Karnataka : 1,139 करोड़ की योजना पर तेजस्वी सूर्या का विरोध

Update: 2026-06-28 11:23 GMT

Karnataka कर्नाटक: राजधानी बेंगलुरु में 1,139 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित 2 किलोमीटर लंबे टनल प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। बेंगलुरु साउथ लोकसभा सीट से सांसद तेजस्वी सूर्या ने इस परियोजना का कड़ा विरोध करते हुए इसे “अनसाइंटिफिक सॉल्यूशन” करार दिया है। उनका कहना है कि यह प्रोजेक्ट शहर की गंभीर ट्रैफिक समस्या का वास्तविक समाधान नहीं है।

तेजस्वी सूर्या ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस परियोजना को जिस तरह से प्रस्तुत किया जा रहा है, वह बेंगलुरु के वैज्ञानिक और व्यावहारिक शहरी विकास की दिशा में नहीं जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती और इससे आम नागरिकों को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा।

सांसद ने दावा किया कि सरकार की अपनी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में यह स्वीकार किया गया है कि यह टनल शुरू होने के पहले दिन से ही भारी ट्रैफिक जाम का सामना करेगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी परियोजना की शुरुआत ही जाम से होती है, तो उसके सफल होने की संभावना पर गंभीर सवाल उठते हैं।

तेजस्वी सूर्या ने कहा, “यह परियोजना पहले दिन से ही ट्रैफिक जाम से जूझेगी। ऐसे में सवाल यह है कि इससे किसे फायदा होगा? क्या यह यात्रियों के लिए है या फिर किसी और उद्देश्य से बनाई जा रही है?”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस परियोजना का वास्तविक लाभ आम नागरिकों की बजाय कुछ विशेष और प्रभावशाली वर्गों को मिल सकता है। उनके अनुसार, यह टनल प्रोजेक्ट मुख्य रूप से उन लोगों की सुविधा के लिए तैयार किया जा रहा है जो एयरपोर्ट और शहर के प्रमुख इलाकों में तेज आवागमन करना चाहते हैं, जबकि आम टैक्सपेयर्स पर इसका आर्थिक बोझ पड़ेगा।

सूर्या ने यह भी कहा कि इस परियोजना से शहर के कुछ प्रभावशाली इलाकों, जैसे सदाशिवनगर और अन्य वीआईपी क्षेत्रों को अधिक लाभ मिलने की संभावना है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सार्वजनिक हित की परियोजना है या फिर कुछ चुनिंदा लोगों की सुविधा के लिए बनाई जा रही योजना है।

सांसद ने आरोप लगाया कि इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता की कमी होती है और इनसे जुड़े ठेकेदारों को भारी आर्थिक लाभ पहुंचता है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के पैसे का सही उपयोग होना चाहिए और ऐसी परियोजनाओं की गहन समीक्षा जरूरी है।

उन्होंने राज्य सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि परियोजना की लागत और इसके वास्तविक प्रभाव को लेकर स्पष्टता नहीं दी गई है। उनके अनुसार, बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहर में पहले से ही ट्रैफिक एक बड़ी समस्या है और ऐसे में किसी भी नई परियोजना को वैज्ञानिक आधार पर तैयार किया जाना चाहिए।

तेजस्वी सूर्या ने यह भी कहा कि शहर को ऐसी योजनाओं की जरूरत है जो लंबे समय तक टिकाऊ समाधान दें, न कि ऐसी परियोजनाएं जो शुरुआती चरण में ही समस्याएं पैदा करें। उन्होंने मांग की कि सरकार इस परियोजना की पुनः समीक्षा करे और विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे बढ़े।

राज्य सरकार की ओर से इस मामले पर फिलहाल विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना बेंगलुरु में ट्रैफिक दबाव को कम करने और तेज यातायात सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेंगलुरु जैसे महानगर में ट्रैफिक प्रबंधन एक जटिल चुनौती है और इसके लिए कई स्तरों पर समाधान की आवश्यकता होती है। ऐसे में टनल प्रोजेक्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों को लेकर अलग-अलग मत सामने आना स्वाभाविक है।

इस पूरे विवाद ने बेंगलुरु की शहरी विकास नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर और अधिक चर्चा होने की संभावना है।

Tags:    

Similar News