बेंगलुरु। कर्नाटक के चार सरकारी सड़क परिवहन निगम गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। राज्य के परिवहन मंत्री बैराती सुरेश ने विधान परिषद में कहा कि चारों परिवहन निगमों को सालाना करीब 8,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है और स्थिति ऐसी हो गई है कि कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं है। मंत्री ने इसके लिए डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी तथा उसके अनुरूप बस किराया नहीं बढ़ाए जाने को प्रमुख कारण बताया।
विधान परिषद में किसानों और दुग्ध उत्पादकों की समस्याओं पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सदस्य एस. रवि ने मिल्क यूनियनों की आर्थिक परेशानियों का मुद्दा उठाया था। इसी चर्चा के दौरान परिवहन मंत्री बैराती सुरेश ने राज्य के परिवहन निगमों की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह मिल्क यूनियन वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं, उसी तरह सरकारी परिवहन निगमों के सामने भी गंभीर आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई है।
मंत्री ने बताया कि राज्य में कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KSRTC), बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (BMTC), कल्याण कर्नाटक रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KKRTC) और नॉर्थ वेस्ट कर्नाटक रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बसें संचालित होती हैं। उन्होंने कहा कि डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी होने के बावजूद उसके अनुरूप बस टिकट के दाम नहीं बढ़ाए गए। इससे परिवहन निगमों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा है।
बैराती सुरेश ने कहा कि चारों निगमों का सालाना नुकसान करीब 8,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। आर्थिक स्थिति इतनी चुनौतीपूर्ण है कि निगमों के पास मौजूदा कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पर्याप्त राशि नहीं है। उन्होंने सदन में परिवहन निगमों की वित्तीय स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि किराया बढ़ाने का विकल्प मौजूद है, लेकिन सरकार को इसके राजनीतिक और सार्वजनिक विरोध की भी चिंता है।
परिवहन मंत्री के मुताबिक, बस किराए में बढ़ोतरी की जाती है तो सबसे पहले विपक्षी दल इसका विरोध कर सकते हैं। इसी आशंका के कारण किराया संशोधन को लेकर सरकार सावधानी बरत रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि परिवहन निगमों को आर्थिक रूप से चलाए रखने और यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी।
सुरेश ने कहा कि वह मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को परिवहन निगमों की आर्थिक स्थिति से अवगत कराते हुए किराए के मुद्दे पर चर्चा करेंगे। उनके मुताबिक, परिवहन निगमों के अस्तित्व और यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय स्थिति में सुधार जरूरी है। फिलहाल बस किराया बढ़ाने का कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं किया गया है।
परिवहन निगमों की आर्थिक स्थिति पर एक अन्य दबाव शक्ति योजना के बकाया भुगतान का भी है। अगस्त में सामने आए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चारों निगमों का शक्ति योजना के तहत 5,650.95 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित था। जून 2023 से 31 जुलाई 2026 के बीच इस योजना पर परिवहन निगमों ने 20,955.96 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि सरकार की ओर से 15,305.01 करोड़ रुपये जारी किए गए थे।
शक्ति योजना के तहत महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती है। जून 2023 से जुलाई 2026 के बीच योजना के तहत करीब 797.16 करोड़ मुफ्त यात्राएं दर्ज की गई थीं। परिवहन विभाग ने बकाया राशि जारी करने के लिए वित्त विभाग से अनुरोध भी किया था।
विधान परिषद की चर्चा के दौरान परिवहन निगमों में भर्ती का मुद्दा भी सामने आया। विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने उन अभ्यर्थियों का मामला उठाया, जिन्होंने परिवहन निगमों में भर्ती के लिए परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर ली थी, लेकिन करीब तीन साल बाद भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
इस पर मंत्री सुरेश ने निगमों की वित्तीय स्थिति का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जब मौजूदा कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है, तो नई नियुक्तियों के बाद कर्मचारियों के वेतन की व्यवस्था करना भी चुनौती होगी। उनके इस बयान से राज्य के परिवहन निगमों के सामने मौजूद वित्तीय संकट की गंभीरता सामने आई।
मंत्री ने दुग्ध उत्पादकों की परेशानियों से परिवहन निगमों की स्थिति की तुलना करते हुए कहा कि दोनों क्षेत्रों में लागत बढ़ने की समस्या सामने आ रही है। दूध उत्पादकों के लिए चारा, पशुओं की देखभाल और अन्य खर्च बढ़े हैं, जबकि परिवहन निगमों के लिए डीजल और परिचालन खर्च बड़ा मुद्दा बना हुआ है। उनका कहना था कि कीमत या किराया बढ़ाने के पीछे की परिस्थितियों को जनता और विपक्ष के सामने स्पष्ट करना आवश्यक है।
चारों परिवहन निगम कर्नाटक में रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों को सेवाएं देते हैं। इनमें बेंगलुरु की शहरी बस सेवा से लेकर राज्य के विभिन्न शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली सेवाएं शामिल हैं। ऐसे में इन निगमों की वित्तीय स्थिति का सीधा संबंध बस सेवाओं के संचालन, कर्मचारियों के वेतन और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं से है।
फिलहाल परिवहन मंत्री ने निगमों के करीब 8,000 करोड़ रुपये के सालाना नुकसान और कर्मचारियों के वेतन के लिए धन की कमी का मुद्दा विधान परिषद में उठाया है। उन्होंने किराया बढ़ाने को लेकर मुख्यमंत्री से बातचीत करने की बात कही है, लेकिन सरकार की ओर से बस किराए में किसी नई बढ़ोतरी की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री के साथ होने वाली चर्चा के बाद इस मुद्दे पर सरकार का अगला कदम स्पष्ट हो सकता है।