Karnataka : दीक्षांत समारोह ड्रेस कोड पर सुझाव के लिए तीन समितियां गठित
Karnataka कर्नाटक: उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के विश्वविद्यालयों से जुड़े तीन प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत अध्ययन और सुझाव देने के लिए तीन विशेषज्ञ समितियों का गठन किया है। इन समितियों का उद्देश्य उच्च शिक्षा प्रणाली में प्रोटोकॉल, परंपराओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सुव्यवस्थित और एकरूप बनाना बताया गया है।
पूर्व कुलपति अंबालिके हिरियन्ना की अध्यक्षता में गठित एक समिति को विशेष रूप से विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों से जुड़े प्रोटोकॉल और ड्रेस कोड का अध्ययन करने का जिम्मा दिया गया है। यह समिति यह जांच करेगी कि वर्तमान व्यवस्था कितनी व्यवहारिक और उपयुक्त है तथा इसमें किस प्रकार के सुधार किए जा सकते हैं।
समिति से यह भी कहा गया है कि वह सभी विश्वविद्यालयों में अपनाए जा रहे एक समान ड्रेस कोड पर अपने सुझाव दे। विशेष रूप से दीक्षांत समारोहों के दौरान पहनी जाने वाली पारंपरिक पश्चिमी शैली की पोशाक (robes) को लेकर भी व्यापक चर्चा की जा रही है। इस विषय पर संभावित बदलाव या विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
इस मुद्दे पर हाल ही में राज्यपाल Thaawarchand Gehlot की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar भी मौजूद रहे। इसके साथ ही राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपति भी इस बैठक में शामिल हुए।
बैठक के दौरान विश्वविद्यालयों में अपनाए जा रहे दीक्षांत समारोहों के स्वरूप और प्रोटोकॉल पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से यह विषय उठाया गया कि क्या मौजूदा पश्चिमी शैली की robes को जारी रखा जाए या इसे किसी अन्य पारंपरिक या स्थानीय विकल्प से बदला जाए। इस पर विभिन्न विचार सामने आए और सभी पक्षों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि दीक्षांत समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छात्रों के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। इसलिए इसके स्वरूप, परंपरा और प्रस्तुति पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
इसके अलावा अन्य दो समितियों को भी शिक्षा से जुड़े अलग-अलग प्रशासनिक और नीतिगत मुद्दों पर सुझाव देने का दायित्व सौंपा गया है। हालांकि उनका विस्तृत कार्यक्षेत्र अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सरकार का उद्देश्य है कि विशेषज्ञों की राय के आधार पर विश्वविद्यालयों की परंपराओं और प्रक्रियाओं को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त बनाया जाए। आने वाले समय में इन समितियों की रिपोर्ट के आधार पर महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए जा सकते हैं।
फिलहाल शिक्षा विभाग सभी समितियों से विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद आगे की दिशा तय की जाएगी।