्थियों की तैयारियों पर पड़ सकता है असर

एसएसएलसी और दूसरी पीयूसी कर्नाटक की महत्वपूर्ण सार्वजनिक परीक्षाएं हैं।

हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। दसवीं की परीक्षा विद्यार्थियों की आगे की शैक्षणिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होती है।

वहीं दूसरी पीयूसी की परीक्षा उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों में प्रवेश और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी होती है।

ऐसे में परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव होने पर विद्यार्थियों को अपनी तैयारी की योजना में भी परिवर्तन करना पड़ सकता है।

हालांकि, संभावित तारीख परिवर्तन को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इसलिए छात्रों को फिलहाल बोर्ड की घोषित अस्थायी समय-सारणी के अनुसार पढ़ाई जारी रखनी चाहिए।

परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था पर भी पड़ेगा प्रभाव

बोर्ड परीक्षाओं के आयोजन में शिक्षकों के साथ परीक्षा भवन, सुरक्षा व्यवस्था और परिवहन जैसी सुविधाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है।

परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, विद्यार्थियों की उपस्थिति और परीक्षा की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होती हैं।

यदि बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना में व्यस्त रहते हैं, तो परीक्षा केंद्रों के लिए आवश्यक कर्मचारियों की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इसके अलावा परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव की स्थिति में केंद्रों की उपलब्धता और अन्य प्रशासनिक तैयारियों की भी समीक्षा करनी पड़ सकती है।

शिक्षा विभाग को इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद निर्णय लेना होगा।

छात्रों और अभिभावकों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार

परीक्षाओं के संभावित स्थगन की चर्चा के बीच विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात आधिकारिक जानकारी प्राप्त करना है।

बोर्ड की ओर से जारी अस्थायी समय-सारणी अंतिम नहीं होती। प्राप्त सुझावों और परिस्थितियों के आधार पर इसमें बदलाव किया जा सकता है।

हालांकि, अभी तक परीक्षा स्थगन की कोई अंतिम अधिसूचना सामने नहीं आई है।

विद्यार्थी कर्नाटक स्कूल परीक्षा एवं मूल्यांकन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट kseab.karnataka.gov.in पर परीक्षा कार्यक्रम से संबंधित जानकारी देख सकते हैं।

सरकार और परीक्षा बोर्ड के निर्णय पर नजर

जनगणना के दूसरे चरण और बोर्ड परीक्षाओं के बीच संभावित टकराव को देखते हुए अब स्कूल शिक्षा विभाग तथा परीक्षा बोर्ड की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

यदि जनगणना कार्य के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों की आवश्यकता होती है, तो विभाग को परीक्षा संचालन के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने या तारीखों में बदलाव करने पर विचार करना पड़ सकता है।

हालांकि, दोनों कार्यक्रमों के बीच समन्वय स्थापित करके निर्धारित परीक्षा कार्यक्रम को जारी रखने की संभावना भी बनी हुई है।

फिलहाल यह मामला प्रशासनिक विचार-विमर्श के स्तर पर बताया जा रहा है।

परीक्षाएं स्थगित होने का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। विद्यार्थियों को किसी भी अफवाह पर भरोसा करने के बजाय परीक्षा बोर्ड की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए।

Tags: