बेंगलुरु। बेंगलुरु के बाहरी इलाके में पिछले कुछ समय से लोगों के लिए चिंता का कारण बने जंगली हाथी को आखिरकार वन विभाग ने बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क के जंगल क्षेत्र में वापस भेज दिया है। सोमवार सुबह मैसूर रोड पर अंचेपाल्या के पास वन विभाग की टीम ने लंबे अभियान के बाद हाथी को सुरक्षित दिशा में खदेड़ते हुए जंगल की ओर पहुंचाया। इसी हाथी के हमले में सैर पर निकले 60 वर्षीय नागराज की मौत हो गई थी।

घटना के बाद वन विभाग ने हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखी थी। हाथी रिहायशी और व्यस्त सड़क क्षेत्रों के नजदीक पहुंच गया था, जिसके कारण स्थानीय लोगों में डर का माहौल था। किसी और अप्रिय घटना को रोकने के लिए वन विभाग की कई टीमों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया।

अधिकारियों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान हाथी की गतिविधियों को समझने और उसे सुरक्षित रास्ते से बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क की ओर ले जाने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई। वनकर्मियों ने हाथी को घेरने के बजाय उसे ऐसी दिशा देने की कोशिश की, जिससे वह खुद जंगल के सुरक्षित हिस्से की तरफ बढ़ सके।

बैंगलोर सिटी डिवीजन के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट वाई. चक्रपाणि ने बताया कि हाथी बीएम कवल वन क्षेत्र से बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क की ओर जाने का रास्ता तलाश रहा था। वन विभाग के कर्मचारियों ने उसकी गतिविधियों को देखते हुए सही रास्ता उपलब्ध कराया और आखिरकार उसे पार्क की तरफ भेजने में सफलता हासिल की।

ऑपरेशन के दौरान लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शहर की कुछ सड़कों पर यातायात अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। बैंगलोर-मैसूर एक्सप्रेसवे और नाइस रोड पर भी कुछ समय के लिए ट्रैफिक नियंत्रित किया गया। इसका मकसद हाथी को सड़क पार करने के दौरान वाहनों से दूर रखना और किसी दुर्घटना की संभावना को खत्म करना था।

जंगली हाथी की मौजूदगी को देखते हुए मैसूर रोड, कनकपुरा रोड, बन्नेरघट्टा रोड और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को पहले ही सतर्क कर दिया गया था। वन विभाग ने लोगों से रात के समय अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की अपील की थी। खास तौर पर उन क्षेत्रों में अधिक सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे, जहां हाथी की गतिविधि देखी गई थी।

वन विभाग ने पूरे ऑपरेशन में ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। ड्रोन कैमरों की मदद से हाथी की वास्तविक स्थिति और उसकी दिशा पर नजर रखी गई। इसके साथ ही आसपास की सड़कों पर लोगों और वाहनों की मौजूदगी का भी आकलन किया गया। इससे टीम को ऑपरेशन के दौरान आगे की रणनीति तय करने में मदद मिली।

हाथी की गतिविधियों के कारण वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसे बिना नुकसान पहुंचाए वापस जंगल में भेजना था। आबादी वाले क्षेत्र में हाथी को पकड़ने या बेहोश करने जैसी कार्रवाई में कई तरह के जोखिम होते हैं। इसलिए अधिकारियों ने उसे प्राकृतिक रास्ते से वापस जंगल की ओर मोड़ने को प्राथमिकता दी।

नागराज की मौत के बाद यह मामला ज्यादा गंभीर हो गया था। जानकारी के अनुसार नागराज सुबह सैर के लिए निकले थे, तभी उनका सामना जंगली हाथी से हो गया। हाथी ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें कुचल दिया। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई थी और लोगों ने वन विभाग से जल्द कार्रवाई की मांग की थी।

इसके बाद विभाग ने हाथी की तलाश और निगरानी के लिए विशेष टीम बनाई। वनकर्मियों ने उसके पैरों के निशान, गतिविधियों और संभावित रास्तों की पहचान की। यह पता लगाने की कोशिश की गई कि हाथी किस वन क्षेत्र से आया है और वापस किस रास्ते से सुरक्षित तरीके से भेजा जा सकता है।

अधिकारियों को अनुमान था कि हाथी बीएम कवल वन क्षेत्र से निकलकर रास्ता भटक गया था और बन्नेरघट्टा के जंगलों की ओर वापस जाना चाहता था। लेकिन तेजी से बढ़े शहरी क्षेत्र, सड़कें और वाहनों की आवाजाही उसके प्राकृतिक रास्ते में बाधा बन रही थीं।

बेंगलुरु के बाहरी क्षेत्रों में जंगल और आबादी के बीच की दूरी लगातार कम होने के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। हाथी भोजन और पानी की तलाश में कई बार वन क्षेत्र से बाहर निकलकर खेतों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाते हैं।

ऐसे मामलों में वन विभाग लोगों से जंगली जानवरों के नजदीक नहीं जाने और उनकी तस्वीर या वीडियो बनाने के लिए भीड़ नहीं लगाने की अपील करता है। अचानक शोर या लोगों की भीड़ से हाथी घबरा सकता है और उसकी दिशा बदल सकती है, जिससे खतरा और बढ़ सकता है।

वन विभाग ने अभियान के दौरान स्थानीय पुलिस और यातायात विभाग के साथ भी समन्वय किया। सड़क पर वाहनों को रोकने और लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखने से हाथी को जंगल की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद मिली।

कई घंटे की निगरानी और प्रयास के बाद सोमवार सुबह हाथी को अंचेपाल्या के पास से सुरक्षित रूप से बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क के जंगल की ओर भेज दिया गया। इसके बाद आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने राहत की सांस ली।

हालांकि वन विभाग ने लोगों को कुछ समय तक सतर्क रहने की सलाह दी है। टीम हाथी की गतिविधियों पर नजर रख रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह दोबारा आबादी वाले इलाके की ओर वापस न आए।

इस ऑपरेशन में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल खास रहा। इसके जरिए न केवल हाथी की स्थिति का लगातार पता चलता रहा, बल्कि सड़क यातायात और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा पर भी नजर रखी गई। वन विभाग की कोशिश रही कि पूरे अभियान में हाथी और आम लोगों दोनों को किसी तरह का नुकसान न हो।

फिलहाल जंगली हाथी के बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क की ओर लौटने से बेंगलुरु के बाहरी इलाकों में बनी चिंता कम हुई है। नागराज की मौत के बाद शुरू हुआ यह अभियान हाथी को सुरक्षित जंगल तक पहुंचाने के साथ पूरा हुआ, लेकिन घटना ने एक बार फिर शहरी विस्तार और वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा की जरूरत को सामने ला दिया है।

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