बेंगलुरु/मैसूर। कर्नाटक के प्रसिद्ध मैसूर दशहरा की जंबो सवारी में इस बार जिलों की झांकियों की संख्या केवल 15 तक सीमित किए जाने के राज्य सरकार के फैसले से कई जिलों में निराशा है। इस सूची में तुमकुरु को भी जगह नहीं मिली है। तुमकुरु राज्य के प्रमुख जिलों में शामिल है और उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर का गृह जिला होने के कारण इसका चयन नहीं होना चर्चा का विषय बन गया है।

मैसूर दशहरा कर्नाटक के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है। इस वर्ष दशहरा समारोह 11 से 21 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा और 21 अक्टूबर को जंबो सवारी के साथ इसका मुख्य आकर्षण देखने को मिलेगा। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार जंबो सवारी मैसूर पैलेस से बन्नीमंटप तक निकलेगी।

जंबो सवारी के दौरान अलग-अलग जिलों की झांकियां कर्नाटक की सांस्कृतिक विविधता, इतिहास, परंपराओं, पर्यटन स्थलों और स्थानीय विशेषताओं को प्रदर्शित करती हैं। इसी वजह से प्रत्येक जिले के लिए इस आयोजन में अपनी झांकी शामिल करना प्रतिष्ठा और सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा विषय माना जाता है।

इस बार सरकार ने जिलों की झांकियों की संख्या 15 तक सीमित रखने का फैसला किया है। इसके कारण राज्य के कई जिलों को जंबो सवारी में अपनी झांकी प्रदर्शित करने का मौका नहीं मिलेगा। तुमकुरु भी चयनित जिलों की सूची से बाहर है।

तुमकुरु की झांकी का चयन नहीं होने के बाद उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने इस मामले की जानकारी ली। बताया जा रहा है कि उन्होंने कन्नड़ और संस्कृति विभाग की सचिव मंजुश्री एन. से बातचीत की। मंजुश्री राज्य स्तरीय उस प्रक्रिया से भी जुड़ी हैं, जिसके माध्यम से दशहरा के लिए जिलों की झांकियों का चयन किया जा रहा है।

इस बातचीत के दौरान मंजुश्री ने स्पष्ट किया कि झांकियों की संख्या को केवल 15 जिलों तक सीमित रखने का फैसला चयन समिति ने नहीं, बल्कि राज्य सरकार ने लिया है। ऐसे में समिति उपलब्ध सीमा के भीतर ही जिलों की झांकियों के चयन की प्रक्रिया पूरी कर रही है।

तुमकुरु को शामिल नहीं किए जाने के कारण स्थानीय स्तर पर निराशा की स्थिति है। जिले का ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से अपना विशेष महत्व है। ऐसे में स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को उम्मीद थी कि जंबो सवारी में जिले की झांकी को स्थान मिलेगा।

मैसूर दशहरा की जंबो सवारी को देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इसलिए जिलों की झांकियों को अपनी संस्कृति और पहचान को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। किसी जिले की झांकी का चयन होने पर उसकी कला, लोक संस्कृति, पर्यटन और उपलब्धियों को हजारों दर्शकों के सामने प्रदर्शित किया जा सकता है।

इस वर्ष जंबो सवारी और झांकियों के संचालन के लिए अलग उपसमिति बनाई गई है। आधिकारिक दशहरा वेबसाइट के अनुसार ‘Procession & Tableaux’ उपसमिति विजयादशमी जुलूस, झांकियों और लोक कलाकारों के दलों से संबंधित व्यवस्थाएं संभाल रही है। आईएएस अधिकारी शेख तनवीर आसिफ इस उपसमिति के डिप्टी स्पेशल ऑफिसर हैं।

मैसूर दशहरा का आयोजन राज्य सरकार की उच्च स्तरीय समिति की निगरानी में किया जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी इसकी नीतिगत व्यवस्था देखती है, जबकि मैसूर जिला प्रशासन और अलग-अलग उपसमितियां कार्यक्रमों के आयोजन की जिम्मेदारी संभालती हैं। कुल 18 उपसमितियां अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए गठित की गई हैं।

झांकियों की संख्या सीमित होने के कारण चयन प्रक्रिया इस बार ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। सभी जिलों को शामिल नहीं किया जा सकता, इसलिए किन जिलों की झांकियां जंबो सवारी में दिखाई देंगी, इसे लेकर स्वाभाविक रूप से दिलचस्पी बढ़ी है।

तुमकुरु को स्थान नहीं मिलने का मामला इसलिए भी सुर्खियों में आया क्योंकि यह उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर का गृह जिला है। हालांकि मंजुश्री की ओर से यह स्पष्ट किए जाने की बात सामने आई है कि 15 झांकियों की सीमा समिति ने तय नहीं की है। यह सरकार के स्तर पर लिया गया निर्णय है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तुमकुरु सहित सूची से बाहर हुए जिलों की ओर से उठाई जा रही मांगों के बाद सरकार अपने फैसले में किसी तरह का बदलाव करती है या नहीं। फिलहाल जंबो सवारी में जिलों की झांकियों की संख्या 15 रखने का निर्णय सामने आया है।

मैसूर दशहरा के मुख्य कार्यक्रमों की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इस बार भी सांस्कृतिक कार्यक्रम, युवा दशहरा, किसान दशहरा, खाद्य मेला, फूल प्रदर्शनी, खेल प्रतियोगिताएं और मशाल परेड जैसे कई आयोजन होंगे। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार 21 अक्टूबर को जंबो सवारी दशहरा उत्सव का प्रमुख आकर्षण होगी।

जंबो सवारी में हाथियों के साथ सांस्कृतिक दल और झांकियां विशेष आकर्षण रहती हैं। इन झांकियों के माध्यम से कर्नाटक के अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट पहचान दर्शकों तक पहुंचती है। इसी कारण किसी जिले का चयन न होना केवल आयोजन में अनुपस्थिति का मामला नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व से भी जुड़ा माना जाता है।

फिलहाल तुमकुरु की झांकी को सूची में शामिल नहीं किए जाने के बाद उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर द्वारा संबंधित अधिकारी से जानकारी लेने की बात सामने आई है। कन्नड़ और संस्कृति विभाग की सचिव मंजुश्री एन. ने झांकियों की संख्या 15 तक सीमित रखने को राज्य सरकार का निर्णय बताया है। अब सूची से बाहर हुए जिलों की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार मौजूदा सीमा को बरकरार रखती है या जंबो सवारी से पहले इसमें कोई बदलाव किया जाता है।

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