बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज (RDPR) विभाग ने ग्राम पंचायतों के कामकाज को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विभिन्न सरकारी विभाग ग्राम पंचायतों और उनके कर्मचारियों को निर्धारित वैधानिक जिम्मेदारियों के अतिरिक्त अनावश्यक कार्य नहीं सौंपें। इस संबंध में जारी सर्कुलर में अन्य विभागों द्वारा ग्राम पंचायतों पर अतिरिक्त काम का बोझ डालने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। विभाग का कहना है कि ग्राम पंचायतों के कर्मचारियों को उनकी मूल जिम्मेदारियों से हटाकर दूसरे विभागों के काम में लगाने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं और विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

आरडीपीआर विभाग ने विशेष रूप से चुनाव, जनगणना और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ग्राम पंचायत कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंचायत स्तर पर नियुक्त अधिकारी और कर्मचारी अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों का समय पर निर्वहन कर सकें।

दूसरे विभागों के अतिरिक्त काम पर जताई आपत्ति

ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग ने सर्कुलर में कहा है कि कई सरकारी विभाग अपने कार्यों को पूरा कराने के लिए ग्राम पंचायतों के कर्मचारियों की सेवाएं ले रहे हैं।

इसके कारण पंचायत विकास अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को अपने नियमित कार्यों के अतिरिक्त दूसरे विभागों की जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ रही हैं।

विभाग के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में पंचायत कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ जाता है और ग्रामीण नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं में देरी होने की आशंका रहती है।

सर्कुलर के माध्यम से विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे पंचायतों को अतिरिक्त काम सौंपने से पहले निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करें।

चुनाव और जनगणना के दौरान अतिरिक्त जिम्मेदारियों पर सवाल

आरडीपीआर विभाग ने चुनाव, जनगणना और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ग्राम पंचायतों पर अतिरिक्त काम का बोझ डालने के मामलों का विशेष उल्लेख किया है।

इन परिस्थितियों में विभिन्न सरकारी विभाग अक्सर पंचायत कर्मचारियों की सहायता लेते हैं। हालांकि, ग्राम पंचायतों की अपनी नियमित जिम्मेदारियां भी होती हैं, जिन्हें समय पर पूरा करना आवश्यक है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि दूसरे विभागों द्वारा गैर-वैधानिक कार्य सीधे ग्राम पंचायतों को सौंपना उचित नहीं है।

इसका अर्थ चुनाव, जनगणना या आपदा राहत से जुड़े सभी वैध दायित्वों पर रोक लगाना नहीं है। बल्कि विभाग की आपत्ति उन अतिरिक्त कार्यों पर है, जिन्हें नियमों और आवश्यक समन्वय के बिना पंचायत कर्मचारियों पर डाल दिया जाता है।

पुराने सरकारी आदेशों का भी दिया हवाला

सर्कुलर में राज्य सरकार के पूर्व निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्य सचिव की ओर से ग्राम पंचायतों को अतिरिक्त कार्य सौंपने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।

इसके बाद वर्ष 2016 में आरडीपीआर विभाग ने भी आदेश जारी कर कहा था कि ग्राम पंचायतों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देने से पहले संबंधित विभाग से परामर्श किया जाना चाहिए।

इसके बावजूद कई विभागों द्वारा इन निर्देशों का पालन नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इसी कारण आरडीपीआर विभाग ने एक बार फिर सर्कुलर जारी करके पूर्व निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

पंचायत विकास अधिकारियों पर बढ़ रहा काम का दबाव

ग्राम पंचायतों में पंचायत विकास अधिकारी यानी पीडीओ और अन्य कर्मचारी ग्रामीण प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं।

इन कर्मचारियों के माध्यम से स्थानीय विकास योजनाओं का क्रियान्वयन, सार्वजनिक सुविधाओं का रखरखाव, पंचायत रिकॉर्ड का प्रबंधन और नागरिक सेवाओं से जुड़े कार्य पूरे किए जाते हैं।

जब इन्हीं कर्मचारियों को दूसरे विभागों की जिम्मेदारियां सौंप दी जाती हैं, तो पंचायत स्तर पर उपलब्ध सीमित मानव संसाधन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

इसका असर नियमित प्रशासनिक प्रक्रियाओं और ग्रामीण विकास परियोजनाओं पर भी पड़ने की आशंका रहती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित होने की चिंता

आरडीपीआर विभाग की प्रमुख चिंता यह है कि अतिरिक्त कार्यों के कारण ग्राम पंचायतें अपनी मूल जिम्मेदारियों को प्राथमिकता नहीं दे पातीं।

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता, सड़कों का रखरखाव, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था और स्थानीय विकास योजनाएं ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल हैं।

इसके अलावा पंचायतों को सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, आवश्यक अभिलेखों के रखरखाव और ग्रामीण नागरिकों से जुड़ी सेवाओं का प्रबंधन भी करना पड़ता है।

कर्नाटक के पंचायत राज कानून में इन कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं।

ग्रामीण नागरिकों को मिल सकती है राहत

सरकार के इस निर्देश का प्रभाव ग्रामीण नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

यदि पंचायत कर्मचारी नियमित जिम्मेदारियों पर पर्याप्त समय दे सकेंगे, तो नागरिकों के आवेदनों, विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं के समाधान में होने वाली देरी कम की जा सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग विभिन्न प्रशासनिक कार्यों के लिए ग्राम पंचायत कार्यालयों पर निर्भर रहते हैं।

ऐसे में पंचायत कार्यालयों में कर्मचारियों की उपलब्धता और नियमित कामकाज की निरंतरता बनाए रखना आवश्यक है।

विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत

राज्य सरकार के इस कदम से विभिन्न विभागों के बीच कार्य आवंटन और प्रशासनिक समन्वय का महत्व भी सामने आया है।

चुनाव, जनगणना और प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियों में अलग-अलग विभागों को संयुक्त रूप से कार्य करना पड़ सकता है।

लेकिन ऐसी जिम्मेदारियां सौंपते समय संबंधित विभागों के अधिकार, कर्मचारियों की उपलब्धता और निर्धारित नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है।

कर्नाटक पंचायत राज अधिनियम में भी ग्राम पंचायतों को निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत अतिरिक्त कार्य सौंपने की व्यवस्था है। इसलिए सर्कुलर का उद्देश्य वैधानिक दायित्वों को समाप्त करना नहीं, बल्कि अनधिकृत और अनावश्यक अतिरिक्त कार्यों पर नियंत्रण रखना है।

पंचायतों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर जोर

आरडीपीआर विभाग का मानना है कि ग्राम पंचायतों की कार्यक्षमता बेहतर बनाने के लिए कर्मचारियों को उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों पर ध्यान देने का अवसर मिलना चाहिए।

पंचायत विकास अधिकारियों और कर्मचारियों पर अनावश्यक कार्यभार बढ़ने से ग्रामीण प्रशासन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

इसी को देखते हुए विभाग ने अन्य सरकारी विभागों से पूर्व में जारी निर्देशों का पालन करने को कहा है।

सर्कुलर के पालन पर रहेगी नजर

कर्नाटक सरकार का यह निर्देश ग्राम पंचायतों के कामकाज में प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब यह देखना होगा कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभाग इस सर्कुलर का किस प्रकार पालन करते हैं और पंचायत कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का बोझ कितना कम होता है।

सरकार की इस पहल से ग्राम पंचायतों में नियमित कार्यों को प्राथमिकता मिलने और ग्रामीण विकास योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में सहायता मिलने की उम्मीद है।

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